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दिव्या को राजेश के ऊपर भी बहुत गुस्सा आ रहा था क्योंकि वो उसकी शारीरिक जरूरत को पूरा नहीं करता था और उसपर वो जॉब के चक्कर में हफ्तों घर से बाहर रहता था. वो सोचती है की राजेश से पूछे की वो कब आयेगा. वो जैसे ही फ़ोन उठाती है देखती है की मनीष के कई मेसेज और सलमान की कई मिस्ड कॉल्स थी. वो जैसे ही राजेश को फ़ोन लगाने लगती है वैसे ही उसमे मनीष का मेसेज आ जाता है. उसको मनीष पर भी गुस्सा आता है की वो अपनी टीचर से गन्दी बातें करता है और अब तो रोज ही मेसेज करने लगा है. तभी फिर से मनीष का मेसेज आता है.

मनीष: आप ठीक तो हैं न मैम. मुझे आपकी फ़िक्र हो रही है.

दिव्या: मेरी फ़िक्र करने के लिए और लोग हैं. तुमको मेरी फ़िक्र करने की जरूरत नहीं.

मनीष: सॉरी मैम. वो सुबह से आपको कई मेसेज किये लेकिन कोई जवाब नहीं आया इसीलिए सोचा की कहीं कोई प्रॉब्लम तो नहीं है.

दिव्या: तुमको किसने बोला मेसेज करने को. मेरे पास और कोई काम नहीं है क्या की सिर्फ तुम्हारे मेसेज का जवाब देती रहूँ. जाकर थोडा पढ़ लो क्योंकि कल नक़ल नहीं करने दूँगी.

मनीष: स्टडी तो मैंने कर ली है. अब और मन नहीं था पढने का इसीलिए आपको मेसेज किया.

दिव्या: मैं कोई तुम्हारे टाइम पास की चीज हूँ क्या? अब और मेसेज मत करना.

मनीष: सॉरी मैम. लगता है मैंने आपको डिस्टर्ब कर दिया. वैसे अगर आपका मन करे तो रात को मैं आपको उसी साईट पर मिलूंगा. बात करनी हो तो आ जाना.

दिव्या कोई जवाब नहीं देती और राजेश को कॉल कर देती है.

राजेश: हेल्लो डिअर. कैसी हो?

दिव्या: ठीक हूँ. तुमने तो वहां पहुच कर कॉल भी नहीं किया. कभी मेरी याद भी आती है?

राजेश: क्या बताऊ यार काम में ऐसा फंसा की कॉल करने का टाइम ही नहीं मिला.

दिव्या: आखिर कब तक ऐसे चलेगा?

राजेश: तुमको तो पता ही है की मैंने डेस्क जॉब के लिए अप्लाई किया हुआ है. अगर किस्मत अच्छी हुई तो एक दो महीने में ही काम हो जायेगा.

दिव्या: तुहारी तो पता नहीं लेकिन मुझे अपनी किस्मत तो अच्छी नहीं लग रही. बस एक बात सुन लो की मैं अब अकेले नहीं रह सकती.

राजेश: मैं भी तुम्हारे बिना बड़ी मुश्किल से यहाँ हूँ. अच्छा सुनो सुबह एक रिपोर्ट सबमिट करनी है. उसी पर काम कर रहा था तो बाद में बात करते हैं.

दिव्या: करवाचौथ पर तो आओगे न?

राजेश: हाँ पूरी कोशिश कर रहा हूँ.

दिव्या: कोशिश मतलब तुम नहीं आओगे. साल में एक ही तो दिन होता है और उसमे भी तुम...

 

राजेश: यार मैंने बॉस को बोल रखा है लेकिन उसी दिन काफी लोगों ने छुट्टी अप्लाई कर रखी है इसीलिए अभी अप्प्रूव नहीं हुई है लेकिन हो जानी चाहिए.

दिव्या: अगर तुम करवाचौथ पर नहीं आये तो समझ लेना. मैं जिंदगी में तुमसे कभी बात नहीं करूंगी.

ये बोल कर दिव्या फ़ोन काट देती है. उसे लगता है की राजेश उसे फ़ोन करेगा लेकिन कोई फ़ोन नहीं आता तो वो राजेश से और गुस्सा हो जाती है. दिव्या का मन बहुत उदास हो जाता है. उसको लगता है की राजेश उससे कभी कोई रोमांटिक बात ही नहीं करता. हमेशा काम का बहाना बना देता है. वो यही सब सोचती रहती है और बार बार अपना फोन देखती है की शायद राजेश कोई मेसेज ही कर दे लेकिन उधर राजेश तो अपना काम निपटा कर कब का सो गया है.

दिव्या घडी की तरफ देखती है. रात के 12 बजने वाले हैं और उसकी आँखों में नींद का कोई नामोनिशान नहीं है.
उसको समझ नहीं आता की क्या करे. तभी वो उस वेबसाइट के बारे में सोचती है जिस पर मनीष उससे चैट करता है. वो सोचती है की मनीष तो अब तक सो गया होगा. आज किसी और से चैट करके देखते है. वो लैपटॉप उठा कर जैसे ही लॉग इन करती है वो देखती है की मनीष अभी भी ऑनलाइन है. वो सोचती है की मनीष को मेसेज करे या किसी अननोन से चैट करे. मनीष भी दिव्या को ऑनलाइन देख कर खुश हो जाता है. लेकिन जब दिव्या उसको कोई मेसेज नहीं भेजती तब वो मेसेज करता है.

मनीष: क्या हुआ मैम नींद नहीं आ रही क्या?

दिव्या: बस सोने ही वाली थी.

मनीष: आपने मेसेज नहीं किया की आप ऑनलाइन हैं.

दिव्या: कल तुम्हारा एग्जाम है तो सोचा की तुमको डिस्टर्ब न करूं.

मनीष: ओह मैम. आपसे भी कोई डिस्टर्ब हो सकता है भला. वैसे भी जबसे आपसे दोस्ती हुई है मेरी पढाई अच्छी चल रही है. कल का पेपर भी अच्छा ही होगा.

दिव्या: गुड.

मनीष: मैम कल के पेपर के बाद चार दिन छुट्टी है. आपका क्या प्रोग्राम है.

दिव्या: क्यों?

मनीष: नहीं वो करवाचौथ भी है न तो मुझे लगा की आपके हस्बैंड आपको कही बाहर ले जा रहे होंगे.

दिव्या: अरे अभी तो यही कन्फर्म नहीं है की राजेश करवाचौथ में आ भी पाएंगे या नहीं. घूमना तो दूर की बात है.

मनीष: क्या मैम आप लोग लाइफ एन्जॉय नहीं करते. अगर वो आपको घुमाने न ले जाए तो देना मत उनको.

दिव्या: क्या?

मनीष: अरे कुछ नहीं ऐसे ही बोल दिया.

अब दिव्या समझ जाती है की मनीष क्या बोल रहा है. वो झेंप जाती है.

दिव्या: चलो अब मैं लॉगआउट करती हूँ.

मनीष: अरे इतनी क्या जल्दी है मैम.

दिव्या: तुमको नींद नहीं आती क्या?

मनीष: एक बात बोलूं.

दिव्या: बोलो वैसे भी मना करने पर भी तुम कहाँ मानते हो.

मनीष: मैम जब तक लंड खड़ा हो नींद नहीं आती है.

दिव्या: फिर से बदतमीजी. मुझसे ये सब मत बोला करो. मुझे पसंद नहीं है.

मनीष: मैम आप तो खामखाँ नाराज़ हो जाती है. हम खुल कर बात कर सके इसीलिए तो इस साईट पर आते हैं. मैं तो यहाँ आपको दोस्त मान कर बात करता हूँ टीचर समझ कर नहीं और दोस्त से क्या शर्म.

दिव्या: लेकिन मैं तुमसे ऐसे बात नहीं कर सकती. लोग कहेंगे की टीचर होकर बच्चो को बिगाडती है.

मनीष: अरे मैम समझाया तो था की यहाँ सब सेफ है और आप ही बताओ की मैं लंड को लंड न कहूं तो क्या कहूं?

दिव्या: बस अब और बदमाशी नहीं.

तभी दिव्या के स्क्रीन पर मनीष की कैमरा शेयर करने की रिक्वेस्ट आती है. दिव्या रिजेक्ट कर देती है.

मनीष: अरे मैम रिजेक्ट क्यों किया.

दिव्या: क्योंकि तुम बहुत बेशरम हो.

मनीष: आपसे क्यों शरमाऊँ. आपने तो सब देखा ही है.

दिव्या: मुझे दुबारा नहीं देखना अब.

मनीष: प्लीज मैम एक्सेप्ट करो न. मेरा जल्दी हो जायेगा. फिर कल पेपर भी तो है.

मनीष फिर से रिक्वेस्ट भेज देता है. दिव्या सोचती है की क्या करे.

मनीष: प्लीज् मैम एक्सेप्ट करो न. मैं कैमरा का फोकस लंड पर नहीं करूंगा. अगर करूं तो आप दुबारा बात मत करना. प्लीज मैम प्लीज.

दिव्या रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर लेती है. मनीष दिव्या की स्क्रीन पर दिखने लगता है. मनीष मुठ मार रहा है हालाँकि उसका लंड नहीं दिख रहा लेकिन उसके बॉडी मूवमेंट से दिव्या को पता चल जाता है की वो क्या कर रहा है.

 

 



दिव्या: तुम पागल हो क्या? क्या कर रहे हो.

मनीष: मैम आप भी तो करती है.

दिव्या: सबके सामने नहीं करती.

मनीष: मैं भी सिर्फ आपके सामने कर रहा हूँ. आपसे बात करते ही ये खड़ा हो जाता है तो क्या करूं.

दिव्या कोई जवाब नहीं देती.

मनीष: आपने बताया नहीं की आपका करवाचौथ का क्या प्लान है.

दिव्या: बताया तो राजेश का कुछ पक्का नहीं है.

मनीष: अरे आप लिख कर ले लो की वो जरूर आएंगे.

दिव्या: तुमको कैसे पता.

मनीष: मैम उस दिन हर पति अपनी पत्नी का जरूर चोदता है तो आपके हस्बैंड आपको कैसे छोड़ देंगे.

दिव्या: तुमको तो बस यही फालतू बातें आती है.

मनीष: नहीं मैम फालतू बात नहीं है. अगर मैं आपका पति होता तो दिन में कई बार आपको चोदता.

दिव्या: तुम चुप ही रहो और जो कर रहे थे वो कर लो.

अब दिव्या मनीष की बातों से ज्यादा नाराज नहीं हो रही लेकिन झिझक रही है.

मनीष: मैम वो तो दुसरे हाथ से कर ही रहा हूँ. आप बात करो.

दिव्या: नहीं अब मुझे भी सोना है.

मनीष: ठीक है मैम लेकिन जाने से पहले एक बार अपना कैमरा भी ओन करो न.

दिव्या: क्यों?

मनीष: आपकी देखे बिना मैं झड़ नहीं पाऊँगा.

दिव्या: पागल हो क्या? मैं कैमरा ओन नहीं कर रही.

मनीष: मैम मैं कुछ गलत करने को तो नहीं कह रहा बस आपका चेहरा देखना है. प्लीज ओन करो न.

दिव्या मना करती है लेकिन मनीष पीछे पड़ जाता है तो आखिर में दिव्या कैमरा ओन कर देती है.

मनीष: वाओ मैम. क्या सेक्सी लग रही हो इस नाईटी में. आपको देख कर मेरा और तन गया है. आप देखेंगी.

दिव्या को लगता है की मनीष के हाथ की स्पीड तेज हो गयी है. दिव्या को गिल्ट के साथ साथ एक अजीब सी उत्तेजना भी महसूस होती है.

दिव्या: नहीं मुझे नहीं देखना. तुम बस जल्दी करो.

मनीष: मैम आपने इस नाईटी के नीचे क्या पहना है?

 

 



दिव्या: ये थ्री पीस है. शॉर्ट्स टॉप और ऊपर ये गाउन.

मनीष: इस गाउन को उतार दो न मैम.

दिव्या: अब तुम कुछ ज्यादा ही बोल रहे हो.

मनीष: अरे कौन सा आपको नंगा होने को कह रहा हूँ. नीचे आपने टॉप पहना तो है. प्लीज मैम बस एक बार.

दिव्या: नहीं नहीं तुम तो हद से बढ़ रहे हो. अभी ये बोल रहे हो फिर कुछ और बोलोगे.

मनीष: गॉड प्रॉमिस मैम और कुछ नहीं कहूँगा. बस आप इसको उतार दो एक बार.

दिव्या न जाने क्यों गाउन उतार देती है.

मनीष: आह मैम क्या बूब्स है आपके. वाह निप्पल भी साफ़ दिख रहे हैं. मन कर रहा है की इन्हें चूस कर लाल कर दूं.

दिव्या: बस अब मैं सोने जा रही हूँ.

मनीष: मैम रुको तो सही. बस पांच मिनट.

दिव्या: गुड नाईट.

मनीष: अरे मैम कल कब आओगी ये तो बता दो.

दिव्या बिना कोई जवाब दिए लॉगआउट कर देती है. दिव्या मन ही मन सोचने लगती है की वो क्या कर रही है. कैसे वो अपने स्टूडेंट से ऐसी बातें कर सकती है. लेकिन फिर उसका मन कहता है की उसने कुछ गलत नहीं किया. सिर्फ बात करने से क्या होता है. आखिरकार दिव्या जैसे तैसे सो जाती है. सुबह वो काफी देर से उठती है और जल्दी जल्दी स्कूल के लिए तैयार होती है और साथ ही उसे केवाईसी के लिए बैंक भी जाना था.

वैसे भी आज उसकी बस की ड्यूटी नहीं थी तो वो अपनी स्कूटी से बैंक निकल जाती है और जल्दी से वहां का काम निपटा कर स्कूल की तरफ चल देती है. रस्ते में एक बस स्टैंड पर उसे मनीष खड़ा दिखता है. वो दिव्या को हाथ देता है तो वो उसके पास जाकर स्कूटी रोक देती है.

 



मनीष: गुड मोर्निंग मैम.

दिव्या: मोर्निंग. क्या हुआ? स्कूल नहीं जाना क्या? एग्जाम शुरू होने वाला होगा.

मनीष: मैम बाइक ख़राब हो गयी इसीलिए यहाँ बस का वेट कर रहा था. लेकिन काफी देर से कोई बस आई ही नहीं.

दिव्या: ओह. चलो बैठो. मैं स्कूल ही जा रही हूँ.

मनीष दिव्या के पीछे बैठ जाता है लेकिन चिपकता नहीं है.

मनीष: आप भी आज लेट हो गयी क्या? रात को मैंने सोने नहीं दिया तो क्या देर तक सो रही थी?

दिव्या: नहीं. मुझे कुछ काम था.

ये कह कर दिव्या स्कूटी को तेज़ी से भगाती है. उधर दिव्या के करीब होने से मनीष का लंड खड़ा हो जाता है लेकिन वो उसे दिव्या को छूने नहीं देता. उसे लगता है की कहीं मैम नाराज़ न हो जाए लेकिन गैप बनाकर बैठने से उसे डर भी लग रहा है.

मनीष: मैम थोडा धीरे चलिए वरना मैं गिर जाऊँगा.

दिव्या: अरे धीरे चले तो तुम्हारा पेपर छूट जायेगा.

मनीष: इसमें तो कुछ पकड़ने को भी नहीं है. मैम मैं आपको पकड़ लूं क्या?

दिव्या कोई जवाब नहीं देती तो मनीष दिव्या की कमर पकड़ लेता है. मनीष के हाथ रखते ही दिव्या के बदन में एक करंट दौड़ जाता है पर वो कुछ कहती नहीं. अब मनीष को शरारत सूझती है तो वो आपने दोनों हाथ मिला लेता है जिससे उसके हाथ एकदम दिव्या की नाभि के ऊपर आ जाते है और वो दिव्या की नाभि में ऊँगली करने लगता है. बीच बीच में रास्ता ख़राब होने का भी मनीष फायदा उठाता है और दिव्या के पेट और कमर को खूब सहलाता है. धीरे धीर जो गैप उसने बना रखा हा वो भी झटके लगने से ख़तम हो जाता है और दिव्या को अपनी गांड पर एक सख्त चुभन होती है. मनीष दिव्या का कोई रिएक्शन न देख कर अपना लंड दिव्या की गांड में और जोर से दबाता है.

मनीष का मन तो कर रहा था की वो दिव्या की चूंची भी दबा दे लेकिन वो रिस्क नहीं लेता. दिव्या को समझ नहीं आता की वो मनीष को क्या बोले क्योंकि उसे तो मनीष बोल ही चुका था की उससे बात करके ही उसका खड़ा हो जाता है. मनीष भी दिव्या के कुछ न बोलने का फायदा अच्छे से लेता है लेकिन कुछ ही देर में वो लोग स्कूल पहुच जाते है. दिव्या मनीष को स्कूल से थोडा पहले उतार देती है. मनीष दिव्या को थैंक्स बोलकर चला जाता है लेकिन सलमान इन दोनों को साथ आते देख लेता है.

उसे न जाने क्यों बहुत बुरा लगता है. उसे लगता है की मनीष चिकना लौंडा है इसीलिए कहीं दिव्या उसके हाथ से निकल कर मनीष से न सेट हो जाए. वो उस जगह पहुँच जाता है जहाँ टीचर्स की कार और बाइक पार्क होती हैं. दिव्या अपनी स्कूटी लगा कर वहां से जा रही थी की सामने सलमान आ जाता है. उसे याद आ जाता है की कैसे वो सलमान को बाथरूम में बंद करके भागी थी.

सलमान: गुड मोर्निंग. कैसी हैं मैडम आप और अब तबियत कैसी है.

दिव्या: डोन्ट टॉक टू मी.

सलमान: मैंने ऐसा क्या किया मैडम उल्टा आप ही मुझे बंद करके भाग गयी थी.

दिव्या: अपनी हरकतें नहीं याद तुम्हे.

सलमान: कोई ऐसी भी ख़राब हरकतें नहीं थी मेरी. लगता है आपको कोई और मिल गया है.

दिव्या: तुमको बोला था न की मुझको परेशान मत करो. लगता है आज तुम्हारी कंप्लेंट करनी ही होगी.

दिव्या ये बोलकर स्टाफ रूम चली जाती है. उधर मनीष और पूजा का पेपर काफी अच्छा होता है क्योंकि मदन ने पूजा को चोदने के बदले पेपर दे दिया था. पेपर ख़तम होने के बाद दिव्या पेपर जमा करने प्रिंसिपल के ऑफिस में जाती है.

मदन: आइये दिव्या जी. आज का पेपर सही से कंडक्ट हो गया न.

दिव्या: जी सर हो गया पर मुझे कुछ और बात करनी थी.

मदन: हाँ हाँ बोलिए.

दिव्या: सर मुझे वाचमैन की कंप्लेंट करनी है. वो मुझे घूरता रहता है और कभी कभी कमेंट्स भी करता है.

मदन: अरे उसकी तो आज तक कोई कंप्लेंट नहीं आई बल्कि सब उसकी बहुत तारीफ करते हैं.

दिव्या: सर मैं झूठ क्यों बोलूंगी.

मदन: नहीं नहीं आपके झूठ बोलने का तो सवाल ही नहीं है. आप रुकिए दो मिनट.

प्रिंसिपल सलमान को अपने ऑफिस में बुलाता है.

सलमान: सर आपने बुलाया क्या?

मदन: ये दिव्या मैडम क्या कह रही हैं? तुम मैडम को परेशान करते हो.

सलमान: नहीं सर ऐसा तो बिलकुल नहीं है.

सलमान अब दिव्या से चिढ जाता है.

मदन: फिर मैडम क्यों कह रही है.

सलमान: सर वो तो नहीं पता लेकिन मैं इतनी अच्छी मैडम को क्यों परेशान करूंगा. मैडम तो इतनी अच्छी हैं की कल मेरा बर्थडे सेलिब्रेट करने मेरे रूम पर आ गयी थी.

सलमान के मुह से ये बात सुन कर दिव्या के होश उड़ जाते हैं. उसने सपने में नहीं सोचा था की प्रिंसिपल के सामने सलमान ये बात कह देगा. उसको डर लगता है की सलमान कुछ और न बक दे.

मदन: अच्छा? क्यों मैडम क्या आप इसके रूम पर गयी थीं?

दिव्या: वो सर मेरे कुछ पेपर्स स्कूल में रह गए थे तो कल मैं उन्हें लेने स्कूल आई थी. ये कह रहा था की इसका कोई नहीं है और ये अकेला ही बर्थडे मनाता है तो विश करने इसके रूम पर चली गयी थी.

मदन: सलमान तुम जाओ. तुमको मैं बाद में बुलाता हूँ.

सलमान बाहर चला जाता है.

मदन: अरे दिव्या मैडम. आप एक चौकीदार का बर्थडे मनाने उसके रूम में चली गयी और वो भी अकेले. पेरेंट्स को पता चलेगा तो क्या सोचेंगे की टीचर गार्ड के बर्थडे में जा रही है.

दिव्या: नहीं सर ऐसी बात नहीं है. वो सलमान ने कहा की......

मदन: अरे वो कुछ भी कहे लेकिन आप तो पढ़ी लिखी हैं न. आपको तो स्कूल की रेपूटेशन के बारे में सोचना चाहिए. क्या ये बात आपको शोभा देती है की आप उसका बर्थडे सेलिब्रेट करने उसके रूम में अकेले जाए. आप अगर उससे इतना क्लोजनेस दिखाएंगी तो वो तो बदतमीजी करेगा ही.

दिव्या: ठीक है सर मैं आगे से ये बात ध्यान में रखूंगी.

मदन: जी बिलकुल ध्यान रखिये. फिर भी मैं सलमान को भी समझा दूंगा.

दिव्या: थैंक यू सर.

दिव्या उठ कर चली जाती है. दिव्या के निकलते ही सलमान मदन के ऑफिस में आ जाता है.

मदन: ये सब क्या चल रहा है बे?

सलमान: ड्रामा कर रही है साली.

 

 

मदन: अबे आज तो उसने मुझसे कही है. कल किसी और को बोल दिया तो.

सलमान: अब ये किसी से कुछ नहीं कहेगी सर क्योंकि इसको पता चल गया है की अगर इसने किसी से कुछ बोला तो मैं इसकी इज्जत उतार दूंगा.

मदन: अबे कहीं फंस न जाना.

सलमान: फंसने की तो कोई बात ही नहीं है. आपने देखा नहीं की जब मैंने कल की बात की तो साली के चेहरे का रंग उड़ गया.

मदन: अबे ऐसा क्या किया कल?

सलमान: साली कल पूरी नंगी पड़ी थी मेरे बिस्तर पर. लेकिन साली चुदने से पहले झड गयी तो भाग गयी और अब नाटक कर रही है.

 

 



मदन: अबे झूठ मत बोल. तेरी बात सुन कर तो मेरा खड़ा हो गया है.

सलमान: झूठ नहीं बोल रहा मैं. आपने ही तो कहा था की दोनों नयी टीचर में से किसी की चाहिए तो मैं इसके पीछे लग गया. मुझे मुठ मारने ले लिए इसने अपनी पेंटी मुझे दी है. अपना बर्थडे इसकी चूत चाटकर मनाया है मैंने कल. बस साली को चोद नहीं पाया वरना आज ये आपके नीचे होती.

मदन: अरे यार लंड खड़ा कर दिया. साले खुद इसके मजे ले रहा था और मुझे पूजा से टरका रहा था.

सलमान: सर आपके लिए ही तो इसको फंसा रहा था क्योंकि आपने ही कहा था की ये आपको परवीन से ज्यादा पसंद है. मैंने आपको पहले भी कितनी टीचर्स की चूत दिलवाई हैं और अब तो स्टूडेंट्स की भी दिलवा रहा हूँ. आपने तो देखा की ये आम अभी पका नहीं है और पकते ही सीधा आपकी झोली में गिरेगा. वैसे भी मैं जब तक निश्चिन्त न हो जाऊ किसी को आपके पास नहीं भेजता.

मदन: ठीक है लेकिन इसको देखते ही लंड खड़ा हो जाता है. और अब तेरी बात सुन कर तो इसको रौंदने का मन कर रहा है. गजब का माल है. इस साली को तो मैं अपनी पर्सनल रखैल बनाना चाहता हूँ.

सलमान: बनवा दूंगा सर आपकी रखैल लेकिन मुझको मत भूलना और इस बार पेपर लीक में मेरा हिस्सा थोडा बढ़ा देना.

मदन: ज्यादा लालच मत कर. तू पहले इसकी दिलवा फिर मैं तेरा हिस्सा बढ़ा दूंगा.

सलमान: ठीक है सर. ये जल्द ही आपके नीचे होगी.

मदन: ठीक है. अच्छा देखना अगर पूजा घर न गयी हो तो भेजना. ये लंड शांत कर लूं घर जाने से पहले.

सलमान: सारे बच्चे चले गए हैं सर अब तो किसी टीचर से काम चला लो.

ये बोलकर सलमान बाहर निकल जाता है. वो देखता है की सामने से रश्मि मैडम पेपर जमा करने प्रिंसिपल ऑफिस में आ रही है. वो सोचता है आज इस साली की खैर नहीं.

 

 



मदन: आओ रश्मि मेरे पास बैठो.

रश्मि: सर ये पेपर सबमिट करने थे.

मदन: अरे ये पेपर कहाँ भाग रहे हैं. यहाँ बैठो मेरे पास.

रश्मि: लेकिन सर मुझे थोडा जल्दी है.

मदन: हम्म. तुमको हमेशा जल्दी रहती है. हेड टीचर बनने की जल्दी थी तब तो रोज छुट्टी के बाद चुदवाने आ जाती थी. जब बना दिया तब घर जाने की जल्दी रहती है.

रश्मि: नहीं सर वो क्या है की...

मदन: बस मेरे पास ज्यादा टाइम नहीं है. जल्दी से लौड़ा चूस दो मेरा.

ये बोल कर प्रिंसिपल रश्मि के कंधो पर हाथ रख कर उसे नीचे बिठा देता है और अपना लंड पेंट खोल कर उसके मुह के सामने कर देता है. रश्मि अब चुपचाप अपना मुह खोल कर मदन का लंड अपने मुह में भर लेती है. मदन अपना लंड रश्मि के गले तक उतार देता है. रश्मि मदन का लंड अच्छे से चूसने लगती है ताकि वो जल्दी से झड जाए.

 

 



कुछ ही देर में मदन आह्ह दिव्या बोलकर अपना सारा माल रश्मि में मुह में छोड़ देता है. रश्मि पूरा माल पी जाती है. एक भी बूँद बाहर नहीं गिरती लेकिन प्रिंसिपल के मुह से दिव्या का नाम सुनकर वो समझ जाती है की अब मदन की हवस भरी निगाहें दिव्या के ऊपर हैं. रश्मि खड़ी होकर अपने कपडे ठीक करने लगती है और प्रिसिपल भी अपनी पेंट पहन लेता है.

रश्मि: तो अब मुझसे ज्यादा दिव्या पसंद है आपको.

मदन: मेरी जान तू तो अपने आप आती ही नहीं है. आज भी नखरे कर रही थी. तो मुझे भी इधर उधर देखना ही पड़ता है वैसे तेरी जगह कौन ले सकता है.

रश्मि को ये सुनकर अच्छा लगता है क्योंकि उसको टीचर हेड बनाने के साथ प्रिसिपल और भी कई फायदे पहुचता रहता है.

रश्मि: लेकिन जहाँ तक मैं समझती हूँ दिव्या इतने आराम से नहीं मानेगी.

मदन: अरे आराम से तो तू भी नहीं मान रही थी लेकिन अब देखो.

रश्मि: मुझे तो आपने प्रमोशन लालच देकर फंसा लिया था लेकिन दिव्या को कोई लालच देकर नहीं फंसा पाओगे. हाँ उसका हस्बैंड ज्यादातर बाहर रहता है तो शायद उसे सेक्स का सुख न दे पाता हो.

मदन: कोई बात नहीं. अब मैं उसे हर तरह का सुख दूंगा. चलो अब तुमको देर नहीं हो रही.

रश्मि फिर कुछ नहीं कहती और दोनों अपने घर निकल जाते हैं. उधर दिव्या भी घर पहुच चुकी है लेकिन वो काफी बेचैन है. सलमान ने प्रिंसिपल से जो कहा उसका मूड ख़राब हो गया था. उसको लगा की प्रिंसिपल उसके बारे में क्या सोच रहा होगा. फिर उसको मनीष पर भी गुस्सा आता है की उसने स्कूटी में उसके बदन से छेड़छाड़ की. वो सोचती है की सलमान को कुछ नहीं बोल सकती लेकिन आज मनीष की अच्छे से खबर लूंगी.