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जैसा कि आप सब जानते हैं कि मेरा नाम फरिहा शाह है और मेरी ये कहानी जो कि अब मैं लिखने जा रही हूँ। इसे भी मेरे भाई ही की जुबानी लिखूँगी । अब चलते हैं परिचय की तरफ।

पात्र (किरदार) परिचय

01. सलमा- अम्मी जान, उम्र 39 साल, अभी तक जिस्मानी तौर पे एकदम फिट और सेक्सी बाडी की मालिक हैं, देखने में लगता ही नहीं कि मेरी अम्मी की उम्र 39 साल है। बल्की देखने में लगता है की वो जैसे अभी 28 साल की होंगी।

02. फरिहा शाह- उम्र 21 साल, स्मार्ट, एक घरेलू लड़की जो कि सेक्स की शौकीन है, लेकिन अभी तक किसी के साथ किया नहीं, बस फिल्में देखना और अपनी दोस्तों के साथ हँसी मजाक और मस्ती से ज्यादा आगे नहीं बढ़ी थी पढ़ाई छोड़ दी है, क्योंकी दिल ही नहीं लगता पढ़ाई में।

03. सलमान (सन्नी)- मेरा छोटा भाई और इस कहानी को इसी की जुबानी पहुँचाया जाएगा। भाई 19 साल का है एफ.एससी. कर रहा है गोरा चिट्टा और गबरू जवान है, जिस पे कोई भी लड़की अपना दिल हार बैठे।

04. निदा- अभी 18 साल की हुई है और अभी कालेज में है। एक जवान और मस्त जिश्म की मालिक सेक्सी लड़की, लेकिन हर वक़्त बस किसी ना किसी के साथ शर्त और मस्ती के मूड में ही रहती है, घर की जान है।

05. काशी- सलमान (सन्नी) का दोस्त।

06. नीलू- काशी की बहन।

07. सफदर- सलमान (सन्नी) का मामा

08. इरम- सफदर की बेटी

हमारे अब्बू एक रोड एक्सीडेंट में मर चुके हैं कोई दो साल पहले ही। जिसके बाद हम 4 लोग ही हैं जो कि इस घर में रहते हैं, क्योंकी अब्बू ने हमारे लिए यहाँ लाहोर में ही एक मार्केट में 8 दुकान छोड़ी थी, जिनसे की। अच्छा खासा किराया मिला करता था हमें, जिससे हमें कोई खास परेशानी नहीं हुई जिंदगी में। अब्बू के बाद भी हमारा घर दो फ्लोर पर मुश्तकिल है जिसमें कि हर फ्लोर पे 4 कमरे हैं सबके लिए, दो बाथरूम हैं। एक रूम अम्मी अब्बू का है जिसमें कि अब अब्बू के गुजरने के बाद अम्मी अकेली ही रहती हैं।

उनके साथ वाला रूम निदा का है जिसमें अम्मी और निदा के रूम में एक अटैच बाथ है जिसे वो दोनों इश्तेमाल करती हैं। उसके साथ फरी बाजी और आखीर में मेरा रूम है। मेरे और बाजी के कमरे में भी एक ही बाथ है। जिसे हम दोनों दूसरी तरफ का दरवाजा बंद करके इश्तेमाल करते हैं। उसके बाद बाहर एक हाल रूम है, जहाँहम खाना-पीना करते हैं और टीवी भी देखते हैं और वहीं एक साइड पे किचेन भी है।

ऊपर के फ्लोर पे भी एक कमरा है लेकिन वहाँ सिवाए घर के फालतू समान के कोई रहता नहीं है। लेकिन अगर कोई मेहमान आ जाए जो कि अब्बू की लाइफ में ही आया करते थे तो उनके लिए दो कमरे थे जिसके लिए बाहर लान की तरफ से जो कि घर की बैक पे था ऊपर जाने के लिए अलग ही से रास्ता था। जिसका कि बाकी घर से कोई तालुक नहीं था।
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और अब ये कहानी यहाँ से सन्नी की जुबानी शुरू हो रही है। 

ये नहीं था कि मैं कोई बहुत ही शरीफ और फट्टू किश्म का लड़का था। लेकिन ये जरूर था कि मैंने कभी अपनी अम्मी जान और बहनों की तरफ गलत नजर से नहीं देखा था। बाकी जो मिली जहाँ मिली चोद डाला चाहे वो 55 साल की बुढ़िया ही क्यों ना हो, मेरे पास माफी नहीं थी। ये था मेरा लाइफ स्टाइल।

ये आज से एक साल पहले की बात है जब मेरा एक कालेज का दोस्त जो कि मुझे सबसे ज्यादा अजीज था जिसका नाम काशी था लेकिन था जरा लोवर मिडिल क्लास से लेकिन एक बात जो उसकी सबसे अच्छी थी वो ये थी कि वो जब भी कोई नई लड़की फँसाता मुझे जरूर बताता। और जब खुद उसे चोद लेता तो मुझे भी उस लड़की की फुद्दी जरूर दिलाता, क्योंकी मैं ही तो उसे लड़कियों पे खर्च के लिए पैसे दिया करता था। तो फिर वो मुझसे कैसे दगा करता।


अब तक हम कोई 4 के करीब लड़कियों को मिलकर चोद चुके थे जिनमें से एक को मैंने सेट किया था और बाकी 3 को काशी ने। क्योंकी वो तीन भी उसी की कालोनी की थीं। एक दिन वो मेरे पास बैठा किसी सोच में गुम था और मैं उसी को देख रहा था कि कब इस साले की सोच खतम हो और ये साला मुझे कुछ बताए लेकिन जब मैंने देखा कि उसकी सोच खतम होने में ही नहीं आ रही है।

तो मैंने उसकी कमर पे एक धाप मारते हुये उससे कहा- “साले, कहाँ गुम हो गया है गान्डू की औलाद?”

काशी अपने हाथ को पीछे की तरफ मोड़कर अपनी कमर को मलते हुये बोला- “यार, कितनी बार कहा है तुझसे कि हाथ का मजाक मत किया कर..."

मैं- साले कब से तेरे पास बैठा तुझे देख रहा हूँ लेकिन तुम हो कि उदास उल्लू की तरह पता नहीं किन सोचों में गुम हो।

काशी- यार, मैं सोच रहा था कि तेरे साथ बात किस तरह शुरू करूं कि तूने अपना ये हथौड़े जैसा हाथ मुझे मार दिया।

मैं- साले गान्डू, ऐसी कौन सी बात है जो करने के लिए तुम्हें सोचना पड़ रहा है। हम दोनों दोस्त हैं और वो भी पक्के वाले और ‘हाहाहाहा' करके हँसने लगा।

काशी- यार एक लड़की का नम्बर मिला है, राबिया से। मैंने उससे बात भी की है और मजे की बात ये है कि वो सेक्स में भी इंटरेस्ट रखती है। लेकिन मिलना भी नहीं चाहती। तो मैं सोच रहा था कि अगर मैं उससे फेसबुक का आई.डी. या स्काइप आई.डी. ले लूं। लेकिन मेरे पास तो इतने पैसे भी नहीं हैं कि नेट केफे में थोड़ा टाइम पास कर लिया करूं और उसके साथ सेटिंग कर सकें।

मैं- हरामी, तुझे मैंने पहले कब मना किया है। वैसे नाम तो बता उस परी चेहरा का, बाकी सारी टेंशन मेरी है। तू फिकेर ना कर मैं करता हूँ कुछ इसका भी तेरे लिए।

काशी- यार, अभी तक नाम तो मुझे भी नहीं पता, बस मैं उसे फूल जी कहकर बुलाता हूँ।

मैं- अच्छा चल ऐसा कर, तू चल मेरे साथ मेरे घर। मैं तुम्हें दो दिन के लिए अपना लैपटाप दे देता हूँ। अगर बात बनती नजर आई तो ठीक है, वरना छोड़ देंगे साली को और देखेंगे।

काशी मेरी बात सुनकर मेरे साथ चल दिया और मैंने उसे अपने घर से अपना लैपटाप दे दिया, तो वो खुश हो । गया और फिर वहाँ से निकल गया। फिर मैं भी वापिस अपने रूम में आ गया। क्योंकी आज मैं जरा जल्दी घर
आ गया था। इसलिए मुझे अपने रूम में जाता देखकर बाजी ने कहा- “सन्नी क्या बात है, आज कालेज नहीं गये तुम? तबीयत तो ठीक है ना?”

जी बाजी, बस सर में दर्द हो रहा था इसीलिए घर वापिस आ गया हूँ..” और इतना बोलते हुये मैं अपने रूम में घुस गया और दरवाजा बंद करके राबिया (वो लड़की जिसे मैंने सेट किया था लेकिन अब वो मेरे साथ काशी की भी रखेल थी) को काल की और उसके काल पिक करते ही मैंने उससे उस लड़की का पूछा जिसका नम्बर उसने काशी को दिया था।

तो उसने कहा- “नहीं यार, मैं नहीं जानती उसे, बस अपनी बहन के सेल पे उसका नम्बर देखा था और काशी की जिद थी कि किसी नई लड़की से मिलवा दें, तो मैंने उसे उस लड़की का नम्बर दे दिया है। क्यों कुछ नहीं बना क्या? और हेहेहे करके हँसने लगी।

मैं राबिया की बात को नजर अंदाज करके अभी उससे उस लड़की का नम्बर माँगने ही वाला था कि मेरे दिल में ख्याल आया कि जब काशी उसके साथ बात शुरू कर ही चुका है तो मुझे अभी पंगा नहीं लेना चाहिए। कहीं काम खराब ही ना हो जाए। तो मैंने राबिया को बाइ बोलकर काल कट की और सोने के लिये लेट गया।

अगली सुबह मैं घर से तैयार होकर नाश्ता करके जल्दी से कालेज की तरफ निकल गया। लेकिन आज भी काशी का नम्बर आफ जा रहा था और वो फिर से कालेज नहीं आया था। तो मुझे थोड़ी परेशानी होने लगी कि आखिर बात क्या है जो काशी अभी तक ना तो कालेज आया है और ना ही उससे मोबाइल पे बात हो रही है? तो मैंने अपनी बाइक कालेज के स्टैंड से निकली और काशी के घर की तरफ चल दिया।

काशी का घर क्योंकी एक बहुत ही लो क्लास कालोनी में था, जहाँ लोग ऐसे ही इधर-उधर दुकानों और अड्डों पे बैठे चाय के कप पे सारा दिन गप्पों में गुजार दिया करते थे। खैर मैं काशी के घर पहुँचा और उसके घर का । दरवाजा नाक करने से पहले मैंने एक बार फिर काशी का नम्बर ट्राई किया। लेकिन नतीजा वोही पावर आफ ही निकला, तो मैं आगे बढ़ा और दरवाजे पे नाक कर दिया।

मैं दरवाजा नाक करके थोड़ा पीछे हटकर खड़ा हो गया कि तभी दरवाजा धीरे से खुला और उसमें से एक लड़की का प्यारा सा चेहरा नजर आया जो कि मेरी तरफ सवालिया नजरों से देख रही थी, लेकिन उसको देखकर लग रहा था कि वो कहीं जाने की तैयारी में थी।

मैंने उस लड़की की तरफ देखते हुये कहा- “जी, वो मुझे काशी से मिलना था दो दिन से कालेज नहीं आया तो मैं पूछने आया था...”

वो लड़की मुझे सर से लेकर पांव तक देखते हुये घर के अंदर की तरफ घूमकर बोली- “भाई, जरा बाहर आओ, तुमसे मिलने आया है कोई...”

मुझे ये सुनकर हल्का सा दुख भी हुआ कि ये काशी की बहन है क्योंकी मैं समझा था कि कोई साथ के घर से आई होगी, तो काशी से बात करूंगा कि इसका नम्बर मुझे ला दे ताकी मैं इस सुंदरी को पटा सकें चुदाई के लिए।

खैर, थोड़ी ही देर में काशी बाहर निकल आया और मुझे देखकर थोड़ा शर्मिंदा सा हो गया और बोला- “यार, तू ये साथ वाले दरवाजा पे आ जा, मैं दरवाजा खोलता हूँ। फिर बैठकर बात करते हैं और इतना बोलकर फिर से घर में गायब हो गया।

तो मैंने फिर से उस लड़की की तरफ देखा जो कि मुझे देखकर हल्का सा पहली बार मुश्कुराई और बोली- “क्या यहाँ खड़े रहेंगे आप?”


मैं- “नऽनहीं तो...” और वहाँ से हटकर साथ वाले दरवाजा पे जाकर खड़ा हो गया कि तभी दरवाजा खुला और काशी का सर बाहर निकला जो कि मुझे देखते हुये मुश्कुरा दिया और बोला- “आ जा यार अंदर ही आ जा...”

मैं उसकी बात सुनकर रूम में घुस गया और अंदर आते ही मैंने काशी को गर्दन से पकड़ लिया और एक मुक्का उसके पेट में मारते हुये बोला- “साले कहाँ गायब है दो दिन से? कहीं अकेला ही तो उस लड़की को चोदने के चक्कर में नहीं है तू...”

(यहाँ मैं आप सबको ये बात बता दूं कि हम दोनों दोस्त सिर्फ़ घर से बाहर ही मिलते थे)
मेरी बात सुनकर काशी ने अपना मुँह बना लिया और बोला- “नहीं यार, मैं इतना मतलबी भी नहीं हूँ जितना कि तू मुझे समझ रहा है और बाकी मैं कालेज इसलिए नहीं आ रहा था कि आज दूसरी रात है कि मेरी नींद पूरी । नहीं हो पा रही, देर रात तक तो उस लड़की से मेरी चैट चलती रहती है।

मैं- चल वो सब तो ठीक है लेकिन तेरा मोबाइल क्यों बंद जा रहा है?

काशी- अरे भाई, मेरे मोबाइल की बैटरी खराब हो गई है जिसकी वजह से मोबाइल आफ पड़ा हुआ है और मेरे पास तो इतने पैसे भी नहीं हैं कि मैं मोबाइल में नई बैटरी ही डाल लूँ ।

मैं- “साले, तू भी ना एक नम्बर का हरामी है। जब देखो पेसों के लिए ही रोता रहता है..." और अपनी पाकेट से 200 निकलकर उसे पकड़ा दिए और बोला- “ये ले साले तेरी बहन की चोदूं, बैटरी डलवा लेना अब। और अब ये बता कि क्या बना? बात कहाँ तक पहुँची है तुम्हारी उस लड़की के साथ और नाम क्या है उसका?”

काशी- “यार सन्नी, यहाँ पे थोड़ा मसला हो रहा है। उसने ना तो अभी तक अपना नाम बताया है और ना ही अपनी पिक दी है। उसने फोटो के साथ बाकी चेहरे की जगह को खराब करके अपनी बाड़ी की पिक दिखाई है। मुझे, जितना भी दिखा मुझे कमाल की लगी है...”

मैं- वो तो ठीक है यार, लेकिन फिर भी बोलती क्या है? चाहती क्या है? कुछ तो बताया होगा ना उसने?

काशी- “हाँ, ना यार सब बताया है। उसने कहा है कि वो मुझसे मिलने और सेक्स करने के लिए तैयार है। लेकिन बात वहीं आकर रुक जाती है कि वो ना तो किसी होटेल में मिलना चाहती है और ना किसी और जगह, बाहर वो कहीं मिलना नहीं चाहती और मैं उसे घर में ला नहीं सकता। बाकी उसने कहा है कि जब मिलने का प्रोग्राम बना तो वो अपना नाम भी बताएगी और अपने आपको भी दिखाएगी उससे पहले नहीं...” ।

मैं कुछ देर तक सोचता रहा और फिर काशी की तरफ देखते हुये बोला- “अच्छा ये बता कि तूने उससे ये पूछा है। कि उसने पहले भी कभी किया है किसी और के साथ या अभी नहीं?”

काशी- “यार, वो तो अपने आपको अभी तक कुँवारी ही कह रही है। बाकी उसने ये भी बताया है कि उसके पास एक लकड़ी का टुकड़ा है जो 3 इंच से थोड़ा ही बड़ा होगा और ज्यादा मोटा भी नहीं, उसको अपनी फुद्दी में । लेती है, जब गर्मी बर्दाश्त से ज्यादा हो जाए तो। बाकी असल में उसने कभी कोई लण्ड नहीं लिया अपनी फुद्दी में...”

मैं- “अच्छा, जरा मुझे फोटो तो दिखा जो उसने तुम्हें भेजी हैं। उसके बाद जगह का भी जुगाड़ लगाता हूँ तेरे लिए। साले, लेकिन ध्यान से बेटा वहाँ कैमरा भी लगा लेना ताकी बाद में उस मूवी को दिखाकर मैं भी उसकी फुद्दी में अपना लण्ड घुसाकर मजे कर सकू..”

काशी- “तू बैठ यहाँ, मैं लैपटाप लाता हूँ उसी में हैं सारी फोटो...” और मुझे छोड़कर घर में चला गया लैपटाप लाने के लिए।

काशी थोड़ी देर के बाद वापिस आया और लैपटाप को ओन करके उसमें उस लड़की की फोटो मुझे दिखाने लगा जिन्हें देखकर ही मेरा लण्ड पैंट में मचलने लगा। फोटो देखकर मैंने कहा- “यार काशी, जल्दी कुछ कर यार...

अगर ये रियल में उसकी अपनी फोटो है, तो जरा सोच कि कितना मजा देगी ये साली गश्ती की बच्ची..." और पैंट के ऊपर से अपने लण्ड को दबाने लगा।

काशी- “यार, वो खुद बड़ी बेचैन है चुदवाने के लिए, बस जगह नहीं है अगर तू जगह का इंतजाम कर दे तो मैं कल का ही पक्का करता हूँ उसके साथ और परसों वो तेरे नीचे होगी...”

मैं- “ठीक है, रुक मैं अभी कुछ करता हूँ...” और इतना बोलकर मैंने अपना मोबाइल निकाला और अपने एक । दोस्त को काल की जो कि हमारी ही कालोनी में रहता था और उससे जगह के लिए पूछा। तो पहले तो वो खुद
भी चुदाई में शामिल होने के लिए बोल रहा था। लेकिन मैंने उसे ये बोल दिया कि यार मैं उससे प्यार करता हूँ। रियल वाला और शादी भी करूंगा तो उसी से। सो प्लीज़ ऐसी बात दोबारा नहीं करना।

तो वो हँसता हुआ बोला- “चल ठीक है, मैं कल चला जाऊँगा रूम से, तो ले आना हमारी भाभी को...”

तो मैंने कहा- “यार मुझे रूम कल सुबह ही चाहिए होगा...”

तो उसने हाँ में जवाब दिया और काल कट कर दी।

रूम का जुगाड़ होते ही मैंने काशी से कहा- “तू अभी उससे पक्का कर ले। ये ना हो कि रूम में जाकर खुद ही अपने हाथों से मूठ लगाना पड़े...”

तो काशी हँसता हुआ बोला- “अरे नहीं यार, कुछ नहीं होता। मैं बात कर लूंगा उससे, तू टेंशन ना ले...”

तो मैंने काशी से हाथ मिलाया और खड़ा हो गया और बोला- “तो ठीक है मैं चलता हूँ। शाम को काल करके कैमरा ले जाना मुझसे...” और उसके घर से निकला और बाइक पे बैठकर ऐसे ही कुछ देर आवारागर्दी करने के बाद कालेज टाइम खतम हुआ तो मैं घर चला गया।

घर का गेट खुला हुआ ही था तो मैं सीधा अपनी बाइक को अंदर ले गया और बाइक को स्टैंड करके जब मैं घर में इन हुआ तो देखा कि हमारे घर के साथ वाले घर में जो अंकल रहते थे, सलीम साहब वो हाल में बैठे हुये थे और अम्मी भी उनके पास बैठी बातें कर रही थीं। तो मैंने उन दोनों को सलाम किया और अपने रूम की तरफ चल दिया।

तो मुझे रूम के बाहर फरी बाजी सफाई करती नजर आई और इससे पहले कि मैं बाजी को नजर अंदाज करता हुआ रूम में जाता, मेरी नजर बिल्कुल अचानक अपनी फरी बाजी की गाण्ड पे पड़ी जो कि बिल्कुल उसी लड़की की तरह हिलती और सेक्सी थी, क्योंकी बाजी सफाई करते हुये पीछे से अपनी कमीज को समेटकर बैठी हुई थी जिसकी वजह से उनकी गाण्ड साफ-साफ नजर आ रही थी।

बाजी की गाण्ड को देखकर मेरा लण्ड खड़ा होने ही लगा था कि मुझे अपने आप में बहुत ज्यादा शरम आने । लगी, और मैं अपने आप पे लानत मलामत करता हुआ बाजी से नजर हटाकर बिना बाजी से सलमा किए अपने रूम में घुस गया और सीधा बाथरूम में जाकर नहाकर फ्रेश हुआ। फिर शाम के 4:00 बजे तक मैंने सोकर वक़्त गुजारा।

फिर उसके बाद काशी की काल आ गई जो कैमरे के लिए बोल रहा था। तो मैंने कहा चल ठीक है तू पार्क में बैठ मैं लाता हूँ अभी चेक करके, और काल कट कर दी।

उसके बाद मैंने कैमरा निकाला और उसे चेक करके घर से निकला और नजदीक के पार्क में चला गया जहाँ काशी मेरा इंतजार कर रहा था। मैंने कैमरा काशी को पकड़ा दिया और बोला- “हाँ तो फिर कन्फर्म हो गया है। कल का या अभी नहीं?”

तो काशी हँसते हुये बोला- “यार, वो तैयार है। कल आ जाएगी 9:00 बजे तक..”

तो मैंने कहा- “ठीक है फिर मैं सुबह 7:00 बजे चाभी ले लूंगा अपने दोस्त से उसके रूम की, और तुम्हें दे दूंगा। फिर तुम भी 8:00 बजे तक वहाँ चले जाना और किसी अच्छी जगह पे कैमरा रख देना, ताकी हर चीज तो साफ नजर आए लेकिन कैमरा नजर नहीं आना चाहिये...”

काशी ने हाँ में सर हिलाया और उसके बाद मेरे साथ हाथ मिलाकर निकल गया। तो मैं भी यूँ ही इधर-उधर आवारा फिरने के बाद 8:00 बजे घर आ गया और खाना खाकर सो गया क्योंकी सुबह मुझे जल्दी उठना था।

अगली सुबह मेरी आँख अलार्म की बेल से खुली तो मैंने उठते ही सबसे पहले अपने दोस्त को काल की, जिससे मैंने रूम की बात की थी।

काल पिक करते ही मैंने उससे कहा- “हाँ यार, मैं आ रहा हूँ अभी तुमसे रूम की चाबी लेने के लिए। तुम तब तक तैयार हो जाओ निकलने के लिए..”

मेरे दोस्त ने मेरी बात के जवाब में हँसते हुये कहा- “यार, मैं तो अब तैयार हो भी चुका हूँ और नाश्ता करके निकलने वाला हूँ। तुम आ जाओ मैं तुम्हारा इंतेजार कर रहा हूँ..”

मैंने अपने दोस्त से बात खतम की और उठकर हाथ मुँह धोया और बाइक निकालकर अपने दोस्त के रूम की तरफ चल दिया, जो कि करीब ही था ज्यादा दूर नहीं था। और उसकी सबसे खास बात ये थी कि उस गली में ज्यादा लोग आते जाते नहीं थे, ज्यादातर सूनसान ही रहती थी।

मैं जैसे ही वहाँ पहुँचा तो मेरा दोस्त मुझे चाभी पकड़ाते हुये बोला- “अच्छा यार, मैं चलता हूँ अब। लेकिन यहाँ ज्यादा गंदगी नहीं फैलाना समझे..." और मेरे कंधे पे हाथ मारता हुआ रूम से निकल गया।

उसके जाने के बाद मैं रूम को अच्छी तरह चेक किया कि कहीं उसने यहाँ कोई कैमरा तो नहीं छुपा रखा।

लेकिन मुझे ऐसी कोई चीज नहीं मिली तो मैंने काशी को काल की और उसे पता बताकर आने को बोला। तो वो 7:45 बजे तक मेरे पास पहुँच गया और मैंने सब कुछ उसके हवाले किया और फटाफट घर को भागा और नहाकर बिना नाश्ता किए में 8:15 पे घर से निकल गया।

मैं वहाँ से कालेज के लिए नहीं गया लेकिन वहाँ उस मकान के करीब ही जहाँ काशी उस लड़की से मिलने वाला था चक्कर लगाता रहा अपनी बाइक पे, और काशी से भी पूछता रहा कि कब आ रही है? आ गई है या अभी नहीं? और आखिर 9:30 बजे काशी ने बताया कि वो बस अभी 5 मिनट तक आने वाली है, उसके आने का सुनकर मेरे दिल की धड़कन भी थोड़ी तेज हो गई और मैं थोड़ा फासले पे खड़ा होकर उसके आने का इंतेजार करने लगा, क्योंकी मैं उस लड़की का चेहरा देखना चाहता था।

खैर, कोई 10 मिनट ही गुजरे होंगे कि जहाँ मैं खड़ा हुआ था, उसके दूसरी तरफ से एक लड़की को नकाब किए और इधर उधर देखते हुये उसी मकान की तरफ जाते देखा जहाँ कि काशी मौजूद था।

वो लड़की जैसे ही मकान के करीब पहुँची तो पहले से हाथ में पकड़े मोबाइल से काल की कि तभी काशी ने मकान का दरवाजा खोला और उसकी तरफ देखकर सर से इशारा किया। तो वो लड़की तेजी से मकान में चली गई। तभी काशी ने इधर-उधर देखा और जैसे ही उसकी नजर मुझे पे पड़ी तो हल्का सा मुश्कुराकर दरवाजा बंद करके अंदर चला गया।

(मैं क्योंकी काफी फासले पे खड़ा हुआ था ताकी उस लड़की की मुझ पे नजर ना पड़ सके, लेकिन क्योंकी काशी को पहले से ही पता था कि मैं कहाँ खड़ा होऊँगा इसीलिए उसने सीधा मेरी तरफ ही देखा था)

उन दोनों के अंदर जाते ही मैं भी वहाँ से निकला और घर आ गया, तो देखा कि अम्मी बाहर हाल में ही बैठी टीवी देख रही हैं। तो भी उनके पास ही जा बैठा और अम्मी से फरी बाजी का पूछा।
तो उन्होंने कहा- “वो जरा अपनी दोस्त से मिलने गई है 12:00 बजे तक आ जयेगी। लेकिन तुम क्यों पूछ रहे। हो कुछ काम था क्या?”

वो अम्मी भूख लग रही है कुछ खाने क लिए बोलना था बाजी से और तो कोई खास काम नहीं था।

तो अम्मी ने कहा- “तुम बैठो, मैं ला देती हूँ..” और उठकर किचेन में चली गईं।

नाश्ता करने के बाद मैं अपने रूम में चला गया और बेड पे लेट गया और काशी के बारे में सोचने लगा कि साला किस तरह मजे ले रहा होगा नई फुद्दी का, और इन सोचों ने मेरा लण्ड भी खड़ा कर दिया तो मैंने बाथरूम में जाकर मूठ लगाई और वापिस आकर बेड पे लेट गया और ऐसे ही ख्यालों में खोया रहा।

और टाइम कब गुजरा पता ही नहीं चला। पता तब चला जब काशी की काल आई। तो मैंने जल्दी से काल पिक की तो काशी ने कहा- “भाई, पार्क में आ जाओ मैं वहीं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ..” ।

तो मैं झटके से उठा और घर से निकलकर करीबी पार्क में चला गया जहाँ काशी बैठा मेरा इंतेजार कर रहा था। मैं जैसे ही काशी के पास गया तो देखा कि उसका चेहरा खुशी से लाल हो रहा था।

तो मैंने कहा- “क्यों बे साले, बड़ा खुश दिख रहा है..."

तो काशी ने हँसते हुये कहा- “यार, क्या बताऊँ क्या मस्त चीज है और ऊपर से सच्ची में कुँवारी भी थी। लेकिन मजा बहुत करवाया साली ने..."

मैंने काशी की खुशी को नजर अंदाज किया और बोला- “साले ला कैमरा मुझे दे और जाकर घर पहले नहा धोकर साफ तो हो, या ऐसे ही गान्डू बना फिरेगा...”

तो काशी ने हँसते हुये मुझे कैमरा दिया और बोला- “ये ले यार, सब रेकाई हो गया है इसमें, देख लेना। मैं चलता हूँ अब...” काशी मुझे कैमरा पकड़ाते ही पार्क से बाहर को चल दिया।

मैं भी उसके पीछे ही बाहर निकला पार्क से और घर आ गया और सीधा रूम में जाकर कैमरा को शुरू से प्ले किया तो थोड़ी देर तक तो उसमें सिर्फ काशी ही नजर आता रहा। लेकिन उसके बाद काशी ने दरवाजा खोला और वो लड़की अंदर आ गई।

लड़की रूम में आकर बेड के करीब खड़ी हो गई और फिर काशी भी दरवाजे को लाक करके उसके पास आकर खड़ा हो गया और उससे कुछ बात करने लगा, तो वो लड़की काशी की बात सुनकर बेड पे बैठ गई। वो बैठ गई तो काशी भी उसके पास बैठ गया और उससे बातें करने लगा और... और साथ ही उसे अपना नकाब हटाने के लिए अपने हाथ से भी फोर्स करने लगा।

तो उस लड़की ने थोड़ा शरमाते हुये अपना नकाब हटा दिया और नकाब हटते ही जो चेहरा मुझे नजर आया, उसको देखकर तो जैसे मेरी अपनी ही गाण्ड फटी की फटी रह गई.. क्योंकी वो कोई और नहीं मेरी बड़ी बहन फरी ही थी।

फरी को काशी के साथ देखना मेरे लिए नाकाबिल-ए-यकीन मंजर था लेकिन ये एक हकीकत थी जो कि अब मेरे सामने थी। मैंने वीडियो बंद की और फौरन काशी को काल मिलाई।

तो उसने काल पिक करते ही कहा- “क्यों यार, अब क्या हुआ? अभी तो मैं घर पहुँचा ही हूँ कि तूने फिर से काल कर दी है कुछ काम था क्या?”

मैं- “हाँ यार, थोड़ा काम ही है। तू ऐसा कर कि मेरा वाला लैपटाप लेकर आ जा जल्दी से। मैं तुम्हें पार्क में ही मिलूंगा.”

काशी- “यार, सब ठीक तो है ना? तू इतना गम्भीर क्यों हो रहा है?”

मैं अब इस गान्डू को क्या बताता कि मेरी बहन को मेरी ही मदद से चोदकर साला पूछ रहा है कि मैं इतना गम्भीर क्यों हो रहा हूँ। मैंने कहा- “नहीं यार, बस थोड़ी गप-शप करनी थी इसलिए बुलाया है...”

काशी- “चल ठीक है, मैं अभी थोड़ी देर में नहाकर निकलता हूँ घर से...” और काल कट कर दी।

काशी से बात करने क बाद मैंने फिर से वीडियो चलाई और देखने लगा, जहाँ से पाज की थी। तो अब काशी । बाजी की चूचियों को कमीज ऊपर से ही पकड़कर दबा रहा था और सहला रहा था, जिसमें बाजी कोई भी ऐतराज नहीं कर रही थीं, बल्की पूरा मजा ले रही थीं। मैंने मूवी को थोड़ा आगे किया जहाँ काशी बाजी के कपड़े उतारने के बाद बाजी को बेड पे बिठा चुका था और बाजी सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में बेड पे बैठी हुई थी।

लेकिन बाजी का चेहरा उस वक़्त कैमरे की तरफ नहीं था, बाजी की बैक क्योंकी कैमरे की तरफ थी और उनकी नंगी कमर और पैंटी में कैद गाण्ड देखकर मेरा लण्ड भी खड़ा होने लगा था। और जहाँ मुझे थोड़ी देर पहले तक गुस्सा आ रहा था काशी में अपने आप में और अपनी बड़ी बहन फरिहा पे, अब बाजी को इस हालत में देखकर कहीं हल्का सा मजा भी आ रहा था।