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अब मैंने देखा कि काशी ने भी अपने कपड़े उतार दिए थे जो कि बाजी कि पीछे खड़ा हुआ था और बेड पे बाजी के पीछे जाकर बैठ गया और अपने दोनों हाथों से पीछे से ही फरिहा बाजी को कस लिया और उसकी गर्दन पे। किस करने लगा।

बाजी काशी की किसी भी हरकत से उसे मना नहीं कर रही थी। थोड़ी देर तक ऐसे ही चलता रहा। फिर काशी ने बाजी को अपनी तरफ घुमाया और साथ ही बाजी के होंठों से अपने होंठ लगा दिए और किस करने लगा। तो बाजी भी अपना एक हाथ उसके सर के पीछे रखते हुये किस करने लगी। बाजी को किस करने के साथ ही काशी ने अपना हाथ मेरी बहन की चूचियों पे रख दिया और उन्हें धीरे-धीरे अपने हाथ से दबाने और मसलने लगा, जिससे बाजी और भी गरम होती दिखने लगी।

थोड़ी देर तक सब ऐसे ही चलता रहा और फिर काशी का हाथ जो कि बाजी के पीछे कमर पे था, उस हाथ से ही काशी ने बाजी की ब्रा का हुक कब खोल दिया। पता ही नहीं चला और अचानक काशी का वो हाथ जो बाजी की ब्रा के ऊपर से ही बाजी की चूचियों को दबा रहा था, थोड़ा नीचे हुआ और साथ ही उसने बाजी की ब्रा को हटा दिया, जिससे मेरी नजरों के सामने मेरी ही बहन की चूचियां नंगी हो गईं, जो कि मेरी ही वजह से मेरे दोस्त के हाथों ही मेरी बहन अपनी इज़्ज़त लुट रही थी।

चूचियों को नंगा देखकर जहाँ मेरा लण्ड मेरा ट्राउजर फाड़कर बाहर आने को बेचैन हो रहा था। वहीं मैं उस वक़्त ये भी भूल चुका था कि अभी कुछ देर पहले मैं अपने आप में और अपने दोस्त पे कितना गुस्सा कर रहा था। अब मेरा पूरा ध्यान अपनी बड़ी बहन की नंगे चूचियों पे था, जिनसे मेरा दोस्त अपने हाथों से खेल रहा था। फिर उसने बाजी को नीचे लिटा दिया बेड पे और खुद बैठा-बैठा ही फरी बाजी की चूचियों पे झुक गया और बाजी की चूचियों को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और हाथ से भी बाजी की चूचियों को दबाने और सहलाने लगा। और फिर धीरे-धीरे बाजी के पेट की तरफ बढ़ा और बाजी के पेट पे अपनी जुबान घुमाता और नीचे की तरफ जाने लगा।

और फिर अपना सर उठा लिया और बाजी की तरफ देखा जो कि काशी के इस तरह उठ बैठने से अपनी आँखें खोलकर उसकी तरफ ही देख रही थी। तो काशी ने बाजी की तरफ से नजर हटाकर अब अपना हाथ बाजी की पैंटी की तरफ बढ़ाया और धीरे से बाजी की पैंटी नीचे खिसकाने लगा और आखिरकार बाजी की पैंटी उतारकर वो उठा और बाजी की दोनों रानों को खोलते हुये रानों के बीच में आकर बैठ गया।


उस वक़्त मेरी नजर बाजी की बिना बालों की चूत में पड़ी तो मेरे मुँह से हल्की सी सिसकी निकल गई और हाथ से मैंने अपना लण्ड भींच लिया। (हालांकि मुझे कैमरे में ये सब पूरी तरह साफ-साफ नजर नहीं आ रहा था, लेकिन जितना भी नजर आ रहा था वो भी मेरे होश उड़ाने के लिए काफी था)

खैर अब काशी थोड़ा आगे हुआ और अपने लण्ड पे अच्छी तरह थूक लगाकर बाजी की चूत पे रगड़ने लगा जो कि 54 साइज का ही था और इतना मोटा भी नहीं था तो काशी के इस तरह करने से बाजी जो कि काशी की तरफ ही देख रही थी अपनी आँखों को बंद करके लेट गई और अपने हाथों से बेड की चादर को पकड़कर सिसकने लगी (जिसकी आवाज तो मुझे सुनाई नहीं दे रही थी) अब काशी ने थोड़ा थूक और भी अपने लण्ड और फरी बाजी की चूत पे लगा दिया और बाजी पे झुक गया। फिर मेरी बहन के कंधों पे अपने हाथ जमाकर हल्का सा झटका लगाया, जिससे बाजी का मुँह पूरी तरह एक बार खुला और फिर बंद हो गया।

लेकिन क्योंकी अब मुझे सिर्फ़ वो दोनों ही नजर आ रहे थे और बाजी की फुद्दी और काशी का लण्ड जो कि बाजी की फुद्दी में घुस रहा था उस वक़्त नजर नहीं आ रहा था, जिससे मैं सिर्फ अंदाजा ही लगा सकता था। 

काशी बाजी के ऊपर लेटा धीरे-धीरे हिलता रहा और कुछ देर तक बाजी काशी के सीने पे अपने हाथ रखे उसे धकेलने की कोशिश करती रही। लेकिन फिर आराम से लेट गई और अपनी आँखें भी बंद कर लीं लेकिन काशी। वैसे ही मेरी बहन क ऊपर लेटा हिलता रहा तो कुछ देर के बाद मेरी बहन भी नीचे से हिलने और काशी का पूरा साथ देने लगी जिससे मैं समझ गया कि बाजी को जो दर्द होना था वो हो चुका और अब वो अपनी पहली चुदाई का पूरा मजा ले रही थी।

कोई 15 मिनट की लगातार चुदाई के बाद काशी ने झटके से अपने आप को पीछे हटाया और अपने लण्ड को अपने हाथ में पकड़कर हिलाने लगा और 4-5 बार हिलने से ही उसके लण्ड ने पानी छोड़ दिया, जो कि मेरी बहन के ऊपर ही गिरा था।

जिसके बाद काशी उठा और साइड से एक कपड़ा उठाकर मेरी बहन की तरफ बढ़ा दिया जिसे मेरी बहन ने पकड़ लिया और अपने आपको और अपनी फुद्दी को साफ करने लगी। दोनों ने अपने आप को जितना हो सकता था। साफ किया और उसके बाद कपड़े पहन लिए और फिर बैठकर थोड़ी देर बातें करते रहे और उसके बाद बाजी उठी
और काशी को किस करने के बाद नकाब किया और उस रूम से निकल गई।

तो मेरी बहन के जाते ही काशी ने अपना चेहरा कैमरे की तरफ किया और हँसने लगा। जिसकी हँसी ने मेरा। सारा मजा जो अभी मूवी देखकर आ रहा था, खराब हो गया और मुझे फिर से गुस्सा आने लगा अपने आप पे।
मैं और काशी अक्सर मिला करते थे, अगर कोई काम होता तो घर से बाहर बुला लिया करते थे। अभी मैं मूवी देखने के बाद अपने आप पे और काशी में गुस्सा ही कर रहा था कि मेरे मोबाइल की बेल होने लगी। देखा तो काशी ही की काल थी।

मैंने काल पिक की तो काशी ने कहा- “यार कहाँ है तू? मैं यहाँ पार्क में आ गया हूँ...”

मैं- “तू बैठ, मैं आ रहा हूँ, 10 मिनट में..." और इतना बोलते ही काल कट कर दी और उठकर पार्क की तरफ चल दिया। लेकिन जाते हुये कैमरा छुपा गया था कि किसी की नजर ना पड़ जाए इस पे।

मैं जैसे ही पार्क में दाखिल हुआ सामने बेंच पे बैठे काशी पे मेरी नजर पड़ गई, जो कि उस वक्त बड़ा ही खुश लग रहा था। मैं उसकी तरफ चल दिया तो काशी ने भी मुझे देख लिया और उठकर खड़ा हो गया और जैसे ही मैं उसके पास पहुँचा।

मैं जैसे ही पार्क में दाखिल हुआ सामने बेंच पे बैठे काशी पे मेरी नजर पड़ गई, जो कि उस वक्त बड़ा ही खुश लग रहा था। मैं उसकी तरफ चल दिया तो काशी ने भी मुझे देख लिया और उठकर खड़ा हो गया और जैसे ही मैं उसके पास पहुँचा।

काशी ने कहा- “क्या बात है यार, ऐसा क्या काम पड़ गया तुम्हें जो मुझे इस तरह बुलाया है तुमने?”

मैंने काशी का बाजू पकड़ा और इधर-उधर देखकर एक साइड पे चल दिया जहाँ कोई भी नहीं था।

काशी ने कहा- “यार, कुछ बोलेगा भी क्या बात है या मुझे ही घसीटेगा यहाँ पे?”

मैंने कहा- “थोड़ा सबर कर, अभी बताता हूँ तुझे सब कुछ..” और पार्क के एक कोने में पड़े बेंच पे काशी को अपने साथ लेकर बैठ गया और काशी की तरफ देखते हुये बोला- “अब देख काशी, जो में पूछूगा तुम्हें सच-सच बताना है मुझे, वरना बात बिगड़ जाएगी...”

काशी- “यार, तू पूछ जो भी पूछना है। मैं भला तेरे साथ आखिर झूठ क्यों बोलने लगा और आखिर बात क्या है?”

मैं- “काशी, मुझे पता चला है कि तू उस लड़की को पहले से ही जानता था, यहाँ तक कि तुम्हें उसका नाम भी पता था और मुझे बताने से पहले तुम लोग मिलते भी रहे हो...”

काशी हैरानी से मेरी तरफ देखकर बोला- “ये तू क्या बोल रहा है और तुझे आखिर ऐसा किसने बता दिया कि मैं फरी को पहले से ही जानता था और मिला भी हूँ? ये झूठ है मेरे यार...” काशी की आवाज से पता चल रहा था। कि वो सच बोल रहा है।

मैं- बस बता दिया किसी ने।

काशी- “नहीं सन्नी, ऐसा नहीं चलेगा। तुझे बताना ही होगा कि किस गान्डू ने हमारे बीच गलतफहमी पैदा करने की कोशिश की है...”

मैं- “बता दूंगा तुम्हें भी। लेकिन काशी तुझे उस लड़की के साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था..”

काशी हैरानी से मेरी तरफ देखते हुये बोला- “क्यों यार, आखिर ऐसी क्या बात हो गई? कौन थी वो लड़की? क्या तेरी कोई रिश्तेदार तो नहीं थी?”

मैं- “नहीं यार, जिस तरह तू मेरा दोस्त है वो फरी भी मेरे एक बहुत अच्छे दोस्त की बहन है। इसलिए बोल रहा हूँ कि ये अच्छा नहीं हुआ...” (अब मैं उसे कैसे बता देता कि वो किसी और की नहीं मेरी अपनी ही बड़ी बहन । थी, जिसकी चुदाई काशी ने की थी मेरी ही मदद से)

काशी एक आहह की आवाज निकलता हुआ बोला- “छोड़ यार, उसने भी तो किसी ना किसी से चुदवाना ही था। ये तो अच्छा हुआ कि हमने चोद लिया..." और हाहाहाहा करके हँसने लगा।

मुझे उस वक़्त काशी पे बड़ा गुस्सा आया और मैंने जलकर कहा- “काशी अगर मैं भी इसी तरह तेरी ही बहन को चोदूं जिस तरह तू ने फरी को चोदा है तो क्या तेरा दोस्ती से एतबार नहीं खतम हो जाएगा?”

काशी हैरानी से कुछ देर मेरी तरफ देखता रहा और फिर बोला- “यार सन्नी, मुझे नहीं समझ आ रही कि आखिर तू इतना गुस्सा क्यों हो रहा है? बाकी अगर तू या मेरा कोई और दोस्त अगर मेरी बहन के साथ उसकी मर्जी और रजामंदी से चोदेगा तो मैं भला क्यों ऐतराज करूंगा? ये तो अच्छा है ना कि इस तरह वो मेरा दोस्त होने के नाते मेरी बहन को बदनाम नहीं करेगा। और वैसे यार सन्नी, मैं तुम्हें इतना छोटे जेहन का नहीं समझता था..."

मैं हैरानी से काशी की बातें सुनता रहा और उसके खामोश होते ही बोला- "काशी, मैं हैरान हूँ कि तुम्हें इस बात की जरा भी परवाह नहीं होगी कि कोई तुम्हारी बहन की फुद्दी मारता रहे...”

काशी- “मुझे कोई ऐतराज तब होगा, जब कोई मेरी बहन की मर्जी के बिना उसके साथ बदतमीजी करेगा। बाकी अगर कहीं मेरी बहन को मेरी मदद की जरूरत हुई तो मैं उसकी मदद भी करूंगा...”

मैं- नहीं यार, मैं नहीं मान सकता तेरी ये बात कि तू इतना आगे भी जा सकता है। यार यहाँ हमारे मुल्क में तो भाई बहनों को किसी गैर मर्द के साथ बात करता भी देख ले तो कत्ल कर डालते हैं और तू है कि मुझे बोल रहा है कि तुम्हें कोई मसला नहीं है इससे..."

काशी मेरी हालत पे मुश्कुराता हुआ बोला- “देख यार, मैं तो ऐसे भी भाई बहनों को जानता हूँ, जो कि खुद ही। आपस में चुदाई करते हैं और पूरा मजा उठाते हैं। मैं तो कुछ भी नहीं हूँ और अगर मैं अपनी बहन को उसकी मर्जी की लाइफ गुजारने का मोका देना चाहता हूँ या दे दें तो इसमें इतना हैरान होने वाली कौन सी बात है मेरी जान?"

काशी की बातें सुनकर मेरी फटी की फटी रह गई और मुझसे कुछ भी बोला नहीं गया।

तो मुझे खामोश देखकर काशी ने कहा- “देख यार, परेशान ना हो ज्यादा कि वो तेरे दोस्त की बहन है, बस मजे कर। वो अपने भाई को नहीं बताएगी, ये मुझे यकीन है। और अगर तू उसे कुत्तों से भी चुदवाना चाहेगा तो वो खुशी से मान जाएगी, क्योंकी साली की फुद्दी में कितनी आग है ये मैं देख चुका हूँ। अब छोड़ इन बातों को और ये बता कि क्या इरादा है तेरा? कुछ करना है या फिर मैं अकेला ही मजे मारा करूं उसके साथ?”

मैं उठकर खड़ा हो गया और बोला- “मैं तुम्हें शाम तक बताऊँगा कि क्या करना है और क्या नहीं?” और काशी की बात सुने बिना ही घर की तरफ चल दिया।

मैं काशी के पास वापिस घर आया तो घर में दाखिल होते ही मेरी नजर सामने खड़ी बाजी फरिहा पे पड़ी तो मेरी आँखों के सामने वो सारा मूवी वाला मंजर घूम गया और इन ख्यालों से फौरन मेरा लण्ड खड़ा होने लगा, तो मैं अपने रूम की तरफ चल दिया।

और अभी मैं रूम के दरवाजा पे ही पहुँचा था कि बाजी ने पीछे से आवाज दी और बोली- “भाई, कहां आवारागर्दी करते रहते हो आजकल? और तुमने अभी तक दोपहर का खाना भी नहीं खाया है...”

मैंने बाजी की तरफ देखा गर्दन घुमाकर और बोला- “नहीं, मुझे भूख नहीं थी इसलिए नहीं खाया...” और फिर से। रूम में जा घुसा और दरवाजे को लाक करके बेड पे आ लेटा और सोच में पड़ गया कि आखिर ये हुआ क्या और कैसे? क्योंकी ये एक ऐसा काम था कि जिसकी मुझे जरा भी उम्मीद नहीं थी और बाजी फरिहा जो कि दिखने में ही बड़ी मासूम लगती हैं, उनका ये जो रूप मेरे सामने आया था वो मेरे लिए शाकिंग तो था ही। लेकिन वहीं एक अजीब सा मजा और खुशी भी दे रहा था।

मैं इन सोचों के बीच कब अपने फुल हाई लण्ड को सहलाने लगा, पता ही नहीं चला और जब मेरा ध्यान अपनी इस हरकत की तरफ गया तो मुझे काफी हैरानी भी हुई कि आखिर मेरे साथ ये सब क्या हो रहा है? मैं अपनी ही बड़ी बहन के नंगे जिश्म को ख्यालों में देखकर ही अपने लण्ड को सहला रहा था।

मतलब मेरा लण्ड अपनी ही बहन पे गरम हो चुका था और मैं खुद अपना लण्ड बाजी के नंगे जिम की कल्पना से ही सहला रहा था।

तभी मुझे काशी की बात याद आई कि अगर उसे अपनी बहन के बारे में इस तरह की बात पता चलती कि वो उसके किसी दोस्त से चुदवाती है तो वो उन्हें पूरा सपोर्ट करता और जैसे ही ये बात याद आई तो मुझे पता नहीं क्या हुआ कि मैंने अपना ट्राउजर खोलकर लण्ड को बाहर निकाला और मूठ मारने लगा। मैं उस वक्त पूरी तरह कामुक हो रहा था, जिसकी वजह से जल्दी ही मेरे 72" लंबे और 2” मोटे लण्ड ने पानी निकाल दिया। और जब मुझे थोड़ा होश आया तो मैं अपने लण्ड से निकलने वाली मानी देखकर हैरान रह गया। क्योंकी मेरे सामने बेड का अच्छा खासा भाग मेरी गाढ़ी मानी से गीला हो गया था।

मैं जल्दी से उठा और अपने बेड की चादर निकाली और बाथरूम में चला गया, जहाँ मैंने चादर को शावर के नीचे रखकर पानी खोल दिया और अच्छी तरह भिगोकर वहीं छोड़ा और रूम में वापिस आ गया और बिना बेडशीट के ही बेड पे लेट गया और आज हुई घटना के बारे में सोचने लगा कि मुझे अब क्या करना चाहिए? और सोचतेसोचते आखिरकार मैंने एक फैसला कर ही लिया और लैपटाप उठाकर घर से निकला और काशी को काल मिलाई कि मैं उसकी तरफ आ रहा हूँ और रात उसके पास ही रुकुंगा।

तो काशी ने कहा- क्या बात है भाई, सब ठीक तो है ना?

मैंने कहा- “यार, सब ठीक है। तेरे पास रहूंगा, रात में कुछ प्लान करना है मुझे तेरे साथ...” और इतना बोलकर काल कट कर दी और बाइक पे बैठकर काशी के घर की तरफ चल दिया।

मैं काशी के घर पे पहुँचकर नाक किया। तो काशी ने दूसरी तरफ बैठक का दरवाजा खोलकर बाहर झाँका और मुझे देखकर बोला- “यार इधर ही आ जा तू...”

मैं अंदर दाखिल हो गया तो काशी ने मेरे हाथ से बाइक की चाबी माँगी और बोला- “मैं बाइक को अंदर घर में खड़ा कर देता हूँ, क्योंकी तू रात भर यहाँ रहेगा तो बाइक को अंदर खड़ा कर दें..”

मैंने उसे बाइक की चाबी दे दी तो वो बाहर निकल गया और कुछ देर बाद घर के अंदर वाले दरवाजे से बैठक में आ गया और बोला- “यार मैंने नीलू को चाय के लिए बोल दिया है। अभी जब वो चाय देकर जाएगी तब बात। करेंगे...”

तो मैंने भी हाँ में सर हिला दिया और सोच में गुम हो गया। मैं काशी के सामने बैठा सोच में गुम था कि आखिर मैं बात करूं भी तो किस तरह करूं क्योंकी मैं नहीं चाहता था कि जब काशी को पता चले कि फरी कोई और नहीं मेरी बड़ी बहन है तो वो मेरा मजाक उड़ाए। क्योंकी किसी ना किसी दिन तो ये बात काशी को पता चलनी ही थी। आखिर मैं कब तक छुपा सकता था उससे?

तभी काशी ने कहा- “अबे उल्लू की पूंच्छ कहाँ गुम है?”

मैं अपनी सोचों में काफी गुम था और काशी के इस तरह बुलाने से चौंक गया और जब काशी की तरफ देखा जो मुझे ही घूरे जा रहा था तो मैंने कहा- “क्या हुआ मुझे घूर क्यों रहा है?"

काशी ने कहा- “यार, मुझे भी तो बता आखिर मसला क्या है? तू इतना ज्यादा परेशान क्यों हो रहा है?”

तो मैंने कहा- “बताऊँगा यार, लेकिन वादा कर कि तू किसी से ये बात बोलेगा नहीं, और मेरा राज अपने सीने में छुपाकर रखेगा, चाहे जो भी हो जाए। वादा कर मेरे साथ..”

काशी ने कहा- “देख यार सन्नी, हम चाय के बाद इस पे बात करते हैं। अभी तो ये बता कि तुझे कुछ और चाहिए तो मैं अभी ले आता हूँ। क्योंकी अगर तूने रात को सिगरेट माँगा तो मैं कहाँ से लाऊँगा?”

“हाँ यार, याद आया। तू ऐसा कर कि एक पैकेट ले ही आ अभी..” मैंने इतना ही कहा था कि नीलू काशी की बड़ी बहन चाय लेकर रूम में आ गई और झुक के हमारे बीच रखकर वहीं खड़ी हो गई।

मैंने अपना सर उठाकर देखा तो मुझे बड़ी हैरानी हुई कि वो यूँ इस तरह हमारे सामने बिना दुपट्टा लिए ही चाय देने आई थी जिस पे काशी ने भी उसे कुछ बोलना जरूरी नहीं समझा था। मेरे लिए हैरानी की बात इसलिए थी कि हमारे मज़हब में ये चीज बड़ी खराब समझी जाती है कि कोई लड़की किसी भी अपने भाई या बाप के दोस्त के सामने इस तरह बिना दुपट्टे के जाए। क्योंकी बाहर वालों से हटकर घर वाले ही ऐसा नहीं होने देते, क्योंकि ये कोई अच्छी बात नहीं थी।

मैं नीलू की तरफ देखे जा रहा था हैरानी भरी नजरों से।

जिस पे नीलू ने काशी की तरफ देखा और बोली- “भाई लगता है तुम्हारे दोस्त ने कभी कोई लड़की नहीं देखी है। कभी, जो मुझे यूँ घूरे जा रहा है।

काशी उसकी बात सुनकर हँस दिया और बोला- “तुम ऐसा करो, अभी जाओ यहाँ से हमें कुछ बात करनी है..”

तो नीलू रूम से बाहर घर की तरफ चल दी और दरवाजा के पास जाकर वापिस मुड़ी और काशी से बोली- “भाई अगर तुम्हारा दोस्त रात यहाँ ही रहेगा तो मैं रात को पूरे घर में अकेली कैसे रहूंगी...”

काशी ने कहा- “यार, उसका भी कुछ करते हैं अभी तुम जाओ...”

तो नीलू रूम से निकल गई। तो काशी ने चाय लेते हुये कहा- “यार वो छोटी और अम्मी अब्बू शादी में गये हुये हैं, एक हफ्ते के लिए तो घर पे मेरे साथ बस नीलू ही रह गई है और रात को इसे काफी डर लगता है अकेले में...”

मैंने काशी की बात का कोई जवाब नहीं दिया और खामोश बैठा चाय पीता रहा।

तो काशी चाय खतम करके उठा और बाहर दुकान में चला गया सिगरेट लाने के लिए।

उसके जाते ही नीलू रूम में आ गई और खाली कप उठाने लगी और बोली- “वैसे आप अगर हँसते रहो तो अच्छे लगोगे..."

मैंने नीलू की तरफ देखा और अचानक मेरे दिल में ख्याल आया कि क्यों ना देखा जाए नीलू पे लाइन मारकर तो मैंने कहा- “अगर मैं मुश्कुराने लगूँ तो आप मेरे साथ थोड़ा टाइम बैठोगी?”

नीलू ने फौरन कप वापिस रखे और मेरे सामने जहाँ कुछ देर पहले काशी बैठा था बैठ गई और बोली- “अगर आप ज्यादा फ्री ना होने का वादा करो तो आप जब तक यहाँ हो मैं यहाँ बैठने को तैयार हूँ..”

मुझे नीलू की बात से बड़ी हैरानी हुई, लेकिन मैंने इसका इजहार नहीं किया और बोला- “लेकिन काशी शायद इस बात को बुरा समझे कि आप मेरे साथ बैठोगी?”

तो नीलू मेरी बात सुनकर हँस दी और बोली- “नहीं सन्नी जी, मैं अपने भाई को अच्छी तरह जानती हूँ। उसे जरा भी बुरा नहीं लगेगा और वैसे भी हम यहाँ सिर्फ बातें ही तो करेंगे जिसपे कोई भी ऐतराज नहीं कर सकता..."

अभी हम ये बातें ही कर रहे थे कि काशी सिगरेट लेकर आ गया और नीलू को मेरे सामने बैठा देखकर बोला यार नीलू, तुम मेरे इस बेचारे दोस्त को तो बख्श ही डालो ये बड़ा भोला है अभी...”

नीलू मेरी तरफ बड़े अजीब से अंदाज में देखते हुये बोली- “भाई,मैं कौन सा आपके दोस्त को खा जाऊँगी। हम बातें ही तो कर रहे हैं और वैसे भी आपके दोस्त ने ही कहा था बातें करने को..”

काशी- “अच्छा ठीक है, अभी तुम जाओ यहाँ से और खाना तैयार करो तब तक हम कुछ बातें कर लें..”

नीलू कप उठाकर रूम से बाहर चली गई तो काशी ने दरवाजे को लाक किया और मेरे सामने आकर बैठ गया और बोला- “हाँ यार सन्नी, अब जरा बातें हो जायें खुलकर कि आखिर तुझे परेशानी क्या है?"

मैं कुछ देर तक काशी की आँखों में झाँकता रहा और फिर एक ठंडी साँस छोड़ते हो बोला- “तू ने अभी तक वादा नहीं किया मेरे साथ कि आज मैं जो बात तुम्हें बताना चाहता हूँ, तू उस बारे में किसी से कोई बात नहीं करेगा, चाहे हमारी दोस्ती रहे या ना रहे.."

काशी- “देख यार सन्नी, अब जब तू ने खुद खुलकर बात करने की सोच ली है तो पहले तो मैं तुम्हें ये बता दें कि मैं जानता हूँ कि तू यहाँ क्या बात करने आया है? लेकिन फिर भी मैं अपनी माँ की कशम खाकर कहता हूँ कि चाहे मेरी जान ही क्यों ना चली जाए, मैं किसी को कुछ नहीं बताऊँगा...”

मैं थोड़ा हैरान होते हुये बोला- “नहीं काशी, तुम नहीं जानते कि मैं आज यहाँ किसलिए आया हूँ...”

काशी- “देख सन्नी, मैं कशम भी खा चुका हूँ और वादा भी करता हूँ, लेकिन साथ ही ये भी बता दें कि आज मैं तेरे सामने कुछ अपने राज भी बताऊँगा तुम्हें, जिसके बारे में कोई नहीं जानता, मेरे घर वाले भी नहीं... और बाकी रह गई तेरी ये बात कि मैं नहीं जानता... तो सुनो कि तुम यहाँ फरी के सिलसिले में आए हो, और बात करने के लिए ही आये हो। और तुझे एक सच ये भी बता दें कि जब मैं फरी के साथ रूम में था तो वहाँ उसने मुझे अपने मुहल्ले का नाम भी बताया था। लेकिन मुझे तब भी समझ में नहीं आई थी। लेकिन अभी तेरे आने से कुछ पहले मैंने फरी से बात करते हुये तेरा पूछा था कि वो तुम्हें जानती है?

तो उसने कहा “हाँ.. लेकिन ये नहीं बताया कि कैसे जानती है?
लेकिन जब मैंने कुछ ज्यादा जोर दिया तो उसने जो बताया वो मेरे लिए बड़ा ही हैरान करने वाला था।

मैं काशी की बात सुनकर अपना सर थामकर बैठ गया और बोला- “देख यार काशी, ये अच्छा नहीं हुआ। अगर उसे पता चला कि मैंने खुद तुम्हें उसे पटाने के लिए बोला था तो वो और कुछ नहीं समझेगी बल्की सारी जिंदगी मेरे साथ बात भी नहीं करेगी और मैं उसका सामना भी नहीं कर सकूँगा..."

काशी- “देख सन्नी, जो होना था वो हो गया, उसे हम वापिस नहीं ला सकते। लेकिन अब हम अगर चाहें तो फरी बहन को कहीं और किसी के साथ बदनाम होने से बचा सकते हैं...”

मैं काशी की तरफ देखते हुये बोला- वो कैसे?

काशी- “देख सन्नी, मेरी बात का गुस्सा नहीं करना, अगर बुरी लगे तो मुझे मना कर देना और बात खतम हो जाएगी और इसमें हम सबका ही फायदा है...”

मैं- “तू बोल जो बोलना है, मैं पूरी बात सुनूंगा तेरी और तेरी किसी बात पे गुस्सा भी नहीं करूंगा.”

काशी- “देखो सन्नी, ये बात तुम भी जान चुके हो और मैं भी कि फरी बहन ने अब जिस चीज का मजा चख लिया है, वो अब उसे रुकने नहीं देगा और अगर हम कुछ नहीं करेंगे तो वो किसी और के पास चली जाएगी।

और ये तो हमारी खुशकिश्मती है कि फरी बहन सबसे पहले अंजाने में ही सही, कहीं और नहीं गई। तो मैं चाहता हूँ कि फरी बहन का मजा हम दोनों खुद ही पूरा करें, तो फरी बहन को बाहर चुदवाने और बदनाम होने से भी बचा सकते हैं.” काशी इतना बोलकर चुप हो गया और मेरी तरफ देखने लगा।

लेकिन मैं कोई भी संकेत नहीं देना चाहता था कि जिससे उसे पता चले कि मेरे दिल में क्या है?

और जब उसे कुछ समझ में नहीं आया तो काशी ने कहा- “सन्नी, क्या सोच रहा है यार कुछ बता तो सही?”

मैंने सर झुका लिया और थोड़ी देर सोचने के बाद अपना सर उठा लिया और बोला- “लेकिन ये सब होगा कैसे कि फरी तेरे साथ-साथ मेरी तरफ भी आ जाए? क्योंकी आखिर वो बहन है मेरी। कैसे होगा ये?”

काशी मेरी बात सुनकर खुश हो गया और उठकर मेरे पास आया और मुझे हाथ से पकड़कर उठा लिया और अपने साथ लिपटा लिया और बोला- “यार सन्नी, मुझे उम्मीद नहीं थी कि तू भी मेरी तरह बहनचोद बनेगा...”
और हाहाहाहा करके हँसने लगा।

फिर काशी ने जो अभी बात की थी उससे मुझे काफी जोर का झटका भी लगा था।

कुछ देर तक ऐसे ही काशी मुझे अपने साथ लिपटाए भींचता रहा और फिर मुझे छोड़कर बोला- “यार तू क्यों परेशान हो रहा है? मैं हूँ ना... सारा काम मैं करूंगा, तू बस देखता जा...”

मैं- “लेकिन यार, अगर सच पूछो तो जब से मैंने फरी बाजी को तेरे साथ चुदवाते देखा है, ये साला लण्ड बैठ ही नहीं रहा। कुछ कर यार, अब बर्दाश्त नहीं होता... जल्दी से बाजी की दिला दे..."

काशी- “सन्नी यार, कल तो नहीं लेकिन परसों तक तेरी बहन तुमसे चुदवा रही होगी ये मेरा वादा है...”

मैं- “लेकिन यार ये होगा कैसे? और अभी जब तू ने मुझे अपने साथ लिपटाया था तो तुमने कहा था कि मैं भी तुम्हारी तरह बहनचोद बनूंगा, इसकी उम्मीद नहीं थी। इसका मतलब भी बता जरा?”

काशी हँसते हुये बोला- “यार अब जब हमारे बीच सब खुलता ही जा रहा है तो एक राज मैं भी तुम्हें बता देता हूँ, और वो ये है कि मैंने तुम्हें बताया था ना कि मैं ऐसे भाई बहन को भी जानता हूँ जो आपस में हर हद पार करके सेक्स करते हैं...”

मैं- हाँ मुझे याद है तू ने बताया था मुझे।

काशी- “तो सुन, वो कोई और नहीं मैं और मेरी बहन नीलू हैं और आज तक किसी को घर में भी इस बात का नहीं पता और मजे की बात ये है कि अगर नीलू ने अपने किसी बायफ्रेंड से चुदवाना हो तो मैं खुद उसे अपने साथ उसकी किसी दोस्त के घर जाने के बहाने ले जाता हूँ..”

मैं हैरानी से काशी की तरफ देखकर बोला- “काशी क्या तू सच बोल रहा है? मुझे यकीन नहीं आ रहा है...”

काशी- “अभी खाना तैयार होने के बाद हम दोनों तेरी बहन के साथ चैट करेंगे, जिसमें मैं उसको बोलूंगा कि नंगी फोटो भेजे अपनी। उसके बाद मैं उसे थोड़ा जेहनी तौर पे अपने इलावा किसी और से भी चुदवाने को मनाने की कोशिश करूंगा। और फिर मैं नीलू से भी पूछ लँगा कि अगर उसे तेरे साथ कोई ऐतराज ना हुआ तो आज की रात मैं और तू मेरी बहन नीलू के साथ मजे करेंगे...”

काशी की बात ने जहाँ मुझे खुश किया वहीं मेरा लण्ड भी खड़ा कर दिया था।

जिसे देखकर काशी हँस दिया और बोला- “अभी नहीं मेरी जान, क्योंकी यहाँ घर साथ-साथ हैं और गर्मियों के दिन हैं तो अक्सर लोग छत (रूफ) पे सोते हैं तो किसी की भी नजर पड़ सकती है। 10:00 बजे के बाद होगा अगर नीलू को कोई मसला ना हुआ और उसने मना ना किया तो...”

मैंने कहा- “यार, तू उसे मना ले ना प्लीज़्ज़... यार आज तो मेरा लण्ड बैठने का नाम ही नहीं ले रहा है..."

तो काशी ने कहा- “वैसे एक बात बताऊँ.. मुझे नहीं लगता कि वो मना करेगी। इसलिए दिल छोटा मत कर। मुझे उम्मीद है कि आज की रात हम थ्री-सम जरूर करेंगे..”

उसके बाद खाना खाने तक हम ऐसे ही गप्पें मारते रहे और फिर खाना खाकर जब नीलू ने बर्तन उठा लिए तो थोड़ी देर बाद हमने लैपटाप ओन किया और काशी अपने आई.डी. से आन-लाइन हुआ तो देखा कि फरी बाजी भी आनलाइन ही थी।

काशी- हाय।

फरी- हाय जान, कैसे हो?

काशी- जान, आज की मुलाकात को याद करके लण्ड हिला रहा हूँ।

फरी- मेरी भी हालत कुछ अच्छी नहीं है, और हाँ अभी 15 मिनट बाद बात करना अभी टाइम नहीं है।

काशी- “ओके... लेकिन उसके बाद तुम्हें अपनी पिक भी भेजनी होगी...”

फरी- “ज्यादा बदमाशी नहीं, ओके...”

बाद 25 मिनट तक कोई बात नहीं हुई तो फिर फरी की तरफ से ही बात शुरू हुई।

फरी- अब बोलो, अब मैं फ्री हूँ।

काशी- “यार, अपनी कुछ अच्छी वाली पिक भेजो ना, प्लीज़... बड़ा दिल कर रहा है.” 

फरी -नहीं, ऐसा नहीं हो सकता। अगर वो पिक किसी और के हाथ लग गई तो मैं तो गई काम से..”

काशी- “यार, देखने के बाद फौरन डेलिट कर दूंगा। अब तुम इतना ट्रस्ट तो कर ही सकती हो मुझे पे...”

फरी- पक्का डेलीट कर दोगे?

काशी- हाँ... ना यार वादा करता हूँ, डेलीट कर दूंगा।

फरी- “ओके... रुको मैं भेजती हूँ अभी...” कुछ देर में ही फरी की पिक हमारे पास थी जो कि घर की छत पे बनाई हुई थी। लेकिन उसने अपना चेहरा शो नहीं होने दिया था।

काशी- यार फरी, ये क्या कुछ खुली पिक दिखाओ ना?

फरी- नहीं काशी, ये ठीक नहीं होगा।

काशी- अरे बाबा, तुम ऐसे ही बिना चेहरे के पिक भेजो ना।

फरी- ओके... मैं भेजती हूँ, रुको अभी।

उसके थोड़ी देर बाद फरी ने जो पिक भेजी, वो कुछ ऐसी थीं।।

फरी- “अब और नहीं बोलना प्लीज़...”

काशी- ओके जान, लेकिन एक बात अभी करनी है तुमसे अगर बुरा नहीं मानो तो?

फरी- हाँ बोलो, क्या बात है?

काशी- यार क्या तुम्हारा दिल करता है किसी बड़े लण्ड वाले से चुदवाने को?

फरी- “सस्स्स्सीss जानू जी, ये तो मेरे दिल की ख्वाहिश है, लेकिन क्या करूं तुम्हारे लण्ड से ही अब गुजारा करना पड़ेगा...”

काशी- अरे मेरी जान, अगर तुम चाहो तो मैं किसी के साथ मिलवा हूँ?

फरी- नो थैक्स।

काशी- लेकिन क्यों या?

फरी- मुझे अभी बदनाम नहीं होना।