विजय अपने ऑफिस में बैठा हुआ गुमसुम साथा। उसकी पत्नी दीप्ति मां बनने वाली थी। आम तौर पर बच्चे की खुशी सभी को होती है। लेकिन विजय को नहीं थी। क्योंकि उसे पता था कि उसकी पत्नी के पेट में पल रहा बच्चा किसी और का है। जिसका है उसके बारे में भी विजय को पता था। थोडी देर पहले ही वो उससे बात कर रहा था। बच्चा भी उसी का था। क्योंकि विजय ने पिछले पांच सालों में बमुश्किल दस बार ही अपनी पत्नी को चोदा था। सप्ताह सप्ताह भर तो उसकी पत्नी घर पर ही नहीं आती थी। लेकिन विजय अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता था। इसलिए इतना सबकुछ होने के बाद भी वो उसे छोडने को तैयार नहीं था। और वैसे भी जो हो रहा था उन सबके पीछे विजय ही जिम्मेदार था।
विजय पाठक : उम्र 32 साल, औसत कदकाठी का हैं। लंड का साइज 5 इंच का है। एक बडी कंपनी में सीईओ हैं। एक साल पहले ही उसका प्रमोशन हुआ था। ये प्रमोशन उसके दोस्त की सहायता से हुआ था। कैसे हुआ था ये कहानी में आगे बताया जाएगा। पैसे कोई कमी नहीं। मंबई के एक पॉश इलाके में थ्री बीएचके फ्लैट में रहता है।
इस समय विजय पाठक अपने लैपटॉप पर एक मूवी देख रहा था। जो एक साल पहले बनाई गई थी। मूवी में उसकी पत्नी दीप्ति तीन लोगों से एक साथ चुद रही थी।
दीप्ति पाठक : विजय पाठक की बीबी 27 साल अभी प्रेगनेंट हैं। और उसे पता है कि उसके पेट में पल रहा बच्चा किसका है। विजय का नहीं है। उसे ये बात भी पता है कि विजय को सब कुछ पता है। क्योंकि दीप्ति कई बार विजय की आंखों के सामने चुद चुकी थी। बेहद खुबूसूतर जिस्म की मालिक, कदम 5.7 इंच, 5 साल पहले इसे सेक्स का ज्यादा मतलब भी पता नहीं था कि लेकिन आज किसी भी पॉर्न स्टार को भी मात दे दे। कहानी की मुख्य हीरोइन
सुरेश पाठक : ये विजय पाठक के बडे भाई हैं, उम्र 35 साल हैं कहानी में ज्यादा रोल नहीं है। इनके बारे में ज्यादा बताने की जरूरत हुई तो आगे बताया जाएगा।
पूनम पाठक : खूबसूरती में किसी भी एंगल से दीप्ति से कमजोर नहीं है। उम्र 31 साल हैं। आजकल ये अविनाश की रखैल बनी हुई है। अधिकांश समय अविनाश के साथ ही रहती है। लम्बाई 5 फुट 5 इंच, रंग गोरा। कॉलेज के दिनो में मॉडलिंग भी की है।
अविनाश सावंत : उम्र 31 साल, बहुत ही अय्यास किस्म का आदमी, औरत को वो सिर्फ मर्दों के जिस्म की भूख मिटाने वाली मशीन समझता था। जब उसने दीप्ति को देखा था तो उसे पाने के लिए पागल हो गया था। आज दीप्ति उसकी रखैल, रंडी, गुलाम सबकुछ है। अविनाश के एक इशारे पर दीप्ति भरे बाजार नंगी होकर चुदवाने को भी तैयार हो जाती है। अविनाश को दो ही शौक थे एक जिम का और दूसरा चुदाई का। आम तौर पर अविनाश ज्यादा औरतों को नहीं चोदता लेकिन दीप्ति पर उसका ऐसा दिल आया था कि सप्ताह में दो बार वो जरूर दीप्ति को चोदता था। कई बार तो रात को अचानक उसका मन होता तो वो विजय के फ्लैट पर पहुंच जाता। अविनाश को देखकर विजय अपने बेडरूम से दूसरे बेडरूम में चला जाता और फिर रात को अपनी बीबी की चुदाई की आवाजें सुनता रहता। कहानी का मुख्य हीरो
सलमान कुरैश : ये अविनाश का ड्रइावर हैं। पहले ये अविनाश के पिताजी की कार चलता था। अविनाश के पिता की जब मौत हुई तो अविनाश ने इन्हें अपने पास रख लिय। अविनाश के बेहद भरोसे के व्यक्ति, उम्र 46 साल, शरीर गठीना, 6.2 इंच का कद एक पहलवान की तरह लगता है। अविनाश के लिए कुछ भी करने को तैयार।
सलमा कुरैशी : सलमान कुरैशी की बीबी, उम्र 45 साल, सलमान और सलमा की शादी अविनाश के पिता ने ही कराई थी। सलमान उनका ड्राइवर था और सलमा रखैल। कहते हैं कि सलमा अविनाश के पिता मोहन सिंह की चुदाई से प्रेगनेंट हो गई थी। सलमान सलमा से प्यार करता था। और मोहन सिंह ने उससे दो तीन बार सलमा को चुदवाया भी था। सलमा जब प्रेगनेंट हुई तो मोहन सिंह ने दोनों की शादी करा दी थी। सलमा अपने समय में बहुत खूबसूरत थी। और सलमा के बच्चे को वो पूरा खर्च उठता है।
मोहन सिंह का कहानी में कोई रोल नहीं हैं। बस इतना ही है जो लिखा जा चुका है। सलमा का भी विशेष रोल नहीं है।
सलीम कुरैशी : सलमान और सलाम का बेटा, उम्र 25 साल, आईटी इंजीनियर है। सलीम की पूरी पढाई लिखाई से लेकर उसके बाकी खर्चें सभी कुछ मोहन सिंह ने किए थे। सलीम को किसी भी चीज की जरूरत होती थी तो वो अपने पिता की जगह मोहन सिंह के पास जाता था। मोहन की जगह जब अविनाश ने ली तो अविनाश ने भी अपने बाप के किसी भी काम को नहीं रोका और मोहन सिंह की आगे की पूरी पढाई का खर्च उसी ने उठाया। सलीम अविनाश को बहुत ज्यादा मानता था। और उसके लिए अपनी जान तक देने को तैयार था। अविनाश को भी ये पता था कि मोहन का लडका होने के कारण वो एक तरह से उसका भाई ही लगता है।
ममता कालिया : उम्र 59 साल, एक कोठा चलाती है। पहले ये एक रंडी थी। मोहन सिंह ने इसकी बहुत चुदाई की थी। मोहन सिंह की मदद से इसने मुंबई में अपना कोठा खोला था। मोहन सिंह इस कोठे में बराबर का हिस्सेदार था। ये बात अविनाश को बहुत बाद में मालूम पडी थी। ममता कालिया अविनाश को बहुत मानती थी। इसलिए अविनाश जब भी उसके कोठे पर आता था तो उसके सामने वो कोठे की नई कोरी लडकी पेश करने की कोशिश करती थी। मैकअप और बालों को रंगाती रहती है जिस कारण उसे देशकर कोई उसकी उम्र का अंदाजा नहीं लगा सकता।
राजू : ये एक अनाथ लडका हैं। उम्र 28 साल, अविनाश को ये 13 साल पहले मिला था। रेलवे स्टेशन पर फटेहाल, 15 साल था उस समय अविनाश अपने पिता के साथ जा रहा था। जाने अविनाश को क्या हुआ उसे राजू पर दया आ गई। पहले उसने राजू को खाना खिलवाया क्योंकि वो बहुत भूखा था। बाद में अविनाश ने अपने पिता से कहकर उसे अपने साथ रख लिया। शुरूआत में राजू घर के छोटे मोटे काम करता था। लेकिन अब अविनाश के बॉडीगार्ड के रूप में रहता है। अविनाश के लिए कुछ भी करने को तैयार रहता है।
काव्य : उम्र 26 साल, राजू की पत्नी, काव्या अच्छे घर की लडकी थी। लेकिन एक दिन उस पर ममता कालिया की नजर पढ गई। ममता कोठा चलाती है। जो अवैाध रूप से चलता है। ममत की पुलिस में अच्छी सेटिंग है। इसलिए उसका धंधा अच्छा चल रहा है। काव्या जब 18 साल की थी तब ममता ने उसे कॉलेज से लौटते हुए उठा लिया था। और इसे संयोग कहा जाएगा जिस दिन काव्या को ममता के गुंडो ने उठाया था उसी दिन अविनाश का ममता के कोठे पर जाना हुआ। और उसी दिन काव्या की सील अविनाश ने तोडी थी। इसके बाद अविनाश ने काव्या कोई बार चोदा था। बाद में राजू जब अविनाश के साथ रहने लगा तो एक दिन अविनााश ने काव्या को उससे भी चुदवाया था। राजू काव्या के हुस्न को देखकर पागल हो गया था। उसने अविनाश से कहा कि वो काव्या से शादी करना चाहता है। अविनाश ने राजू को बहुत समझाया कि काव्या रंडी है। लेकिन जब राजू ने जिद की तो अविनाश ने ममता से कहकर राजू की काव्या से शादी करा दी। आज भी जब अविनाश का मन होता है वो काव्या को चोदता है। राजू की अविनाश को इस काम के लिए पूरी इजाजत है। दो साल पहले काव्या को एक लडका हुआ। इस बच्चे का बाप राजू ही हैं। क्योंकि अविनाश काव्या को अब बहुत कम चोदता है।
कहानी में बाकी के पात्रा को जरूरत के अनुसार परिचय कराया जाएगा। अब कहानी शुरू करते हैं।
अपडेट-1
विजय : अफिस में बैठा लैप्टॉप पर चल रही एक मूवी देख रहा था। मूवी क्या ये एक पॉर्न मूवी थी। जिसमें एक औरत को तीन-तीन लोग चोद रहे थे। जो औरत चुद रही थी उसका नाम दीप्ति पाठक सही पहचाना विजय पाठक अपने लैपटॉप पर इस समय अपनी पत्नी की चुदाई की मूवी देख रहा था। दीप्ति एक आदमी का लंड चूस रही थी। दूसरे का लंड उसकी चूत में था और तीसरा दीप्ति की गांड मार रहा था और दीप्ति तीनों को ही पूरा मजा दे रही थी।
दीप्ति ने विजय पाठक ने कभी भी विजय का लंड नहीं चूसा था। और अब तो दीप्ति पर उसका अधिकार भी बहुत सीमित हो गया था। वो लोग एक घर में तो रहते थे लेकिन एक बेडरूम में नहीं सोते थे। अविनाश ने इसी शर्त पर दीप्ति को घर पर रहने की अनुमति दी थी कि वो विजय से नहीं चुदेगी। विजय से चुदना है तो फिर विजय को कोठे पर जाकर दीप्ति को चोदना होगा। जाहिर सी बात है अपनी ही पत्नी को चोदने के लिए पैसे देने होंगे। जो मूवी विजय इस समय देख रहा था वो करीब एक साल पुरानी थी। और दीप्ति की चुदाई की 500 से ज्यादा मूवियां विजय के लेपटॉप में थी। और सबसे बडी बात ये थी कि हर मूवी में दीप्ति को चोदना वाला इंसान अलग था। इसलिए विजय इस लेपटॉप को बेहद हिफाजत से रखता था। कई लॉक लगे हुए थे। ऐसा भी नहीं कि दीप्ति को पता नहीं था। दीप्ति को भी ये सब पता था। कि विजय का लैपटॉप उसकी चुदाई की मूवियों से भरा पड़ा है। क्योकि विजय के लेपटॉप का पासवार्ड उसे पता था कई बार विजय अपना लैपटॉप घर पर छोड जाता था तो दीप्ति अपनी चुदाई की मूवियां देखती थी और सोचती थी कि उसकी क्या जिंदगी है इतना प्यार करने वाला पति मिला। लेकिन वो प्यार को तरसती है। इतना होने के बाजवूद दोनों केे बीच फिर भी प्यार था। जिस कारण ये रिश्ता चल रहा था। विजय दीप्ति की चुदाई का वीडियो देख रहा था। जो करीब एक घंटे का था। उसके लैपटॉप में सिर्फ दो औरतों की चुदाई के वीडियो थे पहली उसकी पत्नी दीप्ति पाठक जिसके पहले ही बताया जा चुका है 500 से ज्यादा वीडियो थे और दूसरा पूनम पाठक जो विजय की भाभी थी। उसके करीब 60-65 वीडियो थे। जिसमें से 5 वीडियो में विजय खुद अपनी भाभी की चुदाई कर रहा था। और ये चुदाई हुई थी अविनाश के दबाव डालने पर। अविनाश ने दोनों से रोल पले करवाया था। और उसकी मूवी बनाई थी। जिसे देखकर कोई भी कह सकता था कि विजय ने अपनी भाभी की मजबूरी का फायदा उठाया उसे चोदा मूवी बनाई फिर अपने दोस्तों से चुदवाया। कुछ इस तरह की मूवी विजय और पूनम की बनवाई गई थी। विजय गहरी सोच में डूबा हुआ था। वो करे तो क्या करे क्योंकि अविनाश के चंगुल से जब भी उसने निकलने की कोशिश की। वो और गहराई तक उसमें फंस गया। उसका एक शौक आज उसके परिवार की दो औरतों को रंडी बना चुका था। अविनाश ने विजय को धमकी दे रखी थी कि यदि उसका ट्रांसफर हुआ तो या तो वो अकेला जाएगा या फिर उसे नौकरी छोडने होगी। नौकरी छोडने की सूरत में दीप्ति को पुराने काम पर लौटना होगा। जिस कारण विजय की हिम्मत ही नहीं हुई शहर छोड़ने की। इस समय दीप्ति प्रेंगनेट थी। और दीप्ति के पेट में पल रहा बच्चा विजय का नहीं था। वो किसी और का था, विजय, दीप्ति दोनों को पता था कि ये बच्चा अविनाश का है। और उसे जन्म देनों दीप्ति की मजबूरी भी है। फिर विजय सोच में डूब जाता है कि कैसे ये सब शुरू हुआ था।
कोई साढे पाच साल पहले की बात हैं। जिवय कंपनी के काम से अपनी क्लाइंटनें से मिलता रहता था। कभी कभी उसे तीन चार दिन के लिए बाहर भी जाना पडता था। उसकी दो साल पहले ही दीप्ति से शादी हुई थी। ये शादी घरवालों की मर्जी से हुई थी। दीप्ति बेहद खुबसूतर थी जिसे पहले नजर में देखते ही विजय ने पसंद कर लिया था। विजय की नौकरी अच्छी थी इसलिए दीप्ति के घरवालों ने अच्छा लडका देखते हुए दीप्ति की शादी विजय से कर दी थी। विजय एक पार्टी में गया था वहां उसकी मुलाकात अविनाश से हुई। अविनाश और विजय के बिजनेस में बहुत अंतर था। लेकिन विजय को अविनाश के बात करने का ढंग और उसका कांफीडेंस काफी अच्छा लगा। बातों ही बातों में विजय ने अविनाश ने अपने काम के बारे में बताया। अविनाश ने विजय से कहा कि उसके कुछ परिचित के लोग हैं तुम्हारे काम में मदद कर सकते हैं। इस दौरान दोनों ने एक दूसरे के नम्बर एक्सचेंज किए। इसके बाद विजय और अविनाश की बातों का सिलसिला शुरू हो गया। अविनाश के सहयोग से विजय को दो तीन ऑर्डर भी मिल गए थे। जिसके बाद दोनों कई बार बाहर मिलने लगे और उनमें कई तरह की बातें होने लगी। लेकिन विजय को मालूम नहीं था कि अविनाश के धंधे क्या क्या है। वो ये ही मानकर चलता था कि अविनाश की तीन चार फैक्ट्रिया हैं। लेकिन उसके अवैध धंधों के बारे में विजय को जानकारी नहीं थी।
अपडेट-2
एक दिन सुबह के समय विजय अविनाश के आफिस में बैठा हुआ था। ये आफिस अविनाश ने कुछ दिनों पहले ही किराए पर लिया था। अविनाश विजय से काम के बारे में पूछता है। काम की बातें होती रहती है तभी विजय अविनाश से वॉशरूम जाने के लिए बोलता है ऑफिस में अविनाश के ऑफिस से अटैच एक वॉशरूम था। विजय वॉशरूम जाता है। तभी दीप्ति का फोन विजय के फोन पर आता है। फोन पर फुल स्क्रीन दीप्ति का फोटो डिस्पले होने लगता है। दीप्ति की खुबसूरती देख विजय हैरान रह जाता है वो विजय का फोन उठाता है और दीप्ति का फोटो देखता है।
तभी उसे वॉशरूम के फ्लैश चलने की आवाज सुनाई देती हे तो अविनाश फोन जैसा था वैसा ही रख देता है। विजय जब तक बाहर आता है फोन कट जाता है। अविनाश ने फोन पर नाम भी देख लिया था। जो जान लिखा हुआ था। अविनाश समझ जाता है या तो ये विजय की गर्लफ्रेंड या फिर उसकी पत्नी वैसे विजय को देखते हुए गर्लफ्रेंड होने मुश्किल था। फिर भी अविनाश पहले क्लीयर करता है।
अविनाश : यार देख तेरी किसी क्लाइंट का फोन आया था।
विजय : फोन ठाता है और दीप्ति की मिस कॉल देखता है और अविनाश से कहता है भाई जरा दो मिनिट में आता है। फोन पर बात कर लूं।
अविनाश : यार क्लाइंट से बात तो यहां बैठकर भी हो जाएगी। मैं कौन सा तेरा क्लाइंट तोड लूंगा।
विजय : नहीं भाई क्लाइंट का फोन नहीं है बीबी का फोन है। और विजय बाहर चला जाता है. क्योंकि दीप्ति विजय से बहन्ुत ही रोमांटिक अंदाज में बात करती थी। अविनाश के सामने विजय बात नहीं कर सकता था इसलिए ऑफिस के बाहर आकर बात करता हैं।
दूसरी ओर अविनाश दीप्ति की खूबसूरती में खोया हुआ था वो किसी भी कीमत पर उसे हासिल करना चाहता था। लेकिन कैसे ये होगा कैसा। विजय थोडी देर बाद चला गया लेकिन अविनाश के मन में उथल पुथल छोड गया। वैसे अविनाश के लिए लडकियों की कोई कमी नहीं थी। ेलेकिन दीप्ति में उसे कुछ अलग ही दिखाई दे रहा था। अविनाश मन ही मन कहता है कि यदि ये मुझे नहीं मिली तो मैं पागल हो जाउंगा। लेकिन इसे हासिल कैसे करूं। क्यो उसे उठवा लूं। फिर सोचता है पहले विजय के मन में क्या है ये देख लेता हूं। इसके बाद जब भी विजय अविनाश से मिलने आता अविनाश अपने लैपटॉप पर एक पॉर्न पिक्चर चला देता था। विजय अविनाश के साथ उसके लैपटॉप पर इससे पहले भी कई बार पॉर्न पिक्चर देख चुका था। लेकिन अब जो फिकचर चलाई जाती थी ककोल्ड टाइम की होती थी। अविनाश फिल्म कम और विजय के चेहरे पर देखता था। सात आठ बार अविनाश इसी तरह की फिल्म विजय को दिखता है। फिर एक दिन।
विजय : अरे अविनाश भाई आपने बोला था कि आज एक पार्टी से मीटिंग करवाओगे।
अविनाश : हां भाई लेकिन क्या हे आज मेरा नौकर राजू की तबियत ठीक नहीं हैं। जरा पहले उसे देख लूं।
विजय : यार वो तेरा नौकर ही तो है क्यो मरा जा रहा है उसके लिए।
अविनाश : देश राजू की नहीं मुझे उसकी बीबी काव्या की चिंता ज्यादा रहती है।
विजय : क्यो :
अविनाश : तू चल तो सही तभी काव्या का फोन अविनाश के फोन पर आता है और जेसे ही विजय स्क्रीन पर पोटो देखता है तो उसे कोई माडल लगती है। अविनाश कहता है कि हां थोडी देर में आ रहा है।
विजय : किसका फोन था तू तो राजू के घर जाने की बात रहा था अब कहीं और जाने की बात कर रहा है।
अविनाश : राजू की बीबी का ही फोन था। पूछ रही थी कितनी देर में आओगे।
विजय : क्या ये राजू की बीबी है लेकिन ये किसी मॉउल जैसी लगती है।
अविनाश : हां इसने फिल्मों में भी ट्राई किया है कुछ फिल्में बनी भी।
विजय : अच्छा फिल्मों की हीरोइन और क्या बात करते हों।
अविनाश : भी हंसने लगता है और बात को मजाक में उडा देता है। थेाडी देर बाद विजय और अविनाश राजू के घर पहुंचते हैं।
काव्या को देख विजय उसकी खूबसूरती में खो जाता है अविनाश इसे पकड लेता है। वैसे देख तो राजू भी लेता है लेकिन वो कुछ बोलता नहीं है।
राजू : अरे साहब आपको आने की क्या जरूरत थी मेरी तबियत ठीक है। सुबह थोडा गरम लगा तो इसने रोक लिया। जाता तो गुस्सा हो जाती।
अविनाश : कोई बात नहीं राजू तू किस्मत वाला है जो इतनी समझदार बीबी मिली है।
राजू: सब आपकी मेहरबानी है। नहीं तो मेरी किस्मत में ऐसी बीबी कहां लिखी थी। और रनजू काव्या से चाय बनाने के लिए बोलता है काव्या चाय बनाने चली जाती है।
विजय : यार मुझे अभी भी भरोसा नहीं हो रहा इतनी खूबसूरत औरत राजू की बीबी है।
राजू: साहब मुझे भी नहीं होता। लेकिन साहब के कारण आज काव्या मेरी बीबी है। विजय कई बार अविनाश् से मिला था और अधिकांश समय राजू अविनाश के साथ होता था इसलिए वो दोनों एक दूसरे को अच्छी तरह से जानते थे।
अविनाश : यार राजू बहुत दिनों बाद तेरे घर पर आया हूं और काव्या को देखकर मन कर रहा है।
अविनाश की बात सुनकर विजय चौक जाता है और उसे राजू के जबाव का इंतजार था।
राजू: साहब आपके लिए मैंने कभी इंकार नहीं किया लेकिन विजय बाबू, उसके लिए तो काव्य तैयार नहीं होगी।
अविनाश : ये बता तुझे कोई दिक्कत तो नहीं है।
रााजू : साहब आपसे में कभी मना कर पाया हूं
अविनाश : विजय से क्यो विजय क्या सोचता है देख मैं तो चाय पीने के बाद काव्या को बेडन्रूम में ले जाउंगा वहीं चोदूंगा। तुझे राजू से बात करनी है या हमें ज्वैइन करना है काव्या का थ्री सम करने में।
विजय : क्या बात करते हो अविनाश क्या काव्या हम लोगों से चुदने को तैयार हो जाएगी।
अविनाश : छह बार होगी। राजू की बीबी बनने से पहले वो मेरी रखैल थी। और आज भी है। राजू की किसी बात से इंकार कर सकती है मेरी बात से नहीं। तभी काव्य चाय लेकर आ जाती हैै और वहीं सामने बैठ जाती है।
काव्या : सर आपत ो अब आते ही नहीं है। आपको बुलाने के लिए ही आज मैंने राजू को रोक लिया था।
अविनाश : मुझे मालूम है तेरी आदतें, तुझे दो साल तक जमकर निचोडा है वो तो राजू का दिल तेरे उपरर आ गया था। इसलिए तू उसकी बीबी बनी नहीं तो तू सोच ले तेरे साथ क्या होता।
काव्या : वो तो हैं सर इसलिए राजू को छोड मैंने फिर किसी मर्द की तरफ नहीं देखा।
अविनाश : लेकिन आज देखना होगा।
काव्या : क्यो
अविनाश : ये मेरे दोस्त है विजय, मैं तो तुझे चोदूंगा ही लेकिन मेरा दोस्त यहां लंड हिलाए ये मुझे अच्छा नहीं लगेगा।
काव्या : लेकिन सर आपने कहा था कि शादी के बाद राजू और आपके अलावा मैं किसी से न चुदवाउं।
अविनाश : कहा था लेकिन ये मेरे साथ आया है। और तुम इसे मेरा हुकुम मान सकती हो। सिर्फ आज इसके बाद ये तुम्हारी तरह आंख उठाकर नहीं देखेागा।
काव्या : सर ये तो आप भी जानते हैं कि आपकी बात मैं टाल नहीं सकती। फिर आदेश देने की क्या जरूरत है। सिर्फ कह देते कि काव्या आपकी इच्छा है।
अविनाश : सॉरी यार मुझे लगा तू मना कर रही है।
काव्या : सर ये कभी सोचना भी मत कि काव्या आपकी बात का कभी मना करेगी।
तब तक चाय समाप्त हो जाती है। और चारों लोग बेडरूम में पहुंच जाते हैं। जहां अविनाश और विजय मिलकर काव्या की चुदाई करते हैं और राजू सामने बैठकर देखता रहता हैं.
चुदाई में विजय 15 मिनिट ही टिक पाता है। जबकि अविनाश एक घंटे से ज्यादा काव्या को चोदता रहता है। जबकि विजय तब तक काव्या के बदन से खेलता रहता है आधे घंटे बाद विजय फिर चार्ज हो जाता है और दूसरी बार वो अविनाश के साथ झडता है। इसके बाद वो लोग राजू के घर से चले जाते हैं।
