दिव्या: मैंने मना किया था ना कि मुझे कॉल मत करना कभी।
मनीष: वो मैडम आपके मैसेज अभी देखे मैंने तो लगा शायद कुछ जरूरी है। बताइये क्या हुआ।
दिव्या: तुमने ही तो कहा था कि रात में जरूर ऑनलाइन आना।
मनीष: हाँ लेकिन मुझे लगा था कि अपने पति की वजह से आप आएँगी नहीं। अभी कहाँ हैं आपके हस्बैंड?
दिव्या: दूसरे कमरे में सो रहे हैं।
मनीष: क्या मैडम आपके होते हुए वो कैसे सो सकते हैं, वैसे थैंक्स मैडम, मेरे लिए आने के लिए।
दिव्या: मैं ज्यादा बात नहीं कर सकती, हस्बैंड ने सुन लिया तो दिक्कत हो जाएगी।
मनीष: ठीक है मैडम ऑनलाइन आ जाओ फिर।
दिव्या: नहीं मनीष, अब काफी टाइम हो गया, फिर कभी बात करते हैं।
मनीष: प्लीज़ मैडम, आ भी जाओ, आपकी आवाज़ सुन कर तो आपको देखे बिना रहा नहीं जाएगा।
दिव्या सोचती हैं, वो भी मनीष से बात करना चाहती हैं पर डर भी रही हैं। वो मनीष को कुछ देर वेट करने को कहती हैं जिससे वो अपने पति को देख कर सुनिश्चित हो सके। राजेश को बेसुध देखते ही दिव्या वापस आ जाती हैं और ऑनलाइन लॉगिन करती हैं। दिव्या को ऑनलाइन आए देर नहीं होती कि आज वो बिना कुछ कहे ही अपना कैम ऑन कर देती हैं और कैम को एडजस्ट करती हैं, दिव्या को सामने इस तरह देख मनीष का भी मुंह फटा रह जाता है।
दिव्या ने ब्लाउज के बटन पहले ही खोल रखे थे जिसकी वजह से उसके मम्मे बाहर आने को बेताब थे। मनीष ये बात अच्छी तरह से समझ जाता है कि दिव्या क्यों उससे बात करने के लिए इतनी बेसब्र हो रही थी। आज तो मनीष को दिव्या को गरम करने की कोई जरूरत भी नहीं थी। पर मनीष भी एक नंबर का कमीना था, वो जानकर दिव्या से इधर-उधर की बातें करने लगता है, दिव्या से अब रहा नहीं जा रहा वो किसी भी तरह मनीष का कैमरा भी ओपन करवाना चाहती है पर उसे समझ नहीं आता कि ये बात बोले कैसे।
बड़ा सोच समझ कर दिव्या मनीष से पूछती है - अभी क्या कर रहे हो तुम मनीष?
मनीष: आपसे बाते कर रहा हूँ मैम। इयरफ़ोन यूज़ करो न मैम।
दिव्या: नहीं आज नहीं, मेरे पति सो रहे हैं।
मनीष: करो ना मैडम, धीरे-धीरे बात करना। अब आपकी आवाज़ सुने बिना मजा नहीं आता।
दिव्या इयरफ़ोन लगा लेती है।
दिव्या: हम्म, वो तो पता है। आज भी कुछ उल्टा सिद्धा ही कर रहे होंगे।
मनीष: खुल के बताओ ना मैडम क्या जानना चाहती हो।
दिव्या: तुम्हारा कैमरा आज ख़राब है क्या।
मनीष: नहीं तो मैडम, लेकिन आपने ऐसा क्यों पूछा।
दिव्या: कुछ नहीं, आज बस तुमने ऑन नहीं किया तो पूछ लिया।
मनीष: आप देखना चाहती हो तो मैं ओपन करूँ क्या।
दिव्या: नहीं रहने दो, तुम तो हमेशा ही नंगे ही रहते हो।
मनीष: नहीं मैडम, मैंने तो कपड़े पहने हुए हैं।
दिव्या: ऐसा तो हो नहीं सकता, मैं जानती हूँ तुम्हें। तुम रहने दो।
मनीष: ठीक है मैडम। वैसे आपका मन करे तो मैं आपके लिए नंगा हो सकता हूँ।
मनीष जानकर दिव्या को और तरसाना चाहता है, पर उसे भी डर है कहीं ये खेल उल्टा न पड़ जाए, वहीं दिव्या को भी समझ नहीं आ रहा कि कैसे डायरेक्टली मनीष से कहें अपने दिल की बात। दिव्या जानकर बहाने से अपना पल्लू गिरा देती है, जिससे उसके मम्मे जो पहले ही ब्लाउज के बटन खुले होने की वजह से बाहर को झांक रहे थे, वो मनीष के सामने आ जाते हैं। दिव्या के चेहरे पर हवस साफ़ देखी जा सकती थी।
दिव्या पल्लू को गिरा चुकी थी पर अपने मम्मों को वो अपने हाथो से छुपाने की कोशिश कर रही थी। दिव्या के मम्मो की गोलाई और निप्पल की हलकी झलक से ही मनीष का लंड आसमान को सलामी देने लगा था। लेकिन वो दिखा ऐसे रहा था की जैसे उसने कुछ देखा ही न हो।
मनीष: मैम मुझे आपसे एक बात पूछनी थी।
(दिव्या को लगता है कि मनीष अब फस गया है)
दिव्या - हाँ पूछो मनीष।
मनीष: मैम आप आज इतनी रात को जागी कैसे हो।
दिव्या - तुमने ही फ़ोर्स किया था बात करने के लिए, अब तुम ही पूछ रहे हो।
मनीष: आप कितनी बात मानती हो ना मेरी। आप चाहो तो सो जाओ मैम। आपको सुबह उठना भी होगा।
दिव्या - वैसे नींद नहीं आ रही है मुझे पर लगता है आज तुम्हें नींद आ रही है। तुम सो जाओ मैं चलती हूँ।
मनीष: नहीं मैम मैं तो आपके लिए ही कह रहा था।
दिव्या समझ नहीं पती कि आज मनीष इतना सीधा क्यों बन रहा है। अखिर वो ही बात को थोड़ा दूसरी तरफ ले जाने की कोशिश करती है।
दिव्या - तुम सच में न्यूड तो नहीं हो न मनीष।
मनीष: नहीं मैम सिर्फ़ बॉक्सर में हूँ।
दिव्या - मुझे सच में तुम पर यकीन नहीं हो रहा। अपना कैम ऑन करना।
मनीष: आप कहती हो तो ज़रूर मैम।
मनीष कैम ऑन कर के दिव्या के सामने खड़ा हो जाता है, मनीष के लंड की शेप उसके बॉक्सर में साफ़ चमक रही थी।
मनीष उसे छुपाने की कोशिश भी नहीं करता, मनीष का लंड देख के दिव्या के मन में हलचल तेज हो चुकी थी।
मनीष: बस मैडम देख लिया ना, मैंने झूठ नहीं कहा।
मनीष अपनी बात दोहराता है तो दिव्या का ध्यान उस पर जाता है।
मनीष: कहाँ खो गई थी मैडम।
दिव्या - कहीं नहीं। बस ऐसे ही सुनाई नहीं दिया।
मनीष: अब तो यकीन हो गया ना मैडम मैं आपसे झूठ नहीं कहता।
दिव्या - हाँ, हो गया यकीन।
मनीष अब अपनी चेयर पर बैठ जाता है पर बैठते हुए अपने लंड को इस तरह एडजस्ट करता है कि वह उसके इनर के साइड से एक नाग की तरह फन फैलाएं दिखता है। दिव्या की नज़रें बार-बार मनीष के लंड की ओर ही जाती हैं और ये बात मनीष भी जानता है पर आज उसे दिव्या को इस तरह तडपाने में कुछ ज्यादा ही मज़ा आ रहा था। वहीं मनीष के खुलकर बेशर्म न होने से दिव्या और तड़प रही थी। मनीष से बात करते हुए वह चाह कर भी अपनी नज़र को उसके लंड की ओर जाने से रोक नहीं पा रही थी। वो किसी तरह भी टॉपिक सेक्स की तरफ ले जाना चाहती थी।
दिव्या: तुम अभी तक सोए क्यों नहीं थे।
मनीष: बस मैडम नींद नहीं आ रही थी।
दिव्या: क्यों ऐसा हुआ आज। क्या आज भी अपनी बहन के कमरे में गए थे क्या।
मनीष: हाँ, गया था लेकिन मैडम इस सब में आपकी गलती है।
दिव्या: मेरी गलती कैसे है।
मनीष: आपकी वजह से मेरी सोच अपनी बहन के लिए बदल गई है। स्कूल में आप तड़पाती हो और घर में मेरी बहन।
दिव्या: वो कैसे तडपाती है तुमको?
मनीष: बस अब उसे देख कर मन करता है की कुछ कर ही डालूँ। कितनी बार सोते समय उसकी चुन्ची और चूत को छू चूका हूँ पर पता नहीं उसको ये सब पता है या नहीं।
दिव्या: छुआ है तो उसे तो पता ही होगा ना।
मनीष: पता नहीं। वह सोती रहती है। लेकिन डर लगता है कि कहीं जाग न जाए। तुमसे चैट करने से पहले मैं उसके कमरे में ही था।
दिव्या: तभी तुम रिप्लाई नहीं कर रहे थे मुझे।
मनीष: हाँ मैडम।
दिव्या: तुम क्या कर रहे थे वहाँ।
मनीष: मैडम उसे सोते हुए थोड़ा छेड़ने का चांस मिल जाता है।
दिव्या: छेड़ने का चांस मतलब।
मनीष दिव्या को एक फोटो भेजता है।
दिव्या: ये क्या है मनीष, इस तरह से तो वो जाग गई होगी।
मनीष: यही तो नहीं पता।
दिव्या: पर तुम्हें डर नहीं लगा।
मनीष: डर तो बहुत लगा मैडम लेकिन कंट्रोल नहीं कर पाया। ऊपर से उसके मम्मे एकदम मखमली से है।
दिव्या: तुम्हें ये सब नहीं करना चाहिए था।
मनीष: ये सब तो आप ही ने करवाया ना।
दिव्या: हम्म, हुआ तो मेरी ही वजह से है। पर इसमें तुम फस गए तो घर में मुँह नहीं दिखा पाओगे।
मनीष: आप नहीं जानती मैं, मैडम, आपके मेरी लाइफ में आने के बाद मैं कितना तड़पता हूँ। आपकी लाइफ कितनी सही है। हस्बैंड है आपके साथ, जब चाहो तब जो मर्जी करो। आपकी तो खूब चुदाई हो रही होगी आजकल।
दिव्या ये सुन थोड़ा मायूस हो जाती है। मनीष भी उसके लटका चेहरे को देख समझ जाता है की राजेश कुछ कर नहीं रहा।
मनीष जानबूझ कर दुबारा पूछता है।
मनीष: क्या हुआ मैडम आप उदास क्यों लग रही हो।
दिव्या: कुछ नहीं।
मनीष: कुछ तो है मैम, मुझे नहीं बताओगे।
दिव्या: मुझे लगता है मेरे पति को मुझमें इंट्रेस्ट ही नहीं है।
मनीष: अब मैम इतनी रात में भी साड़ी पहन कर रहोगी तो इंट्रेस्ट रहेगा भी कैसे। मैं तो खुद आपको टोकने वाला था कि इतनी रात में कौन साड़ी पहनता है।
दिव्या: वह तो मैंने चैट करने से पहले पहनी थी। उससे पहले तो नाइटी में थी।
मनीष: ये तो गलत बात है ना मैं, मुझे भी दिखाओ कैसी लगती हो नाइटी में।
दिव्या: मुझे शर्म नहीं आएगी क्या।
मनीष: क्या मैम। सब कुछ तो देखा है मैंने। जानती हैं कि मेरी फेवरेट जगह कौन सी है।
दिव्या: कौन सी?
मनीष: आपकी गांड। वही से तो आपका और मेरा प्यार शुरू हुआ था ना।
दिव्या: चुप। मैं कोई प्यार व्यार नहीं करती तुम्हें।
मनीष: प्यार नहीं करती तो अपनी गांड क्यों मसली थी मेरे लंड पर।
दिव्या चुप हो जाती है कि अब क्या कहें।
मनीष: एक बात पूछूं मैं मैम।
दिव्या: हम्म्म बोलो।
मनीष: आज बाथरूम में आपका मन नहीं हुआ मेरा लंड बाहर निकलने का।
दिव्या को कुछ ना बोलता देख मनीष अपना प्रश्न दोहराते हुए अपने लंड को मसलता है। दिव्या की नजर भी वही जा रही थी बार बार। दिव्या मनीष के लंड से नजर हटाये बिना कहती है
दिव्या: मुझसे मत पूछो कुछ।
मनीष: क्यों ना पूछूं, जवाब तो मुझे पता है पर आपसे सुनना चाहता हूँ।
दिव्या: मुझे नहीं पता।
मनीष: और अभी, अभी भी आपका मन नहीं है कि मैं अपना लंड बाहर निकालूं जिससे आपको इसे ऐसे नज़रे चुरा कर ना देखना पड़े।
मनीष ऐसा कह कर अपने को एक झटका सा देता है।
मनीष: बोलो न मैम। निकालूं इसे बाहर। आपका मन है ना इसे खुल कर देखने का।
दिव्या कापती सी आवाज़ में ना कहती है।
मनीष: आपने प्रॉमिस किया था आप मुझसे झूठ नहीं कहोगे।
दिव्या एक गहरी साँस लेती है: हाँ चाहती हूँ मैं।
मनीष: तो शर्मा क्यों रही थी जब से।
मनीष: अब खुश हों मैम।
मनीष लंड को आजाद करते हुए पूछता है। कुछ पलों के लिए दिव्या अपनी नज़र लंड से हटा ही नहीं पाती। मनीष भी ये देख के काफी जोश में आ जाता है और दिव्या को खड़े होने का आदेश सा दे देता है।
दिव्या: क्यों खड़ी होने को बोल रहे हो।
मनीष: थोड़ा फ्री होकर बैठो अब सिर्फ ब्रा पेंटी में।
दिव्या: नहीं आज नहीं, मेरे हस्बैंड हैं दूसरे कमरे में।
मनीष: बहुत देर से तरसा रही हो आधे अधूरे मम्मे दिखा के। अब बहाने मत बनाओ। उतारो जल्दी।
दिव्या: समझो ना मनीष।
मनीष: काश मैं वहां होता तो तुम्हारी झिझक एक पल में मिटा देता।
दिव्या: क्या करते तुम मेरे साथ।
मनीष अपने लंड को हिलाते हुए: सबसे पहले तो जी भर के तुम्हारी चौड़ी गांड पर अपना लंड रगड़ता।
दिव्या: फिर।
मनीष: फिर तुम्हें नंगी कर के तुम्हारी चूत में अपनी उंगली डाल के उसे खूब चाटता।
दिव्या: उसके बाद।
दिव्या गहरी साँस लेते हुए अपने हाथों को जांघ तक ले जाते हुए रुक जाती है।
मनीष: रुको मत मैम, सहला लो अपनी चूत, मेरी ही तरह आप भी तड़प रही हो न।
मनीष: चलो अब नखरे न करो मैडम और जल्दी से ब्रा पेंटी में आ जाओ।
दिव्या: सब तो देखा है ना तुमने।
मनीष: आज गांड देखूंगा तुम्हारी। तुम चाहती हो ना मैं लंड रगड़ूं फिर से तुम्हारी गांड पर।
दिव्या: हाँ। चाहती हूँ।
मनीष: उतारो फिर जल्दी।
दिव्या बैठे हुए ही अपना ब्लाउज और पेटीकोट उतार देती है। मनीष उसे अब खड़ा होकर अपनी गांड दिखाने को कहता है तो वो स्क्रीन के सामने खड़ी हो जाती है।
मनीष: कम ऑन मैडम, एक टांग चेयर पर रख कर अपनी गांड को सहलाओ जैसे कि मेरा हाथ हो तुम्हारी गांड पर।
दिव्या: दिव्या अब विरोध करना छोड़ चुकी थी। अपनी हवस में वो मनीष के इशारों पर नाचने लगी थी।
मनीष भी अपना लंड हिलाना शुरू कर चुका था।
मनीष: अब बताओ मैम,पहले क्या उतारोगी, ब्रा ये पेंटी।
दिव्या: मनीष,तुम ये सब किसी को बताओगे नहीं ना।
मनीष: आज तक बताया है क्या मैंने,चलो ना अब उतारो जल्दी।
दिव्या मनीष की तरफ कमर करके अपनी ब्रा का हुक खोलने लगती है पर मनीष का ध्यान उसकी गांड से हट ही नहीं रहा था।
मनीष: मैम,प्लीज जो भी करो,अपनी गांड मटकाते हुए करना।
दिव्या की पेंटी उसकी बड़ी गांड के बीच में कहीं धस चुकी थी।
दिव्या अपनी ब्रा को ओपन कर चुकी थी पर मनीष अभी भी उसकी गांड को ही निहारे जा रहा था। वह जल्द से जल्द उसे पूरा नंगा कर देना चाहता था। मनीष दिव्या को घूम कर स्क्रीन के पास आने को कहता है तो दिव्या उसकी तरफ मुँह करके स्क्रीन की ओर आती है।
मनीष: ऐसे नहीं मैम, अपने मम्मो को मेरे लिए मसलो जरा।
दिव्या बिना देर किए अपने मम्मे मसलती हुई स्क्रीन के पास आ जाती है।
मनीष झट से स्क्रीन को किस करता है जैसे सच में दिव्या के मम्मे उसके सामने हो।
मनीष: वाह मैम, चलो अब अपनी गांड भी दिखाओ मुझे।
दिव्या तो इस वक्त एक कठपुतली की तरह मनीष के इशारों पर नाच रही थी, जिसका यकीन खुद मनीष को भी नहीं हो रहा था।
दिव्या मनीष की तरफ अपनी गांड करके मटकते हुए अपनी पेंटी नीचे करने लगती है।
दिव्या का शरीर इतना गरम हो चुका था कि उसे एयर कंडीशनर में भी पसीने आने लगे थे। वहीं मनीष का भी इस सब से बुरा हाल हो चुका था। दिव्या को अपनी हर बात इतनी आसानी से मानते देख मनीष दिव्या को आज हर दायरे से बाहर निकालना चाहता था।
मनीष: चलो मैम अब जरा बेड पर लेट कर अपनी गांड थोड़ी सी उठाओ।
दिव्या: मनीष मुझे बहुत शर्म आ रही है।
मनीष: अब नखरे मत करना मैम प्लीज़। देखो मेरा कितना बुरा हाल हो रहा है।
मनीष दिव्या का ध्यान अपने लंड की तरफ खींचता है, जिसे अब वह हर कपड़े से आजाद कर चुका था।
दिव्या मनीष के लंड की तरफ देखती है और अगले ही पल बेड पर लेट कर अपनी गांड ऊपर उठा लेती है.
दिव्या की गांड एकदम बेदाग़ थी.
मनीष: मैडम आपके शरीर पर तो एक भी बाल नहीं है। क्या आप गांड भी शेव करती हो?
दिव्या कुछ जवाब नहीं देती।
मनीष: मैडम....
दिव्या: हम्म्म
मनीष: कभी आपके पति ने आपकी गांड मारी है?
दिव्या: ये क्या सवाल है।
मनीष: बताओ भी मैडम।
दिव्या: नहीं, कभी नहीं।
मनीष: अगर मैं आपकी गांड मारूं तो आपको अच्छा लगेगा ना।
दिव्या: इसमें कैसे किसी को अच्छा लग सकता है।
मनीष: क्यों, बस मैं तो काफी गरम हो गई थी जब मैंने अपना लंड रगड़ा था इस पर।
दिव्या: वो अलग बात है। यहाँ तो हाथ लगाने से भी दर्द होता है।
मनीष: जब आपने चूत मरवाई होगी पहली बार तब भी तो पेन हुआ होगा।
दिव्या: हम्म, हुआ था।
मनीष: ऐसे ही यहाँ भी होगा तो क्या बड़ी बात है।
मनीष: मैडम, मेरा बड़ा मन है कभी फिर से आपकी गांड को बस में वैसे ही रगड़ने का।
दिव्या: खबरदार अब ऐसा मत करना कभी।
मनीष: एक शर्त पर।
दिव्या: वो क्या?
मनीष: आप खुद मुझे अपनी गांड रगड़ने दोगी अगर कहीं सही चांस मिला तो।
दिव्या कुछ देर तक सोचती है,फिर मनीष के इंसिस्ट करने पर वो इस बारे में सोचने का प्रॉमिस कर देती है।
मनीष: मैडम, आपका मन है न अपनी चूत सहलाने का।
दिव्या: सच कहूँ तो हाँ।
मनीष: तो सहलाओ ना, देखो मैं भी तो कैसे लंड हिला रहा हूँ आपको देखकर।
दिव्या अब बेड पर सीधा लेट जाती है, पर अपनी चूत को नहीं छेड़ती।
मनीष: करो ना मैडम, मैं जानता हूँ आप बहुत तड़प रही हैं। सोच लो जैसे मैं वहां हूँ और आपके बेड पर आपके ऊपर आकर आपको अपने मोटे लंड से चोद रहा हूँ।
दिव्या मनीष की ओर देखती है और अपनी अखिरकार उंगली चूत के अन्दर डाल कर अंदर-बाहर करने लगती है।
मनीष: वाह मैम, और तेज़ प्लीज़।
दिव्या भी अब रुकना नहीं चाहती, पर उसे तभी दूसरे कमरे से कुछ आवाज सुनाई देती है।
दिव्या हडबड़ा कर उठ जाती है और लॉगआउट करने लगती है, मनीष उसे रोकने की कोशिश करता है पर दिव्या घबरा कर लैपटॉप सीधे बंद कर देती है। जहाँ एक और मनीष मायूस हो जाता है, वहीं दिव्या भी अचानक राजेश के उठने से काफी दुखी मन से कपड़े पहन कर राजेश के कमरे में जाती है और ऐसा दिखाती है की जैसे वो सो कर उठी हो।
राजेश: कहाँ थी दिव्या।
दिव्या (गुस्से में): तुम्हारे अंदर से इतनी स्मेल आ रही है कि मुझे दूसरे कमरे में सोना पड़ा और अब आधी रात को आवाज लगा कर मुझे जगा दिया।
राजेश: सॉरी दिव्या, मुझे लगा तुम न जाने कहाँ हो तो मैंने आवाज लगा दी। तुम प्लीज़ मेरे साथ ही सो जाओ।
दिव्या चाहती थी कि राजेश सो जाए तो वो मनीष से बात करे पर राजेश के इस तरह उठने से वो अब मनीष से बात करने का रिस्क नहीं ले सकती थी। वो किसी तरह अपनी हवस को दबाने की कोशिश करती है और राजेश के साथ ही सो जाती है।
सुबह उठकर दिव्या स्कूल के लिए तैयार हो जाती है, वो राजेश को पहले ही बता चुकी थी कि उसे अर्जेंट काम से स्कूल जाना पड़ेगा। राजेश भी अपने किसी फ्रेंड से मिलने के लिए कह देता है। दिव्या कुछ समय में स्कूल के लिए निकल जाती है...
दिव्या स्कूल में पहुँचती है तो गेट पर सलमान पहले ही मौजूद था।
सलमान: अरे मैडम आज छुट्टी के दिन भी आप स्कूल में?
दिव्या कोई जवाब नहीं देती और सलमान को इग्नोर करके अंदर चली जाती है, दिव्या सीधा प्रिंसिपल के कमरे की ओर जाती है। प्रिंसिपल भी कमरे में पहले से ही दिव्या का वेट कर रहा था।
मदन: आइये दिव्या जी। थोड़ा लेट हो गई आप।
दिव्या: सर, वो हसबैंड भी आए हैं घर तो कुछ काम था। उसमें लेट हो गई।
मदन: कोई बात नहीं। मैं समझ सकता हूँ अगर पति इतने दिनों बाद घर आए तो सुबह उठने में परेशानी तो होती ही होगी।
ये बोलते हुए प्रिंसिपल थोड़ा हँसता है, दिव्या भी समझती है कि प्रिंसिपल का इशारा किस और है, पर वह उसे इग्नोर कर उसे आज स्कूल बुलाने का मकसद पूछती है।
दिव्या: सर, मुझे बता दीजिए क्या काम है आज, क्या मेरे अलावा और कोई और नहीं आ रहा?
मदन: किसी और का क्या काम है। और काम तो होता रहेगा आप प्लीज़ बैठिए तो सही।
दिव्या: जी सर। (दिव्या सीट पर बैठ जाती है) पर मुझे काम खत्म करके आज निकलना होगा, इसलिए...
मदन: (उसकी बात को बीच में काटते हुए) मुझे कहना है कि दिव्या जी, आप ब्लैक साड़ी में इतनी खूबसूरत लगती हैं, तो मॉडर्न कपड़ों में तो आप ही ढाती होंगी।
दिव्या उसकी बात सुन कर गुस्सा हो जाती है पर अपने आप को थोड़ा कंट्रोल करते हुए प्रिंसिपल से सीधा काम के लिए पूछती है।
मदन: ओह, ठीक है दिव्या जी, लगता है आपको मेरा मजाक पसंद नहीं आया, ठीक है आप निकल जाइएगा पर पहले एक बहुत जरूरी बात डिस्कस करनी थी आपसे।
दिव्या: जी कहिए।
मदन: स्कूल में कुछ बच्चे फाइनल पेपर के साथ पकड़े गए हैं, जो मेंने सेलेक्ट किए थे। लेकिन एग्जाम की जिम्मेदारी तो आपकी और मेरी थी ना, फिर उनके पास ये पेपर्स कैसे पहुंच गए?
दिव्या थोड़ा डर जाती है और अपने डर को काबू कर बोलती है: सर ये तो मुझे नहीं पता। लेकिन आप श्योर हैं की वो असली पेपर्स थे क्योंकि मुझे नहीं लगता उनके पास वो पेपर आ सकते हैं।
मदन: नहीं दिव्या जी, मैंने खुद उन बच्चों से वो पेपर्स जब्त किए हैं। मुझे लगा एक बार आपसे पूछ लूं, शायद आपको कुछ आइडिया हो।
दिव्या: जी नहीं, मुझे तो ये बात अभी आपसे ही पता चली है।
मदन: दिव्या जी, कंप्यूटर में कुछ फाइल्स हैं, उन्हें आप प्लीज़ चेक कर लीजिए एक बार।
दिव्या कंप्यूटर में फाइलें चेक करने लगती हैं, प्रिंसिपल उसको एक फोल्डर को ओपन करने को कहता है और वो फोल्डर खोलते ही उसके होश उड़ जाते हैं क्योंकि उस फोल्डर में विडियो फाइल है जिसे चलने पर स्क्रीन पर दिव्या खुद पेपर कॉपी करते हुए दिख रही थी।
दिव्या के माथे पर पसीना देख कर अब प्रिंसिपल अपनी सीट से उठकर दिव्या के बराबर वाली सीट पर बैठ जाता है। दिव्या को डरा सहमा देख प्रिंसिपल के हौसला काफी बढ़ चुका था। वह अपना हाथ दिव्या के कंधे पर रखता है तो दिव्या उठ कर खड़ी हो जाती है, लेकिन प्रिंसिपल थोड़ी कड़क आवाज में दिव्या को चेतावनी देता है।
मदन: मुझे लगता है, ये वीडियो मुझे पुलिस में दे देनी चाहिए।
पुलिस का नाम सुन कर दिव्या का डर और बढ़ जाता है, और उसके कदम मानो वहीं जम गए हो।
दिव्या: सर, मुझसे गलती हो गई, मुझे प्लीज माफ कर दीजिए।
मदन: आज बहुत गिड़गिड़ा रही हो। याद है इसी ऑफिस में तुमने मुझे चांटा मारा था और तुम सोच रही हो की मैं तुम्हें छोड़ूँ दूंगा? आज तो तुम हवालात की हवा खाओगी।
दिव्या: सर, मैं उस दिन गुस्से में आ गई थी। मैं शादीशुदा हूँ, आप भी जानते हो।
मदन: हम्म, शादीशुदा हो लेकिन सलमान के साथ मजे लेते हुए तुम्हें ये बात ध्यान नहीं रही थी ना।
दिव्या के पास इस समय कोई जवाब नहीं था, उसे समझ ही नहीं आता कि प्रिंसिपल को कैसे मनाये।
मदन: बोलो दिव्या, अगर मैं ये वीडियो पुलिस में दूं तो मेरा बदला भी पूरा हो जाएगा।
दिव्या: सर, प्लीज ऐसा मत कीजिए। मुझसे सलमान ने ये सब जबरदस्ती कराया था। मैं उसकी बातों में आ गई थी।
मदन: ओह कम ऑन, अब उसका नाम मत लो।
दिव्या: सर, मैं आपके आगे हाथ जोड़ती हूँ, दोबारा ऐसा कभी नहीं होगा।
प्रिंसिपल दिव्या की तरफ बढ़ता है और उसकी कमर को मसल कर अपना हाथ उसके पेट की तरफ बढ़ा देता है.
दिव्या के बदन में मानो करंट दौड़ जाता है। वो थोडा आगे हटने लगती है लेकिन मदन उसकी साडी का पल्लू पकड़ लेता है।
मदन: क्या हुआ दिव्या आज थप्पड़ नहीं मारोगी मुझे।
दिव्या: सर मैंने कहा तो, गुस्से में मेरा हाथ उठ गया था। मुझे प्लीज़ माफ़ कर दो। आप जो कहोगे मैं करूँगी। बस मेरे साथ ये सब मत कीजिए।
मदन: ओह, ठीक है। एक शर्त पर मैं तुम्हें छोड़ दूंगा।
दिव्या: आप जो कहें।
मदन: देखो वहां टेबल पर एक ड्रेस होगी, मैं तुम्हे उसमे देखना चाहता हूँ।
दिव्या सामने पड़े बॉक्स को खोलती है तो अन्दर एक छोटी से ब्लैक ड्रेस होती है। साथ ही ब्रा और पेंटी भी थे जो काफी छोटे और वल्गर से थे। दिव्या मदन से रिक्वेस्ट करती है की वो ये नहीं पहन पायेगी। ये सुनकर मदन गुस्सा हो जाता है और दिव्या की साड़ी का पल्लू पकड़ कर झटके से उसे खींच देता है।
दिव्या की साड़ी उसके बदन से अलग हो जाती है।
मदन: अगर तुम खुद नहीं पहनोगी तो मैं तुम्हे नंगा करके खुद ये पहनाऊंगा और चोरी के जुर्म में जेल भी भिजवाऊंगा।
दिव्या अपने बदन को अपने हाथों से ढकने की कोशिश करती है और प्रिंसिपल के आगे गिडगिडाने लगती है पर उसके ना मानने पर वो ड्रेस पहन कर दिखाने के लिए मान जाती है।
दिव्या ड्रेस हाथ में ले कर अटैच वॉशरूम में पहनने चली जाती है। दिव्या ड्रेस पहन तो लेती है पर उसे समझ नहीं आता कि वो उसे पहन कर बाहर कैसे आए। थोड़ी देर में मदन अपना आपा खोकर चिल्लाता है।
मदन: दिव्या बाहर निकल रही हो या मैं ही अन्दर आ जाऊं।
प्रिंसिपल के बाहर से चिल्लाने पर वो बाहर आती है, उसे देख कर प्रिंसिपल के होश उड़ जाते हैं।
दिव्या को इस तरह शर्म में डूबा देख प्रिंसिपल को और मजा आने लगता है। वो दिव्या को अपने पास बुलाता है और उसे खा जाने वाली नजरो से देखता है।
