मदन: वाह दिव्या, ये साला सलमान भी कितना खुशकिस्मत है जो उसने तुम्हारे इस मखमली बदन को अपने नीचे रौंदा है।
दिव्या: सर प्लीज मैंने आपके कहने पर ये कपडे पहन लिए है अब मुझे जाने दीजिये।
मदन: हाँ हाँ अब तुम मेरे कपडे उतार कर वापस दे दो और जाओ।
दिव्या चारो तरफ देखती है लेकिन उसे अपने कपडे कहीं नजर नहीं आते। वो प्रिंसिपल से अपने कपडे वापस मांगती है पर मदन उसकी बात का कोई जवाब नहीं देता और दिव्या के पास आकर उसे पीछे से पकड़ लेता है। दिव्या छूटने की कोशिश करती है लेकिन अपने को छुड़ा नहीं पाती। अब मदन दिव्या की गांड को दबाने लगता है।
दिव्या: सर मैंने आपकी बात मान ली है अब प्लीज मुझे जाने दो।
मदन: मेरे कपडे उतार कर दे दो और चली जाओ न।
दिव्या छूटने के लिए ज्यादा जोर लगाती है तो मदन उसे टेबल के ऊपर झुका देता है। वो अपना लंड दिव्या की गांड में प्रेस करके उसकी गांड में लंड रगड़ने लगता है।
दिव्या छूटने की काफी कोशिश करती है पर मदन पर इसका कोई असर नहीं होता। मदन अपना एक हाथ दिव्या की स्कर्ट की तरफ ले जाता है जिससे दिव्या समझ जाती है की क्या होने वाला है। वो बहुत झटपटाती है लेकिन अपनी स्कर्ट को नीचे होने से रोक नहीं पाती।
दिव्या काफी चिल्लाती है लेकिन मदन के सामने उसकी एक नहीं चलती। प्रिंसिपल अब दिव्या की नंगी गांड पर थप्पड़ मारना शुरू करता है जिससे उसकी पूरी गांड एकदम लाल हो जाती है।
अब प्रिंसिपल से रहा नहीं जाता और वो अपना लंड बाहर निकाल कर दिव्या की चूत पर रगड़ने लगता है। दिव्या अपने को छुड़ाने की आखिरी कोशिश करते हुए आगे बढती है लेकिन उसके भागने की कोशिश देखकर मदन उसे बेदर्दी से वापस खींच लेता है और दिव्या अब विरोध की हिम्मत खो देती है।
मदन अब अपना लंड दिव्या की चूत के मुहाने पर रगड़ते हुए दबाव बढ़ाने लगता है। दिव्या की चूत सूखी होने की वजह से लंड आराम से अन्दर नहीं जाता लेकिन मदन एक जोर का धक्का लगाकर अपना लंड दिव्या की चूत में पैवस्त कर देता है।
दिव्या की चीख निकल जाती है। वो भूल जाती है की स्कूल में सलमान भी है। प्रिंसिपल अब बेपरवाह हो कर दिव्या की चुदाई शुरू कर देता है। कुछ ही पलों में न चाहते हुए भी दिव्या की चूत गीली होने लगती है जिससे प्रिंसिपल का लंड आराम से अन्दर बाहर होने लगता है।
मदन दिव्या के कानों के नजदीक आकर कहता है: आज तुझे पता चलेगा की मुझ पर हाथ उठाने का क्या अंजाम होता है। आज तेरा वो हाल करूंगा की किसी पर हाथ उठाने से पहले हजार बार सोचेगी।
दिव्या को इस समय प्रिंसिपल का लंड अन्दर जाने से ज्यादा दर्द बेदर्दी से रगड़े जाने से हो रहा था। दिव्या मदन के हाथों में एक खिलौने की तरह जबरदस्त चुद रही थी। कुछ देर ऐसे ही रगड़े जाने के बाद दिव्या भी गरम होने लगती है लेकिन वो अपनी फीलिंग छुपाने की कोशिश करती है। प्रिंसिपल उसको एक झटके में उठा कर पलट देता है और उसकी ड्रेस को ऊपर की तरफ खींच कर उतार देता है।
प्रिंसिपल का लंड अभी भी दिव्या की चूत में ही था। जल्द ही वो दिव्या के बदन से ब्रा भी नोच लेता है और उसे पूरी नंगी करके उसकी जबरदस्त चुदाई शुरू कर देता है।
दिव्या की चूत अब पूरी गीली हो चुकी है और अब वो कोई विरोध भी नहीं कर रही थी लेकिन फिर भी मदन जैसे उससे बदला लेने पर तुला था। वो दिव्या को फ़ोर्स करता है की वो अपनी चूत में लंड अंदर बाहर होते हुए देखे। दिव्या को भी यकीन नहीं होता की सलमान ने उसकी नाजुक चूत का ऐसा हाल कर दिया है की ऐसे हलब्बी लंड लेने पर भी मजे से उसी सिस्कारिया निकल रही है।
मदन दिव्या को अलग अलग पोज़ में चोदना चालू रखता है। उसे कोई परवाह नहीं थी की दिव्या का क्या हाल है।
लेकिन दिव्या तो पूरी तरह समर्पण कर चुकी थी और उसकी आवाज में दर्द की जगह हवस थी। दिव्या को मजे लेते देख मदन उसे नीचा दिखाने की सोचता है। वो किसी भी तरह से दिव्या के लिए कोई सुखद एहसास नहीं छोड़ना चाहता था।
मदन: मजा आ रहा है न दिव्या.
दिव्या कुछ नहीं बोलती बस आहें भरती रहती है।
मदन: सही कहा था सलमान ने तेरे बारे में की तू ऊपर से चाहे कितना मना करें लेकिन लंड लेते ही तेरे अन्दर की रांड एकदम बाहर आ जाएगी। सच में एक नंबर की रंडी है तू।
दिव्या: अह्ह्ह अह्ह्ह इसका आआआ मतलब आपने और सल्मंन्न्नन्न न्न्न्नन्न नीई मुझे आआआअ जान बूझकरउफफ्फ्फ्फ़ फसायाआआआह्ह्ह उसीईइ।
मदन: हाँ रांड हाँ। और अब तेरा मुंह बंद करने की बारी है।
प्रिंसिपल दिव्या की चूत से लंड बाहर निकाल कर उसे टेबल पर लिटा देता है और अपना लंड उसके मुंह में डालने लगता है। उसका लंड पूरी तरह दिव्या की चूत की चाशनी में सराबोर था तो दिव्या अपना मुंह घुमा लेती है। मदन गुस्से में अपना हाथ दिव्या की चूत में घुसेड़ने लगता है तो दर्द से चीख पड़ती है। जैसे ही दिव्या चीखने के लिए मुंह खोलती है मदन अपना लंड दिव्या के मुंह में पेल देता है और दिव्या का मुंह चोदने लगता है।
प्रिसिपल दिव्या के हलक तक अपना लंड उतार देता है। दिव्या कुछ बोलने की कोशिश करती है लेकिन आवाज उसके गले में ही घुट कर रह जाती है तो दिव्या हाथ जोड़ कर रहम की भीख मांगने लगती है। मदन अपना लंड दिव्या के मुंह से निकाल लेता है।
दिव्या: सर मुझसे गलती हो गयी थी। प्लीज अब आपने सब कुछ कर लिया अब मुझे जाने दो।
मदन: इतने टाइम बाद तो हाथ आई हो जानेमन अब इतनी जल्दी कैसे जाने दूं। अभी तो तुझे जी भर कर चोदुंगा।
दिव्या: सर मेरे हसबैंड मेरा वेट कर रहे होंगे।
मदन: अब तक कोई फोन वोन तो किया नहीं उसने और तुझे आये अभी टाइम ही कितना हुआ है। शाम तक छोड़ दूंगा तुझे।
दिव्या: सर मेरी हालत तो देखिये। मैं अपने पति को क्या जवाब दूँगी।
मदन: अरे नहा लेगी तो ठीक हो जाएगी और जो एक दो निशान हैं तो उससे पूरे कपडे उतार कर मत चुदवाना एक दो दिन। तब तक निशान चले जायेंगे।
दिव्या: सर प्लीज।
मदन: एक शर्त पर जल्दी छोड़ दूंगा।
दिव्या: मैं आपकी सब शर्ते मानने को तैयार हूँ।
मदन: तो ठीक है। अब तू ऊपर आजा और ऊपर बैठ कर चुदवा।
दिव्या: सर मैं अभी इस हालत में नहीं हूँ।
मदन: नखरे करेगी तो पूरी रात यहीं चुदेगी तू।
प्रिंसिपल जमीन पर लेट जाता है और दिव्या की गांड पर हाथ रख कर उसे ऊपर आने का इशारा करता है। दिव्या के पास कोई चारा नहीं था तो वो मदन के खड़े लंड पर बैठ जाती है। अब लंड लेने में दिव्या को कोई दिक्कत नहीं होती। उसकी चूत काफी गीली तो थी ही और अब मदन के लंड के हिसाब से एडजस्ट भी हो गयी थी। दिव्या मदन के लंड पर ऊपर नीचे होना शुरू कर देती है।
दिव्या का शरीर काफी थक चूका था लेकिन वो जल्दी से जल्दी प्रिंसिपल को झाड कर ये खेल ख़तम करना चाहती थी। मदन भी अब झड जाना चाहता था तो वो भी अब नीचे से तेज़ झटके मारना शुरू कर देता है।
दिव्या प्रिसिपल के घुटनों का सहारा लेकर खुद को संभालती है। उसे इस भयानक चुदाई से अपनी आग शांत होती दिखती है।
मदन: बस रंडी कुछ देर और फिर तेरी चूत को अपने माल से भर दूंगा।
दिव्या: सर प्लीज आपने कंडोम भी नहीं लगाया है।
मदन: अब कंडोम की याद आई तुझे। अब मैं रुक नहीं सकता। वैसे भी शादी को इतना टाइम हो गया है तो अब तेरे पति से तो बच्चा न हो पायेगा तो हमारा ही बीज डलवा ले पेट में।
गर्भ निरोधक गोलिया खा खा कर दिव्या परेशान हो चुकी थी। उसको उन गोलियों से एलर्जी भी हो जाती थी तो दिव्या प्रिसिपल के आगे गिडगिडाने लगती है की वो चूत में न झाडे।
मदन: तो तू ही बोल की चूत में नहीं तो कहाँ झाडू।
दिव्या को समझ नहीं आता की वो क्या बोले लेकिन मदन के दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था। वो ऊपर टेबल पर बैठ जाता है और दिव्या को अपने पास आने का इशारा करता है। दिव्या समझ जाती है की मदन क्या चाहता है। वो एक कुतिया की तरह चलते हुए मदन के पास जाती है तो मदन अपनी टाँगे खोल कर उसे बीच में आने को कहता है। दिव्या अपनी सांसो को रोककर मदन का लंड मुंह में ले लेती है और उसे चूसना शुरू करती है।
दिव्या को इस तरह अपना लंड चूसते हुए देख कर प्रिंसिपल को विश्वास हो जाता है की उसे एक नयी रांड मिल गयी है।
मदन: और अन्दर तक ले कर चूस।
दिव्या कोशिश करती है लेकिन अपने आप गले के अन्दर लंड लेना उसके बस की बात नहीं थी। प्रिंसिपल से रहा नहीं जाता तो वो टेबल से खड़ा हो जाता है और अपना लंड जबरदस्ती दिव्या के हलक में उतार देता है। दिव्या घबरा कर मुंह पीछे करने लगती है।
मदन: अगर एक बूँद भी नीचे गिरी तो जमीन से चटवाऊँगा तुझसे समझी।
दिव्या हार कर फिर से मुंह को आगे करके मदन का लंड हलक में ले लेती है।
इस तरह लंड लेने से दिव्या की आँखों से आंसू बहने लगते हैं लेकिन प्रिंसिपल कुछ ही पलों में झड़ने वाला था तो वो रुकने का नाम नहीं लेता और आखिरकार कुछ देर में वो अपना सारा माल दिव्या के गले में उतार देता है। अब दिव्या और मदन दोनों ही काफी थक चुके थे। दिव्या थोड़ी देर में अपने को संभालती है और फिर अपने कपडे पहनने के लिए उठती है लेकिन उसे अपनी साड़ी नहीं दिखाई देती
दिव्या: सर मेरी साड़ी ब्लाउज कहाँ है। यहाँ दिख नहीं रहे।
मदन: अरे तुम्हारे कपडे है तो तुमको पता होगा। मैं क्या जानू कहाँ हैं।
दिव्या: सर प्लीज ऐसा मत कीजिये। मैंने आपकी सारी बातें मान ली। मेरे कपडे दे दीजिये वरना मैं घर कैसे जाउंगी।
मदन: अरे मुझे सच में नहीं पता। अच्छा देखता हूँ शायद सलमान को पता हो।
ये बोलकर मदन बेल बजाता है और फ़ौरन कमरे में सलमान आ जाता है। दिव्या सर झुकाए पूरी नंगी एक कोने में खड़ी थी और उसके जिस्म पर जगह जगह काटने के लाल निशान पड़ गए थे। सलमान दिव्या को इस हालत में देख कर लार टपकाने लगता है।
सलमान: सर आपने बुलाया?
मदन: हाँ, इससे मिलो। ये दिव्या है, मेरी नयी रांड। इसके कपडे यहाँ से गायब हो गए हैं। तुमने तो नहीं लिए?
सलमान: सर मुझे तो नहीं पता।
मदन: अरे दे दो सलमान। आज इसने बहुत मेहनत की है। इसका तो इनाम देना ही है और वैसे भी अब ये नंगी घर थोड़ी जाएगी।
दिव्या: सर ऐसे ही कपडे दे दूं क्या? कितने दिन हो गए इसकी लिए हुए।
मदन: अरे ये बात है। ये कौन सा मना कर रही है तुमको देने से। जल्दी से इसे छोड़ लो और इसके कपडे दे दो। वैसे भी मैंने माल इसके मुंह में भरा था तो इसकी चूत तो प्यासी ही रह गयी होगी।
दिव्या प्रिसिपल और सलमान की बात सुन कर हैरान थी। कैसे दोनों उसे मुफ्त का चन्दन समझ कर घिसे जा रहे थे। और प्रिसिपल ने तो उसको अपनी प्राइवेट प्रॉपर्टी की तरह सलमान के हवाले कर दिया। वो कुछ बोलती इससे पहले सलमान अपने कपडे उतारने लगता है। दिव्या घबरा कर फिर से मदन के पास जाकर सलमान को रोकने और कपडे देने के लिए गिडगिडाने लगती है। उसे एहसास ही नहीं होता की सलमान उसके पीछे आ चुका है। सलमान दिव्या को पीछे से पकड़ कर उसके बदन से खेलना शुरू कर देता है।
मदन: वैसे तो मैं अपना माल किसी के साथ नहीं बाटता लेकिन तू स्पेशल केस है इसीलिए सलमान भी तुझे चोदेगा और ये जितनी जल्दी झड़ेगा उतनी जल्दी तुझे तेरे कपडे वापस मिलेंगे।
दिव्या को फ़साने से सलमान पहले ही काफी उत्तेजित था। वो ज्यादा देर किये बिना दिव्या को आगे की तरफ झुका देता है और अपना लंड पीछे से उसकी चूत में डाल देता है और दिव्या की चुदाई फिर से शुरू हो जाती है।
सलमान: चिंता न करो मैडम, आज आपको बिना झाडे नहीं जाने दूंगा।
दिव्या अपनी चूत की प्यास बुझता देख सलमान का विरोध नहीं करती, वह अपनी हवस दबाने की काफी कोशिश करती है पर सलमान के चोदने से रह रह कर आहे भरने लगती है। जब भी सलमान की स्पीड कम होती तो दिव्या अपनी गांड पीछे की और ले जाकर उसके लंड को अंदर लेने की कोशिश करती, ये बात सलमान भी महसूस करता है। सलमान कुछ पल के लिए दिव्या की चुदाई रोक कर प्रिंसिपल की ओर देखता है और उसे इशारा कर दिव्या को अपने लंड पर झटके मारते हुए दिखाता है।
दिव्या ये बात भूल चुकी थी कि इस कमरे में प्रिंसिपल भी है पर प्रिंसिपल के लिए दिव्या को इग्नोर करना आसान नहीं था। प्रिंसिपल को अपने लंड में एक बार फिर तनाव फील होने लगा था। वह भी खड़ा होकर दिव्या के मुँह के पास पहुँच जाता है और अपना लंड उसके मुँह पर रगड़ने लगता है। दिव्या के मुँह ना खोलने पर सलमान अपनी स्पीड कम कर लेता है तो दिव्या समझ जाती है कि उसने ऐसा क्यों किया। दिव्या अपना मुँह खोल कर प्रिंसिपल का लंड एक बार फिर चूसना शुरू कर देती है और सलमान भी उसकी जबरदस्त चुदाई शुरू कर देता है।
कुछ देर में सलमान की बढ़ती स्पीड देख, वो समझ जाती है कि सलमान अब झड़ने वाला है पर वो उसे मना भी नहीं कर पाती क्योंकि प्रिंसिपल उसे कुछ बोलने का मौका ही नहीं देता। उसकी आवाज़ उसके मुँह में ही दबी रह जाती है और सलमान अपना लंड उसकी चूत में ही झाड़ देता है। सलमान तो झड़ने के बाद अपना लंड निकाल कर पीछे हट जाता है पर अभी भी दिव्या प्रिंसिपल का लंड चूसना चालू रखती है।
मदन: दिव्या, आज तुम्हें इस चीज़ का इनाम ज़रूर मिलेगा।
प्रिंसिपल अपना लंड दिव्या के मुंह से निकाल कर नीचे लेट जाता है और दिव्या को अपने ऊपर खीचने लगता है। दिव्या तो खुद उसके ऊपर आने लगती है पर प्रिंसिपल का लंड अपनी चूत में लेने में थोड़ा समय लेती है।
प्रिंसिपल अपना लंड दिव्या की चूत पर टिकाता है पर अंदर नहीं डालता और दिव्या की आंखों में देखने की कोशिश करता है पर दिव्या नज़रें चुराते हुए अपनी चूत नीचे ले जाती है और उसका लंड अपनी चूत में लेकर प्रिंसिपल को चोदना शुरू कर देती है। प्रिंसिपल भी दिव्या की गांड को मसलते हुए उसे सपोर्ट करने लगता है।
दिव्या की स्पीड अब काफी तेज हो चुकी थी।
मदन: आह दिव्या, बस रुकना मत अब। कितना तरसाया है तुमने इस दिन के लिए।
कुछ ही पलों में दिव्या झड़ना शुरू हो जाती है पर झड़ते हुए वो प्रिंसिपल के लंड को अपनी चूत के अंदर तक ले कर उसे मसलने लगती है जिससे उसका लंड भी झड़ने लगता है। प्रिंसिपल इतना थक चुका था कि अब वो उठने की हिम्मत भी नहीं करता, वो सलमान को अब दिव्या के कपडे वापस देने के लिए कह देता है। लेकिन सलमान भी पक्का हरामी था, वो दिव्या का मुंह चोदे बिना कैसे रह सकता था। वो भी दिव्या के जाने से पहले उसके मुंह में अपना लंड डाल कर उसे चोदना शुरू कर देता है।
सलमान का लंड झड़ने में काफी समय लेता है, जब सलमान दिव्या के मुंह से अपना लंड बाहर निकलता है तो दिव्या की हालत काफी खराब हो चुकी थी, उसका बदन जगह जगह से वीर्य से सना हुआ था, शरीर पर रगड़ने और मसलने के काफी निशान बन चुके थे।
जैसे तैसे दिव्या अपने आप को संभालती है और अपने कपडे लेने के बाद उन्हें पहनने लगती है। अब दिव्या मदन और सलमान के सामने ही कपडे पहनना शुरू कर देती है क्योंकि अब छुपाने को कुछ राह नहीं था। कपडे पहन दिव्या अपने घर की तरफ निकल पड़ती है।
दिव्या घर पहुँचती है तो वो ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करती है क्योंकि राजेश अभी भी घर नहीं पहुँचा था। आज जो भी हुआ उससे दिव्या को अफ़सोस तो बहुत था लेकिन प्रिंसिपल के पास उसका पेपर चुराते हुए विडियो था तो वो कुछ कर भी नहीं सकती थी वरना वो खुद फंस सकती थी। दिव्या सीधा वॉशरूम में जा कर नहाने लगती है और अपनी हालत थोड़ी सुधारने की कोशिश करती है।
दिव्या डर रही थी कि कहीं राजेश को उसकी हालत देख शक न हो जाए। कुछ देर बाद दिव्या तैयार हो जाती है और घर के काम निपटाने लगती है। दिव्या गुस्से में तो थी कि कैसे कोई उसकी इज़्ज़त से इस तरह से खेल सकता है पर एक सवाल उसके मन में आते ही उसका गुस्सा कम होने लगता है। दिव्या सोचने लगती है कि आज जितना ग़लत बर्ताव उसके साथ हुआ है उसके बावजूद आख़िर उसकी चूत किस तरह झड रही थी। आखिर क्यों वो सब कुछ भूल के खुद भी अपने शरीर को चुदवाने लगी थी।
दिव्या ये सब सोच ही रही थी कि उसे फिर से अपनी चूत में हलचल महसूस होने लगती है। दिव्या सोच रही है कि किस तरह से दो-दो लोगों ने मिलकर आज उसके बदन के एक-एक कोने को मसलकर रख दिया है। दिव्या इस सब में डूबी ही थी कि डोर बेल की आवाज से वो अपने खयालों से बाहर आ जाती है।
राजेश आ चुका था, आते ही वह दिव्या को अपनी बाहों में भर लेता है, दिव्या राजेश को फ़्रेश होने के लिए कह देती है और डिनर लगाने के लिए चली जाती है, दोनों साथ में खाना खाते हैं पर दिव्या के फेस पर मायूसी देख राजेश कई बार उसकी प्रॉब्लम जानना चाहता है पर वह कुछ नहीं बता पाती।
राजेश आज कर्नल के पास न जाने की सोच दिव्या के बिस्तर पर आने की वेट करता है, कुछ देर में काम खत्म होते ही दिव्या भी आ जाती है और सोने के लिए बेड पर लेट जाती है, राजेश से रहा नहीं जाता, वह दिव्या को हग करने लगता है पर दिव्या उसे सर दर्द का बहाना कर मना करने लगती है। दरसल उसे डर है कि कहीं राजेश को उसकी हालत देख शक न हो जाए। राजेश को बुरा तो बहुत लगता है पर वह ज्यादा कुछ कह नहीं पाता।
राजेश दिव्या को एनिवर्सरी तक बिलकुल नाराज नहीं करना चाहता था। राजेश कुछ समय में सो जाता है पर दिव्या की आँखों में नींद नहीं थी, वह फिर से उन्हीं खयालों में खो जाती है जो कैसे आज प्रिंसिपल और सलमान ने उसकी ली है और कैसे वह उनके लंड लेने के लिए मचलने लगी थी। किस तरह वह दोनों बेशर्मी से उसके जिस्म के साथ खेल रहे थे।
यहाँ दिव्या को नींद नहीं आ रही थी, वहीं दूसरी और मनीष भी उसकी याद में सो नहीं पा रहा था, उसे उम्मीद थी कि अब दिव्या रोज उससे बात करने का कोई न कोई बहाना ढूंढ ही लेगी पर काफी रात बीत जाने के बाद भी वह ऑनलाइन नहीं आती और मनीष के कदम अपनी बहन रूचि के कमरे की और बढ़ जाते हैं।
वह अपने आप को काफी कंट्रोल करता है पर अपनी बहन को छूए बिना रहना अब उसके लिए मुश्किल था, रूचि के पास पहुँचते ही वह सोचने लगता है कि क्या दिव्या मैम का शक सही तो नहीं है, क्या रूचि मेरे छूने से उठ तो नहीं गई थी।
डरते डरते वह रूचि के पास पहुँच कर उसके बदन को कपड़ों के ऊपर से छूना स्टार्ट करता है।
कमरे में अंधेरा होने की वजह से मनीष को ज्यादा अंदाज़ा नहीं हो पा रहा था कि रूचि जागी है या सोई है, लेकिन तभी रूचि की एक हल्की सी आह से वह घबरा जाता है और वहीं अपने हाथों को रोक लेता है।
रूचि सीधी होकर लेट जाती है, इस बार मनीष उसे छूने से पहले कुछ देर वेट करता है। मनीष रूचि की टीशर्ट को ऊपर को उठाकर उसके मम्मों तक ले जाता है, रूचि की निप्पल एकदम टाइट थी जिसे देख उसे और डाउट होने लगता है।
वो रूचि के दोनों मम्मों पर हाथ फेरने लगता है पर उसकी हिम्मत नहीं होती कि ज्यादा आगे बढ़ सके। वो ऐसे ही बार बार रूचि की चून्चियों को छूता है और अपना लंड बाहर निकाल कर हिलाने लगता है। कुछ देर में जब उसका लंड झड़ने के करीब होता है तो वो रुकने की कोशिश करता है पर अपने आपको रोक नहीं पाता और रूचि के चेहरे पर ही झड जाता है।
रूचि कुछ नहीं बोलती लेकिन मनीष समझ जाता है की उसकी बहन जाग रही है लेकिन झड़ने से मनीष की हवस शांत हो गयी थी तो वो अपनी बहन के रूम से बाहर आ जाता है। हवस शांत होने के बाद उसे दिव्या पर ऑनलाइन न आने पर थोड़ा गुस्सा भी आता है पर वो अपने आप को तसल्ली देता है कि शायद राजेश अभी सोया ही न हो, या कोई और वजह होगी।
अगले दिन राजेश उठता है तो उसका मूड काफी उखड़ा हुआ था, वह सुबह जल्दी उठकर मॉर्निंग वॉक के लिए निकल जाता है। वहाँ कर्नल भी उस समय पार्क में ही था, राजेश उसे अवॉयड करने की कोशिश करता है लेकिन वो राजेश के पास आ जाता है।
लाला: हेल्लो राजेश।
राजेश: हेलो अंकल।
लाला: क्या बात है आज सुबह-सुबह तुम कैसे वॉक पर आ गए।
राजेश: कुछ नहीं अंकल बस नींद जल्दी खुल गयी।
लाला: नींद क्यों खुल गयी भाई, तुम्हें तो रात में काफी थकान महसूस हुई होगी, दिव्या जैसी वाइफ जो है तुम्हारे पास मेहनत करने के लिए। (हँसते हुए)
राजेश: क्या अंकल आप भी, ऐसा कुछ नहीं है।
लाला: भगवान भी बड़े अजीब हैं, उसे देते हैं जिसे कोई कद्र न हो।
राजेश: ऐसा कुछ नहीं है अंकल, कल दिव्या की तबीयत थोड़ी ठीक नहीं थी।
लाला: तुम कहो तो रेणुका को भेज दूं तुम्हारे पास। (फिर हँसते हुए) कल तो तुम्हारी एनिवर्सरी है न तो अपना वादा तो नहीं भूले न।
राजेश कर्नल की बात सुनकर परेशान हो जात है और कुछ जवाब नहीं देता तो कर्नल फिर से पूछता है।
लाला: कुछ परेशान लग रहे हो? मुझे बताओ क्या सोच रहे हो?
राजेश: अरे ऐसी कोई बात नहीं है बस सोच रहा था दिव्या को एनिवर्सरी में क्या गिफ्ट दूं कल।
लाला: इसमें क्या है, कोई भी अच्छी सी ड्रेस या कोई गोल्ड आइटम।
राजेश: नहीं अंकल ये सब तो बहुत है उसके पास।
लाला: चलो काफी देर हो गई वाक पर मुझे, मेरे रूम पर चलते हैं वही बात करेंगे। वैसे भी वहाँ रेणुका भी है, एक औरत से अच्छा कौन राय दे सकता है इसके लिए।
राजेश: ठीक है अंकल।
दोनों कर्नल के फ्लैट पर पहुँच जाते हैं, रेणुका उनके लिए चाय बनाकर लाती है तो कर्नल उसे वहीं अपनी गोद में बैठा लेता है और उससे दिव्या के लिए गिफ्ट पूछता है।
