राजेश कमरे में जाते ही कमरे को बंद कर देता है पर उसे दिव्या कहीं दिखती नहीं, वो दिव्या को आवाज देता है तो दिव्या वॉशरूम से निकलकर उसके सामने उसकी दी हुई नाइटी में आ जाती है।
दिव्या नाइटी में बेहद हॉट लग रही थी। उसे देखते ही राजेश खुद को रोक नहीं पाता और सीधा अपने होंठ उसके होंठों की तरफ बढ़ा देता है। जितना प्यासा आज राजेश था शायद उतनी ही दिव्या भी थी।
दिव्या झट से उसके लबों को चूमना शुरू कर देती है और राजेश किस करते हुए दिव्या को बेड की तरफ ले जाने लगता है, जल्द ही दिव्या बेड पर बैठ जाती है और राजेश के बदन से चिपकने लगती है। वो इस समय जल्द से जल्द राजेश का लंड अपनी चूत में उतार लेना चाहती थी।
दिव्या अपना हाथ राजेश की जांघों में डालने लगती है तो राजेश न चाहते हुए भी उसका हाथ रोकने की कोशिश करता है, उसे डर था कि कहीं उसका लंड इस समय छेड़ने से ही झड़ न जाए। और वैसे भी वह जल्दी से जल्दी कर्नल को किया वादा पूरा कर दिव्या के साथ फ्री होकर चुदाई करना चाहता था।
राजेश अंदर ही अंदर डर रहा था कि कैसे ये सब हो पाएगा। कहीं दिव्या को पता न चल जाए। इसी डर के बीच, राजेश दिव्या को खड़ा कर दिव्या के होंठों को चूमता हुआ उसे अचानक टर्न करके उसकी आँखों पर पहले एक काला कपड़ा बांध उसे ब्लाइंड फोल्ड करता है, फिर उसके हाथों को हैंडकफ से बाँधने लगता है।
दिव्या के लिए ये सब नया था, पहले कभी राजेश ने ऐसा नहीं किया था पर इससे दिव्या को एक थ्रिल का अहसास फील होता है।
दिव्या: क्या कर रहे हो राजेश।
राजेश: तुम्हे पसंद नहीं आया।
दिव्या: नहीं ऐसा नहीं है।
राजेश: तो जो हो रहा है उसे होने दो आज।
राजेश के लिए अब रुक पाना बेहद मुश्किल हो रहा था पर कैसे भी वह अपने मन को मनाता है, और कर्नल को मिस्ड कॉल करता है, कर्नल भी झट से राजेश को कॉल करता है और उसे बोलता है कि दिव्या को कहो कि किसी फ्रेंड की कॉल आ रही है लेकिन नेटवर्क इशू है तो 2 मिनट में आता हूँ मैं।
राजेश भी ऐसा ही करता है, दिव्या उसे जाने नहीं देना चाहती थी, पर 2 मिनट वेट करना इतना भी मुश्किल नहीं था। राजेश दिव्या को बेड पर छोड़ बाहर आ जाता है जहां कर्नल पहले ही उसका इंतज़ार कर रहा था।
राजेश: लो अंकल मैं अपना वादा निभा रहा हूं, लेकिन कैसे भी दिव्या को शक नहीं होना चाहिए बस।
लाला: तुम बेफिक्र रहो राजेश, मैंने भी वादा किया है तुमसे, बस एक बार दिव्या का नंगा बदन देख लूं।
राजेश: जल्दी आना लेकिन।
लाला: हाँ हाँ बिल्कुल, तुम बस एक पेग एन्जॉय करो, रेणुका सामने वाले रूम में तुम्हारा इंतज़ार कर रही है।
राजेश दूसरे कमरे की तरफ चला जाता है, जिसमें जाते ही उसे कर्नल की लक्जरी का एहसास होता है, कमरे में एक काफी बड़ी स्क्रीन थी जो शायद कर्नल के मूवीज़ देखने के लिए लगवाई हुई थी, एक मिनी बार और किसी 5 स्टार होटल की तरह सजा कमरा।
राजेश रूम में घुसता है तो रेणुका उसे ड्रिंक ऑफर करती है, और चेयर पर बैठने को कहती है, लेकिन राजेश ड्रिंक लेकर पी लेता है और रेणुका को अपनी बाहों में जकड़ लेता है, रेणुका भी राजेश के लबों को चूमते हुए उसे चेयर पर बैठा देती है। चेयर पर बैठते ही राजेश को एक तेज़ चक्कर आता है और वो बेहोश हो जाता है।
रेणुका फटाफट राजेश के हाथ पैर चेयर से बाँध देती है क्योंकि जो दावा उसने ड्रिंक के साथ दी थी उसका असर सिर्फ पांच मिनट में ही ख़तम हो जाता है। राजेश को जब होश आता है तो वो कुछ समझ नहीं पाता की उसके हाथ पैर कैसे बंध गए हैं, वह रेणुका की तरफ सवालों भरी नज़रों से देखता है, रेणुका अपना मुँह दूसरी ओर फेर लेती है जैसे वह खुद भी ऐसा नहीं करना चाहती हो। राजेश उससे सवाल पूछता रहता है। रेणुका बिना कोई जवाब दिए, स्क्रीन को ऑन कर देती है।
स्क्रीन ऑन होते ही राजेश के कदमों के नीचे से जमीन खिसक जाती है। क्योंकि स्क्रीन पर और कोई नहीं बल्कि दिव्या बेड पर ब्लाइंडफ़ोल्ड पड़ी हुई दिख रही थी। इसका मतलब है की कर्नल सुबह से दिव्या और राजेश पर नज़र बनाए हुए था।
कर्नल को दिव्या के नजदीक खड़ा देख राजेश इतना तो समझ चुका था कि जरूर कुछ गड़बड़ है, नहीं तो भला उसके हाथ बांधने का क्या मकसद हो सकता है। कर्नल दिव्या की और बढ़ने लगा था जिसे देख राजेश की छटपटाहट काफी बढ़ गई थी। वो रह रह कर रेणुका से अपने आप को छोड़ने के लिए कह रहा था पर रेणुका तो बुत बनी बैठी थी।
वही अपने सपने के इतना करीब आने पर कर्नल भी काफी उत्तेजित था। वो पहले कुछ देर बेड पर पड़ी दिव्या को निहारता रहता है, दिव्या की नाईटी पहले ही उसकी जाँघों के ऊपर चढ़ी हुई थी, जिससे उसकी पेंटी के दर्शन कर्नल को हो रहे थे, दिव्या की चूत गीली होने से उसकी पेंटी पर हल्का निशान आ गया था जिसे देखकर कर्नल के चेहरे पर ख़ुशी छा जाती है। वो अब दिव्या के पास बेड पर बैठ जाता है तो दिव्या को उसके होने का अहसास होते ही वो बोल पड़ती है।
दिव्या: क्या हुआ राजेश, इतनी देर कैसे लगा दी?
कर्नल कुछ नहीं कहता, बस दिव्या के होंठों पर उंगली रख उसे चुप होने का इशारा देता है और उसके बराबर में लेट कर उसकी ड्रेस को उसके पेट से ऊपर की और सरका कर उसके पेट पर हाथ फेरने लगता है।
दिव्या थोड़ी गहरी साँस लेती है और फिर से उससे पूछती है कि किसका फोन आया था पर कर्नल बिना जवाब दिए साथ लाए एक बर्फ के टुकड़े को उसकी पेंटी लाइन पर फेरने लगता है।
दिव्या: श्श्श, राजेश ये क्या कर रहे हो आज तुम मेरे साथ।
दिव्या को ऐसा अहसास इससे पहले कभी नहीं हुआ था। कुछ पलों में दिव्या की पेंटी बर्फ के ठंडे पानी से भीग चुकी थी। दिव्या के मचलते शरीर को देख कर्नल अब आगे बढ़ना चाहता था, वह अपना हाथ धीरे-धीरे दिव्या की पेंटी में सरका देता है। दिव्या की चिकनी चूत अपने हाथ में आते ही कर्नल उसे सहलाये बिना रह नहीं पाता।
दिव्या भी अब रह नहीं पा रही थी, कर्नल की मोटी सख्त उंगली अन्दर बाहर होने से दिव्या की चूत चिपचिपा पानी कर्नल की उंगलियों पर छोड़ने लगती है। कर्नल भी समझ चुका था कि दिव्या अब अपने कंट्रोल में नहीं है पर वो उसे अभी और तड़पाना चाहता था।
कर्नल दिव्या की ड्रेस को नीचे कर उसके एक मम्मे को बाहर निकाल चूसना शुरू कर देता है। जहाँ एक ओर वो अपनी उंगली से दिव्या की चूत को सहला रहा था वहीं दूसरी तरफ उसके मम्मे चूस कर उसे मदहोश कर चुका था। दिव्या भी हवस में इतनी डूब चुकी थी कि उसे अहसास ही नहीं होता कि राजेश की जगह कर्नल उसकी चूत से खेल रहा है।
राजेश की तड़प ये सब देख काफी बढ़ चुकी थी पर धीरे-धीरे उसका चीखना अब कम होने लगा था। वो बस इस उम्मीद में बैठा था कि शायद दिव्या को पता चल जाए और वो कर्नल को रोक दे।
जल्द ही कर्नल दिव्या के दोनों मम्मे नंगे करके उसके ऊपर आ चुका था, वो लगातार दिव्या की चूत में उंगली डाल कर उसकी चूंची को अपनी जीभ से सहला रहा था। जितनी देर से वो दिव्या के बदन से खेल रहा था उतनी देर में तो राजेश और दिव्या का सेक्स खत्म हो चुका होता, राजेश अब शांत बैठ कर दिव्या और कर्नल को देखे जा रहा था, दिव्या भी कर्नल के बदन के नीचे बस सिसकिया भर रही थी, कर्नल दिव्या के निप्पल को अचानक अपने होठों में दबा कर खींचता है तो वो तड़प उठती है।
दिव्या: ओहो राजेश, फ़क मी नाउ।
दिव्या के मुंह से ये सुन कर्नल अब नीचे की तरफ बढ़ जाता है। दिव्या जानती थी कि राजेश कभी उसकी चूत नहीं चाटता पर कर्नल के नीचे की ओर बढ़ते ही उसके शरीर में फुलझरी सी छूटने लगती है। कर्नल की सांसें उसे अपनी चूत पर महसूस होने लगती हैं। दिव्या के पानी से भीगी पेंटी उसकी चिकनी चूत पर से पहले ही साइड हो चुकी थी और कर्नल कुछ देर दिव्या की चूत को निहारने के बाद उसे अपनी जीभ से सहलाने लगता है।
दिव्या से अब रहा नहीं जाता, वह अपनी टांगे पूरी तरह खोल देती है, वह अब झड़ जाना चाहती थी पर अचानक कर्नल रुक जाता है तो वह तड़पने लगती है।
दिव्या: ओह राजेश प्लीज़ डोंट स्टॉप, प्लीज़ फ़क मी नाउ।
कर्नल के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है, वह अपने दांतों में फँसा कर दिव्या की पेंटी उसके बदन से अलग कर देता है, उसके बाद उसके शरीर से बाकी बचे कपडे भी अलग कर देता है क्योंकि अब उनका कोई भी यूज़ नहीं बचा था, कुछ देर कर्नल दिव्या के बदन को निहारता रहता है पर ज्यादा देर वह खुद को रोक नहीं पाता।
कर्नल अब उसके बदन के ऊपर आकर अपने शरीर का दबाव उसके ऊपर बढ़ा देता है, उसका लंड दिव्या की चूत पर दस्तक दे रहा था, दिव्या भी अपनी चूत का कर्नल के लंड से मिलान करने की कोशिश करती है पर कर्नल अभी जान कर थोड़ी दूरी बनाए हुए था, कर्नल की सांसें अब दिव्या को अपनी गर्दन पर फील होने लगी थी, कर्नल उसके गले को हल्के से किस करके उसके होटों को चूमना शुरू कर देता है, दिव्या भी अपने होटों को खोल कर्नल की जीभ का स्वागत करती है पर अब उसे इस सब से ज्यादा अपनी को शांत करने की लगी थी।
उसका मन था कि किसी तरह खुद ही अब वह राजेश का लंड अपनी चूत में उतार ले पर उसके हाथ अभी भी बंधे हुए थे, वह फिर से कर्नल को राजेश समझ धीरे से उसे चोदने को कहती है, पर कर्नल बस उसके होटों को चूमे जा रहा था।
दिव्या के बार बार कहने पर कर्नल अपनी उंगली उसके होटों में डाल देता है, दिव्या इतना बहक चुकी थी कि वह एक पल भी नहीं लगती और कर्नल की उंगली को चूसना शुरू कर देती है।
वहीं दूसरी और दिव्या को इस तरह उंगली चूसता देख अब राजेश भी शांत हो चुका था, उसकी नज़रें बस स्क्रीन पर गढ़ सी गई थीं, अपनी फूल सी वाइफ़ को उस हैवान के नीचे देख कर वो खुद अजीब सा फ़ील करने लगा था। न चाहते हुए भी उसका लंड उसकी पेंट में तम्बू बना चुका था। राजेश की ऐसी हालत देख रेणुका भी समझ जाती है कि राजेश खुद भी गरम हो रहा है।
कर्नल अब समझ चुका था कि अब दिव्या उसका लंड चूसने के लिए पूरी तरह तैयार है, वो दिव्या के ऊपर से हटकर उसके मुँह के पास साइड में आ जाता है और अपना लंड दिव्या के होंठों के काफ़ी करीब ले जाता है, कर्नल के लंड की महक से दिव्या भी समझ जाती है कि अब वो क्या चाहता है पर वो सोच में पड़ जाती है कि क्या करें, आज तक उसने राजेश का लंड नहीं चूसा था, हालांकि उसके अलावा तीन लोगों का लंड वो अपने हलक में उतार चुकी थी पर वो सब तो जबरदस्ती हुआ था ना, ऐसे ही खयाल में वो खो सी गई थी पर अपनी चूत को शांत करने के लिए आज वो कुछ भी करना चाहती थी, वैसे भी उसकी नजर में राजेश ने भी तो आज उसकी चूत पहली बार चाटी थी, इसी सोच में वो अचानक अपनी जीभ बाहर निकाल कर कर्नल के लंड की ओर बढ़ा देती है। पर कर्नल उसकी जीभ के हल्का सा टच होते ही अपना लंड पीछे खिंच लेता है।
कर्नल ऐसा दो-तीन बार करता है और हर बार दिव्या पहले से ज्यादा कोशिश करती है। दिव्या को लंड चूसने के लिए ऐसा उतावला होते देख राजेश भी हैरान था, अब कर्नल दिव्या के ऊपर आकर उसे अपनी दोनों टांगों के बीच में ले लेता है, राजेश समझ जाता है कि किसी भी पल अब कर्नल दिव्या के मुंह में अपना लंड डाल देगा पर अगर ऐसा हुआ तो दिव्या को लंड से साइज़ से पता चल जायेगा है कि उसके ऊपर जो इंसान है वो राजेश नहीं कोई और है। राजेश के दिल की धड़कनें बढ़ चुकी थी।
कर्नल धीरे धीरे अपना लंड दिव्या के होठों के पास लाने लगता है, दिव्या जैसे मंत्रमुग्ध थी और वो कर्नल का लंड अपने होठों से छूते ही अपना मुँह उसके लिए खोल देती है
दिव्या के मुंह खोलते ही कर्नल अपना लंड सीधा उसके मुँह में डालने लगता है और साथ ही उसकी आँखों पर बंदी पट्टी भी हटा देता है। अगले ही पल दिव्या अपनी आँखें खोल लेती है और सामने कर्नल को देख कर घबरा जाती है पर कर्नल अब रुकता नहीं और पूरा लंड दिव्या के हलक में उतार देता है, दिव्या तड़प उठती है और लंड बाहर निकालने के लिए छटपटाने लगती है पर कर्नल उसके मुँह से लंड नहीं निकालता बल्कि और अन्दर ठूंस देता है।
दिव्या का मन सवालों से भर चुका था, उसे समझ नहीं आता कि राजेश कहाँ गया और यहाँ कर्नल कैसे आया।
दिव्या के छटपटाने का कर्नल पर कोई असर नहीं होता, वो अपना लंड उसके मुँह में जितना हो सके दबाता चला जाता है, दिव्या की सांसें उखड़ने लगी थीं, उसे ऐसा लगने लगा था जैसे किसी भी वक्त उसका दम निकल जाएगा, ठीक उसी समय कर्नल अपना लंड थोड़ा बाहर खींच लेता है जिससे दिव्या को साँस लेने का वक्त मिलता है पर कर्नल उसके मुंह में लंड वापस डालने में ज्यादा देर नहीं करता।
कर्नल अब ताबड़तोड़ दिव्या का मुंह चोदने लगा था,राजेश को इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि कर्नल ऐसा भी कर सकता है,अब तो दिव्या को सब पता चल जायेगा की कैसे उसने कर्नल से डील कर अपनी ही बीवी को उसे सौंप दिया। वह इस सब का सामना कैसे करेगा, दिव्या से क्या कहेगा।
कर्नल जल्द ही दिव्या के हाथों को भी आज़ाद कर देता है, शायद उसे दिव्या के स्ट्रगल करने में और ज्यादा मज़ा आ रहा था, कर्नल अपना एक हाथ दिव्या के सर के पीछे ले जा कर उसे अपने लंड पर दबा लेता है और दूसरे हाथ को पीछे की और ले जा कर उसकी चूत में उंगली डाल कर हिलाने लगता है।
कर्नल की उंगलियाँ दिव्या के चूत के पानी में सन जाती हैं, अब दिव्या हल्का शांत तो होने लगी थी क्योंकि इतना तो दिव्या समझ चुकी थी कि जब तक कर्नल का लंड झड़ेगा नहीं वो उसे नहीं छोड़ने वाला पर कर्नल का लंड वो अब भी नहीं झेल पा रही थी। । कुछ देर बाद कर्नल उसके मुंह में झटके मार कर झड़ने भी लगता है।
दिव्या को कर्नल के पानी का टेस्ट भी नहीं आ पाता क्योंकि उसका लंड तो उसके हलके में फँसा हुआ था। झड़ने के बाद कर्नल दिव्या के मुंह पर अपने लंड का दबाव कम करता है पर उसकी चूत में उंगली में करना जारी रखता है।
दिव्या जैसे तैसे कर्नल के लंड को अपने मुंह से बाहर निकालती हैं पर वो ये देखकर हैरान रह जाती हैं कि कर्नल का लंड अब भी एकदम सख्त था शायद इसलिए वो अब भी उसकी चूत चोदने को तैयार था। दिव्या हांफते हुए राजेश के बारे में पूछती हैं।
दिव्या: आह, अंकल राजेश कहाँ हैं। और आप यहाँ कैसे।
लाला: लीव दैट बास्टर्ड दिव्या, ही लेफ्ट यू फॉर मी।
दिव्या: ऐसा नहीं हो सकता, प्लीज आप जाओ, कहीं उसे पता चला तो मेरी लाइफ खराब हो जाएगी।
लाला: उसे कैसे पता चलेगा, वो बेवकूफ तो यहाँ से कब का जा चुका है।
दिव्या: वो मुझे ऐसे छोड़कर नहीं जा सकते।
लाला: ओह कम ऑन, उसके किसी फ्रेंड का एक्सीडेंट हुआ है शायद, बहुत जल्दी में था वो।
दिव्या: लेकिन मुझे ऐसी हालत में छोड़कर वो कैसे जा सकते हैं।
लाला: मैंने ही उसे कहा था कि रेणुका को भेज दूंगा रूम में क्योंकि वो तुम्हें छोड़ कर जाना नहीं चाहता था। लेकिन अब तो वो जा चुका है और यहाँ सिर्फ तुम और मैं हैं तो क्यों ना हम दोनों तुम्हारी एनिवर्सरी एन्जॉय करे।
दिव्या को विश्वास नहीं होता कि कैसे उसका पति ऐसी बेवकूफी कर सकता है, पर उसके फ्रेंड की कॉल तो उसके सामने ही आई थी।
दिव्या: मुझे नहीं एन्जॉय करना आपके साथ, प्लीज मुझे जाने दीजिये।
लाला: ओह कम ऑन दिव्या, (कर्नल अपनी उंगली दिव्या की से निकालकर उसकी आँखों के सामने ले आता है जो पूरी तरह से उसकी रस से सनी हुई थी।) एन्जॉय तो तुम कर रही हो मेरी जान, जब से यहाँ आई हो लंड लेने को तरस रही हो, और अब जब तुम्हें मौका मिला है तो तुम खुद को रोक रही हो।
दिव्या: ऐसा नहीं है अंकल, आप प्लीज़ छोड़ दीजिए मुझे, वैसे भी आपने जो करना था कर चुके हो।
लाला: मैं तुम्हारे पति जैसा नहीं हूँ जो इतनी जल्दी थक जाऊं, अभी तो शुरू किया है मैंने। तुम बताओ क्या तुम मेरा लंड नहीं लेना चाहती?
दिव्या एक पल चुप रहती है लेकिन फिर कर्नल से झूठ कहती है: नहीं अंकल। मेरे मन में ऐसा कुछ नहीं है।
लाला: अच्छा तो जैसी तुम्हारी मर्ज़ी।
कर्नल दिव्या के ऊपर से हट कर बेड के एक कोने में बैठ जाता है, इस चीज का अंदाज़ा दिव्या को भी नहीं था, वहीं ये देख राजेश भी थोड़ा राहत फ़ील करता है कि अब दिव्या का टार्चेर बंद हो जाएगा हालांकि उसे समझ नहीं आता कि आगे की स्थिति वह कैसे संभालेगा। दिव्या कर्नल की बात सुन कर अपने आप को संभालती है और बेड से नीचे उतरने लगती है। कर्नल भी दिव्या की दुविधा समझता है और फिर से चांस लेता है।
लाला: एक बात पूछू दिव्या।
दिव्या बिना कुछ कहे रुक जाती है।
लाला: क्या तुम्हारा मन नहीं है यहाँ रुकने का।
दिव्या: मैं ये सब नहीं कर सकती अंकल, समझिये।
लाला: ये मेरे सवाल का जवाब नहीं हुआ।
दिव्या फिर चुप हो जाती है।
लाला: देखो, तुम्हारा हस्बैंड तो इतनी जल्दी आएगा नहीं, यहाँ जो भी होगा ना तुम उसे बताने वाली हो ना मैं, फिर क्यों ना तुम अपनी प्यास बुझाने दो मुझे।
दिव्या एक पल के लिए बहकती है फिर खुद को संभाल बेड से उतर जाती है। कर्नल भी बेड से खड़ा होकर दिव्या के सामने खड़ा हो जाता है।
लाला: क्या हुआ दिव्या क्यों खुद को रोक रही हो।
कर्नल ये कहता हुआ दिव्या कि इतना करीब आ जाता है कि उसका लंड दिव्या की चूत से टकरा रहा था, दिव्या अपनी नज़रें नीचे झुका लेती है।
कर्नल दिव्या के कंधे पर हाथ रखता है: ठीक है डियर, आई विल नॉट फ़क यू, लेकिन अगर तुम कहो तो तुम्हारी प्यास तो मुझे शांत करने दो।
कर्नल इतना कह दिव्या को घुमा कर बेड पर झुका देता है। दिव्या बेड पर उसके आगे एक घोड़ी की तरह घुटनों पर आ गई थी, उसकी चूत इस वक्त कर्नल के सामने थी, कर्नल बेड के कोने पर बैठ पीछे से दिव्या की चूत को सहलाने लगता है।
दिव्या: अंकल... ये आप क्या कर रहे है।
लाला: जस्ट एन्जॉय डिअर। उफ़ कितना पानी छोड़ती है तुम्हारी चूत दिव्या।
दिव्या शर्म से पानी पानी हो गई पर कर्नल के चूत सहलाने से वो इस वक्त सातवे आसमान पर थी, उसकी आहें कमरे में गूंजने लगी थी, वो अब किसी भी पल झड़ने वाली थी, किसी तरह वो हिम्मत कर थोड़ा आगे की और हटने की कोशिश करती है पर कर्नल के हल्का सा रोकने से वो वहीं जम जाती है। कर्नल अपनी स्पीड और बढ़ा देता है।
दिव्या इस समय अपनी टांगे पूरी फैला चुकी थी, वो रह रह कर अपना मुंह बेड में दबा कर अपनी आहें रोकने की कोशिश करती है, इस समय उसे कोई फरक नहीं पड़ता अगर कर्नल उसे चोद भी देता, वहीं अब राजेश भी शांत हो चुका था। वो बस स्क्रीन को देखे जा रहा था पर रेणुका के सवाल से वो थोड़ा होश में आता है।
रेणुका: तो तुम्हें भी मजा आ रहा है ये सब देख के।
राजेश: पागल हो क्या तुम। ये क्या कह रही हो।
रेणुका: हाहाहा, मैं पागल हूँ या तुम झूठ कह रहे हो।
रेणुका इतना कह अपना हाथ राजेश के लंड पर रख देती है।
रेणुका: देखो ये ऐसे ही खड़ा है क्या।
राजेश शर्म से कुछ कह नहीं पाता पर रेणुका उसके लंड से अब अपना हाथ नहीं हटाती, राजेश भी रेणुका को कुछ कहना नहीं चाहता था पर फिर भी वो खुद ये एक्सेप्ट करने को तैयार नहीं था कि वो खुद एक गैर मर्द से अपनी बीवी की चुदाई तरफ देखना चाह रहा है,वो फिर से रेणुका से हेल्प मांगता है कि शायद उसका दिल पिघल जाये और वो उसे छोड़ दे।
रेणुका: तुम्हे क्या लगता है राजेश कि अगर मैं तुम्हें छोड़ भी दूं तो क्या तुम दिव्या के पास जा पाओगे। आज कर्नल किसी भी कीमत पर दिव्या को नहीं छोड़ने वाला है।
राजेश: अभी भी देर नहीं हुई है, मैं अभी भी दिव्या को इस टॉर्चर से बचा सकता हूँ।
रेणुका: हाहाहा, तुम्हें लगता है कि जो भी हो रहा है वो टॉर्चर है, तुम इतने बेवकूफ़ तो नहीं हो।
अब रेणुका राजेश का लंड पेंट से बाहर निकाल लेती है और वह कुछ नहीं बोल पाता, राजेश की नज़रें शर्म से झुक चुकी हैं और रेणुका के लंड को मसलने से वह तड़प रहा था।
रेणुका राजेश के हाथ खोल देती है तो वह एकदम से दरवाजे की ओर भागता है और उसे खोलने की भरपूर कोशिश करता है, काफी देर तक वह दरवाजा पीटता है पर उसका कोई फायदा नहीं होता। रेणुका उसे समझाती है कि इस सब का कोई फायदा नहीं है तो वह पलट कर देखता है और उसकी नजर सीधी स्क्रीन पर पड़ती है।
कर्नल अब दिव्या के पीछे बेड पर आ चुका था। वह बार बार दिव्या की चूत को सहलाते हुए अपने लंड को उसकी चूत पर रगड़ रहा था और फिर उसकी चूत को हाथों से भी सहला रहा था पर अब दिव्या कुछ नहीं कह रही थी।
तीन गैर मर्दों के लंड लेने के बाद अब शायद दिव्या को कर्नल से चुदने में ज्यादा एतराज़ नहीं था और वो इंतजार में थी कि कर्नल कब उसकी चूत में अपना हलब्बी लंड डालेगा पर ऐसा न होने पर वह भी छटपटा रही थी।
लाला: मैंने तो तुमसे प्रॉमिस किया है डिअर कि मैं तुम्हें नहीं चोदुंगा पर तुम तो मजबूर नहीं हो, अपनी इच्छा पूरी करने का इससे अच्छा टाइम नहीं हो सकता।
इतना कह कर्नल अपना लंड दिव्या की चूत के छेद पर टिका देता है, कर्नल की बात दिव्या पर ऐसा असर करती है कि वह खुद अपनी गांड पीछे की ओर दबाने लगती है और धीरे धीरे कर्नल का लंड उसकी चूत में धसने लगता है, दिव्या को काफी दिक्कत होती है पर अब वह रुकती नहीं और बार-बार कर्नल के लंड को अपनी चूत में लेने लगती है।
लाला: "येस दिव्या, डोंट स्टॉप योर्सेल्फ डिअर"
दिव्या भी अब लगातार अपनी गांड हिला कर रही थी।
कुछ ही पलों में कर्नल का लंड पूरी तरह दिव्या की चूत के रस से सराबोर हो चुका था, अब दिव्या को भी उसे लेने में ज्यादा परेशानी नहीं हो रही थी। कर्नल दिव्या की कमर को लगातार सहला रहा था, दिव्या भी अपनी स्पीड बढ़ा चुकी थी।
लाला: येस्स्स्स माय डियर। तुम्हारी चूत का तो कोई भी दीवाना हो जाए।
इतना कहते हुए कर्नल अपना एक हाथ दिव्या के कंधे पर रखता है और खुद भी उसका साथ देने लगता है और उसकी चूत में तेजी से झटके लगाने लगता है।
दिव्या की आवाज़ अब कमरे में काफी तेजी से गूंज रही थी, कर्नल जानता है कि दिव्या अब झड़ जाएगी लेकिन वह रुकता नहीं है।
लाला: डू यू लाइक दिव्या।
दिव्या: आह आह श्ह्ह
लाला: (स्पीड स्लो करते हुए) टेल में डियर, डू यू लाइक इट।
दिव्या: ओह येस अंकल।
लाला: थैट्स माय गर्ल।
कर्नल अपने धक्को की स्पीड काफी बढ़ा देता है, और अगले ही पल दिव्या काफ़ी तेज़ आंहे लेती हुई कर्नल के लंड पर ही झड़ जाती है, दिव्या का बदन ढीला पड़ चुका था। दिव्या को डर था कि कर्नल कहीं अंदर ही न निकाल दे इसीलिए वो ऊपर हो जाती है।
पर कर्नल अभी झड़ा नहीं था इसीलिए वो दिव्या को कुतिया बनाकर फिर से उसकी चुदाई शुरू कर देता है और दिव्या भी कुतिया की तरह कर्नल के आगे गांड करके चुद रही थी पर कर्नल का ज्यादा साथ नहीं दे रही थी। उसके मम्मे बेड पर झूल रहे थे। अब कर्नल रुकने का नाम नहीं ले रहा था।
