लाला: क्या हुआ दिव्या, तुमने अपनी गांड हिलाना क्यों बंद कर दिया?
दिव्या को समझ नहीं आता कि कैसे एक्सेप्ट करे कि अब उसकी झड़ चुकी है। हालांकि कर्नल ये बात जानता था।
लाला: बोलो दिव्या, यू वांट मोर?
दिव्या: बस अंकल, अंकल प्लीज़ ये सब राजेश को नहीं पता चलना चाहिए, नहीं तो मैं बर्बाद हो जाऊंगी।
कर्नल अचानक अपना लंड निकाल लेता है, दिव्या उसके लंड निकालते ही बेड से उठने लगती है पर कर्नल उसकी पीठ पर हाथ रख उसे वैसे ही रहने का इशारा करता है।
लाला: पता चलने दो चलता है तो, वो अब कुछ नहीं कर सकता।
दिव्या: प्लीज़ अंकल ऐसा मत करना।
लाला: क्या तुम्हें मज़ा नहीं आया आज।
दिव्या: जी आया है पर मैं ऐसा कभी नहीं चाहती थी।
लाला: अपनी इच्छायें पूरी करने में कभी ज्यादा सोचना नहीं चाहिए। मैं जानता हूँ राजेश तुम्हें अधूरा ही छोड़ देता है। जिसके लिए लोग तुम्हारा फायदा उठाते हैं पर अब तुम्हें किसी से डरने की जरूरत नहीं।
दिव्या: अंकल राजेश आता ही होगा। प्लीज़ अब आप चले जाओ।
लाला: आज रात तुम मेरी हो डियर, जब तक तुम्हारी मन भरकर चुदाई न कर लूँ तब तक नहीं जा सकता।
दिव्या को डर था कि कहीं राजेश न आ जाए, उसे गए हुए वैसे भी काफी समय हो चुका था।
दिव्या: तो आप कर लीजिए जो करना है। पर प्लीज उसके बाद चले जाना।
लाला: जब तक तुम साथ न दो मुझे मजा नहीं आने वाला।
दिव्या: अंकल आप कर लीजिए प्लीज। मैं अब साथ नहीं दे पाउंगी।
लाला: क्यों दिव्या। अभी तो पूरा साथ दे रही थी।
कर्नल फिर से दिव्या से वही पूछने लगा, आखिरकार दिव्या को कहना ही पड़ता है कि वो डिस्चार्ज हो चुकी है।
लाला: तो तुम भी मुझे अधूरा छोड़ गई डियर। तुम दोनों पति-पत्नी तो एक जैसे हो। पर मैं जानता हूं कि तुम्हें फिर से कैसे तैयार करना है।
कर्नल ये कह हसने लगता है और दिव्या के पीछे आकर सीधा उसकी चूत पर मुह लगा देता है। दिव्या कर्नल की गरम जीभ से एक बार तो उछल सी पड़ती है। कुछ ही पलों में कर्नल दिव्या की गांड के बीच में अपना मुह दबा देता है और उसकी चूत को अपनी जीभ से सहलाने लगता है।
एक बार फिर दिव्या की चूत पानी पानी होने लगी थी, ना चाहते हुए भी वो रह रह कर अपनी गांड हिला कर कर्नल की जीभ को अपनी चूत पर एडजस्ट कर रही थी, ये बात कर्नल भी नोटिस कर चुका था।
वो एक ही झटके में दिव्या को बेड पर पलट कर रख देता है और उसकी आँखों में देखते हुए उसकी चूत फिर से चाटना शुरू कर देता है। दिव्या की आहें सुनकर वो दिव्या की चूत में अपनी उंगली डाल कर उसकी चुदाई भी साथ साथ शुरू कर देता है।
दिव्या फिर से छटपटाने लगी थी, उसकी आवाज कर्नल को और बढ़ावा दे रही थी।
लाला: डू यू लाइक इट नाउ माय डियर।
दिव्या: उम्म्म आह।
लाला: ये मेरी बात का जवाब नहीं हुआ डियर। यू वांट मी टू स्टॉप?
दिव्या: ओह नो अंकल।
लाला: तो फिर से बोलो यू लाइक इट बेब।
दिव्या: ओह ओह यस आई लाइक इट।
लाला: सो यू वांट मी टू फ़क यू अगेन, डिअर।
दिव्या: यस अंकल प्लीज फ़क मी अगेन।
कर्नल अचानक दिव्या की चूत चाटना बंद कर उसके चेहरे के पास बेड पर बैठ जाता है।
लाला: तो अब तुम्हारी बारी है मुझे खुश करने की।
(कर्नल लंड को हाथ में पकड़ कर इशारा करता है।)
राजेश भले ही सुन न पा रहा हो पर समझ जरूर रहा था कि कर्नल क्या चाह रहा है। उसके मन में एक ही सवाल गूंज रहा था कि क्या दिव्या खुद ऐसे ब्लोजोब देने के लिए रेडी होगी। उसके लंड में तनाव पल-पल बढ़ता जा रहा था। न चाहते हुए भी वह खुद को अपना लंड मसलने से रोक नहीं सका पर दूसरे ही पल वो रेणुका की ओर देखता है जिसके चेहरे पर हल्की स्माइल थी। वह वापस स्क्रीन की ओर देखता है।
दिव्या भी समझती है कि कर्नल क्या चाहता है। वो अपने दोनों हाथो से कर्नल का लंड पकड़ कर हिलाने लगती है।
लेकिन कर्नल उसे लंड मुंह में लेने का इशारा करता है तो दिव्या एक पल कर्नल की आंखों में देखती है और अपना मुंह उसके लंड की ओर बढ़ा देती है। अगले ही पल दिव्या बिना रुके कर्नल का लंड चूसना शुरू कर देती है। कर्नल भी दिव्या के पके आम जैसे मम्मों को सहला कर उसे लंड अच्छे से चूसने के लिए कहता है।
लाला: हाँ जान, अच्छे से चूसो इसे और बाकी सब कुछ भूल जाओ।
यहाँ दिव्या कर्नल का लंड चूसने में लगी थी वहाँ दूसरी तरफ रेणुका एक बार फिर राजेश का लंड अपने हाथ में ले लेती है।
रेणुका: क्या मैं हेल्प करूँ तुम्हारी?
राजेश: यू बिच यह सब तुम्हारी वजह से हुआ है, तुम्हारी वजह से मैंने अपनी बीवी को खो दिया।
रेणुका पर मानो उसके कुछ भी कहने का कोई असर नहीं होता, वह बस उसके लंड को सहलाते हुए उसे बेड पर लिटा देती है।
रेणुका: चाहे तुम कुछ भी कहो पर क्या यह झूठ है कि मजा तो तुम्हें भी आ रहा है इस सब में।
रेणुका राजेश को लिटा कर उसके पेट को चूमना शुरू करती है तो राजेश न चाहते हुए हल्का सा विरोध करने के लिए रेणुका को हटाने की कोशिश करता है पर रेणुका उसके हाथ को हटाकर उसके लंड को मसलना शुरू कर देती है।
राजेश: आह...
रेणुका: मजे लो राजेश। और मत तड़पाओ खुद को।
रेणुका राजेश के कपड़े खोल उसके लंड को बाहर निकाल अपने हाथ में भर लेती है और चूमते हुए उसके लंड की ओर बढ़ने लगती है। राजेश का रहा सहा विरोध भी खत्म हो चुका था। पूरा दिन और शाम निकल चुकी थी रेणुका को उसे उकसाते हुए। रेणुका राजेश के लंड की तरफ बढ़ते हुए चली गई, रेणुका राजेश के लंड को अपने मुंह में ले कर चूसना शुरू करती है जबकि राजेश का लंड झटके मार कर झड़ने लगता है।
रेणुका के चेहरे पर स्माइल आ जाती है, वहीं राजेश जल्दी झड़ने की शर्म से मुंह दूसरी ओर फेर लेता है। रेणुका राजेश का मुंह अपनी ओर करने की कोशिश करती है तो वह बेड से उठ कर खड़ा हो जाता है। उसकी आँखों में हताशा साफ देखी जा सकती थी। लेकिन इस सब से मानो रेणुका को कोई फरक ही नहीं पड़ा हो, वह राजेश का हाथ पकड़ कर उसे वापस बेड पर खींच लेती है और उसके कपड़े उतारने लगती है।
राजेश: बस करो रेणुका, अब मेरा मन नहीं है।
रेणुका: चिंता मत करो, बस लेटे रहो, मैं समझ सकती हूँ लेकिन ये तो नेचुरल है।
रेणुका राजेश को नंगा किए जा रही थी। रेणुका एक बार फिर राजेश के बदन से लिपट चुकी थी। रेणुका के मम्मे राजेश के बदन पर रगड़ रहे थे और रेणुका उसके बदन को चूम-चूमकर गीला कर चुकी थी। राजेश का लंड फिर से अकड़ने लगा था।
रेणुका उसके हाथ में पकड़कर उसके कान में फुसफुसाती है: देखा मैंने कहा था ना ये सब नॉर्मल है।
रेणुका एक बार फिर राजेश का चूसना शुरू कर देती है।
रेणुका: तुम्हें ये सब पसंद है न राजेश।
राजेश: ओह हां।
रेणुका: और दिव्या को ऐसे देख, कैसा लग रहा है तुम्हें।
राजेश कुछ वक्त जवाब नहीं देता पर रेणुका बिना जवाब लिए कहा मानने वाली थी, वो राजेश का लंड मुंह से निकाल कर उसे हल्का-हल्का अपने हाथ से सहलाने लगती है। वो लगातार राजेश की आँखों में देख रही थी।
रेणुका: बोलो भी राजेश, मैं जानती हूँ की तुमको अच्छा लग रहा है दिव्या को ऐसे देखना।
राजेश: हाँ लगता है तो क्या मैं ये सब एक्सेप्ट कर लूं।
रेणुका: क्या प्रॉब्लम है राजेश? देखो दिव्या तो खुश लग रही है।
राजेश: यू बिच, शी इज नॉट हैप्पी बल्कि वो मजबूर है। वो इस हालत में और कर ही क्या सकती है।
रेणुका हल्की स्माइल के साथ राजेश के लंड को मुंह में ले लेती है: अच्छा तो फिर सिर्फ मेरा मजा लो राजेश। स्क्रीन पर मत देखो।
रेणुका के मना करने के बाद भी राजेश फिर से दिव्या को एक बार फिर देखने लगता है, रेणुका भी यही चाहती थी।
लाला: ओह दिव्या, डोंट वेस्ट योर टाइम विथ दैट फूल। नाउ बी रेडी फॉर माय कॉक।
कर्नल दिव्या के पीछे आ चुका था, दिव्या भी बेसब्री से कर्नल का इंतजार कर रही थी, वह अपनी गांड पीछे करके कर्नल का लंड लेने की कोशिश करती है पर उसे अंदाजा नहीं था कि कर्नल के मन में क्या चल रहा है।
कर्नल बिना दिव्या को चेतावनी दिए उसकी गांड के छेद पर लंड दबाने लगता है। दिव्या दर्द की वजह से आगे हटने की कोशिश करती है पर कर्नल उसे कंधे से पकड़कर उसकी गांड में लंड घुसाने लगता है। दिव्या तड़प उठी थी, उसकी गांड आज तक अनटच थी,उसने सोचा भी नहीं था कि कर्नल ऐसा कुछ भी कर सकता है।
दिव्या आगे हटने की भरसक कोशिश करती है,लेकिन कर्नल के आगे उसकी एक नहीं चलती। कर्नल उसके मुँह पर हाथ रखके उसे अपनी ओर खींचकर उसकी गांड मारना शुरू कर देता है। दिव्या की चीख उसके मुँह में ही घुटकर रह जाती है, उसे तो ऐसा लग रहा था मानो उसकी गांड में किसी ने जलता हुआ सरिया डाल दिया हो।
कर्नल भी इतनी टाइट गांड मारकर अंदर ही अंदर खुश हुए जा रहा था। राजेश भी अपनी वाइफ़ को ऐसी हालत में देख कर एक ओर तो गुस्से से भर गया लेकिन उसके लंड का तनाव और बढ़ता जा रहा था। उसे लग रहा था कि उसके की नसे कहीं फट न जायें। वो रेणुका को अपने लंड की ओर झुकाने लगता है और अपना पूरा लंड उसके हलक में उतारने लगता है।
वही अब दिव्या का स्ट्रगल भी कम होता देख कर्नल उसके मुंह से हाथ हटा लेता है पर उसकी गांड मारना जारी रखता है।
दिव्या (दर्द से कराहते हुए): ये आप क्या कर रहे हो अंकल। प्लीज़ मुझे बहुत दर्द हो रहा है।
लाला: कोई बात नहीं दिव्या, शुरु शुरु में तो दर्द होता ही है। तुम्हारी चूत जब पहली बार मारी थी तब भी तो ऐसा ही दर्द हुआ होगा ना।
दिव्या: नहीं, ऐसा तो नहीं हुआ था, ये दर्द तो बर्दाश्त नहीं हो रहा मुझे से। प्लीज़ अंकल, ऐसा लग रहा है कहीं मैं मर न जाऊँ।
कर्नल जोर से ठहाका लगाकर हँसता है: अरे चुदाई से भी कभी कोई मरता है क्या, कुछ नहीं होगा तुझे, तेरे हसबैंड ने कभी तेरी गांड नहीं मारी क्या।
दिव्या: नहीं, कभी नहीं। ऐसा कौन करता है।
लाला: चुतिया है वो जो ऐसी सुंदर चीज़ छोड़ के बैठा था। ना चूत चाटी तेरी ना ही गांड मारी, सिर्फ लंड डाल कर हिला लिया और पांच मिनट में झड गया।
कर्नल की बातें सुनकर दिव्या शर्म से कुछ नहीं कह पाती।
लाला: थोड़ा आराम मिला मेरी जान को या नहीं।
दिव्या: हम्म,लेकिन अब भी बहुत दुख रहा है।
लाला: मेरे लिए इतना नहीं सह सकती क्या तू। ऐसी चुदाई तेरे पति ने तो कभी नहीं की, मैं जानता हूँ, पर क्या सलमान ने भी कभी तेरी गांड नहीं मारी?
कर्नल के मुह से सलमान का नाम सुनकर दिव्या हैरान रह जाती है।
लाला: बोल ना, ऐसा नहीं हो सकता कि उसने इतनी चिकनी गांड बिना मारे छोड़ दी हो?
दिव्या: ना नहीं अंकल। लेकिन आपसे ये सब किसने कहा।
लाला: बस पता है मुझे।
दिव्या: अंकल उसने सब जबरदस्ती किया था मेरे साथ।
लाला: तुझे मजा आया था या नहीं।
दिव्या फिर चुप हो जाती है पर कर्नल के दोबारा पूछने पर वो बोल ही पड़ती है।
दिव्या: हाँ आया था।
लाला: तो फिर क्यों बोलती है की जबरदस्ती की थी लेकिन अब तुझे और किसी से चुदने की जरूरत नहीं है जान। अब तू मेरी है। बोल है ना मेरी तू।
दिव्या: ओहो हाँ अंकल अब मैं आपकी हूँ, प्लीज़ अब तो छोड़ दो।
लाला: बस कुछ देर और डियर।
कर्नल के धक्के और तेज होने लगे थे, दिव्या की टाइट गांड में उसका लंड फंस फंस के जा रहा था पर कुछ देर में दिव्या के कराहने की आवाज़ सिस्कियों में बदलने लगी थी। कर्नल भी हैरान था कि दिव्या इतनी चुदाई के बाद भी अपनी गांड मरवाने को एन्जॉय करने लगी थी। कर्नल भी अब झड़ना चाहता था,जब भी कर्नल स्पीड कम करता तो दिव्या पीछे मुड़कर उसकी और देखने लगती थी।
दिव्या के हफूस आम के जैसे मोटे हवा मम्मे में आगे पीछे झूल रहे थे। कर्नल अब अपना हाथ दिव्या की गांड पर रखकर उसे टाइट पकड़ लेता है और पूरा लंड अंदर डालकर उसकी गांड चोदने लगता है।
कर्नल के जबरजस्त धक्कों से दिव्या उसका वेट ज्यादा देर सहन नहीं कर पाती और धीरे धीरे बेड पर गिर जाती है लेकिन कर्नल तो अब रुकना ही नहीं चाहता था उसके विशाल बदन के नीचे फूल सी दिव्या बस अपनी चुदाई का आनंद ले रही थी।
वही दूसरी और रेणुका अब राजेश के ऊपर आकर उसका लंड अपनी चूत में ले लेती है और उसके लंड पर चढ़कर उसे चोदने लगती है। राजेश एक बार पहले ही झड़ चुका था पर दिव्या की चुदाई देख वो कुछ ज्यादा ही गरम हो गया था।
रेणुका होले होले उसके लंड को चोद रही थी जैसे वो किसी जल्दी में न हो। रेणुका के चहरे की मुस्कान राजेश को काफी झकझोर रही थी पर अब उसका खुद के ऊपर कंट्रोल नहीं था। वो बार बार अपनी नजरे बंद करता है पर फिर स्क्रीन की और देखने लगता है। कर्नल दिव्या के ऊपर चढ़कर लगातार उससे कुछ कह रहा था और अचानक वो अपना लंड उसकी गांड में मसलने सा लगा था। राजेश समझ चुका था कि अब कर्नल ज्यादा देर नहीं टिकने वाला और होता भी ऐसा ही है, कर्नल अपना पानी दिव्या की गांड में छोड़ देता है।
राजेश दिव्या के चहरे की निराशा साफ़ देख पा रहा था जिससे जाहिर था की वो और चुदना चाहती थी। दिव्या बेड पर पड़े कर्नल की ओर देखती है तो कर्नल उसकी आंखों में देख कर उसे अपने लंड की ओर इशारा करता है जो अब झड़ने के बाद भी बैठने का नाम नहीं ले रहा था पर अब वो पूरी तरह से हार्ड भी नहीं था।
लाला: परेशान मत हो जान, तुम जानती हो कि तुम्हें आगे क्या करना है।
दिव्या अब भी असमंजस में है कि क्या करे और कैसे कर्नल को कहें।
लाला: कम ऑन डियर, तुम जानती हो इसे कैसे तैयार करना है।
कर्नल जानता था कि दिव्या क्यों रुक रही है पर वो उसे खुद ही आगे बढ़ने देना चाहता था।
दिव्या बेड पर पड़ी अपनी पेंटी उठा कर कर्नल के लंड को साफ करने लगती है, क्योंकि यही लंड अभी उसकी गांड की गहराइयों के दर्शन कर के आया था। उसे काफ़ी घिन आ रही थी पर उसके बदन में लगी आग को वो अब किसी भी कीमत पर बुझा देना चाहती थी।
कर्नल को सामने देख राजेश झट से बेड से उतरकर उसका कोलर पकड़ लेता है पर कर्नल के चेहरे पर एक शिकन भी नहीं थी। राजेश को अपने पेट पर कुछ चुभन महसूस होती है तो वो अपनी नजरें नीचे झुका कर देखता है, कर्नल ने उसके ऊपर अपनी पिस्टल तान रखी थी। राजेश के हाथ कर्नल के कोलर पर ढीले पड़ जाते हैं।
लाला: कमोन राजेश, शांति से बैठ जाओ।
राजेश: यू बास्टर्ड, तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे धोखा देने की।
लाला: ये धोखा देना तो तुमसे ही सीखा है मैंने, तुमने भी तो रेणुका के साथ खूब मजे किए थे हैं ना।
राजेश: दिव्या मेरी वाइफ है कमीने।
लाला: हाहाहा, तो अब भी तो वो तुम्हारी वाइफ ही है ना, मैंने तो बस थोड़े मजे लिए हैं। वैसे चीज़ कमाल की है वो।
राजेश: बास्टर्ड! (चिल्लाते हुए)
लाला: ओह, नाटक मत करो, मुझे सब पता है तुमने कल उसकी चुदाई देख कर कितना मजे लिया है।
राजेश: तुमने मेरी वाइफ का रेप किया है। मैं तुम्हे पुलिस में दे दूंगा।
लाला: बेवकूफ आदमी तुम इसे तुम रेप कहते हो? तुमने देखा नहीं कितना मजे लिया है उसने, वैसे राजेश तुमने उसकी गांड मारी नहीं कभी।
अचानक कर्नल दूसरी तरफ देख कर थोड़ा हंसता है तो राजेश भी उस ओर देखता है, रेणुका जाग गयी थी और बेड पर बैठ कर मुस्कुरा रही थी। राजेश वापस कर्नल से कहता है।
राजेश: तुमने उसे नशे में कर दिया था वरना वो कभी तुम्हें हाथ भी नहीं लगाने देती।
लाला: तुम जान के भोले बन रहे हो या बेवकूफ हो तुम। तुम्हें लगता है उसने ये सब नशे में किया तो क्यों न एक रात और यहाँ रुक जाओ। तुम्हें भरोसा दिलाने में मुझे काफी मजा आएगा।
राजेश: अब मैं तुम्हारी बातों में नहीं आने वाला। मैं दिव्या को सब बता दूंगा।
लाला: हहहा क्या बताओगे उसे, यही कि कैसे तुमने उसे मुझसे चुदवाने के लिए उसकी आंख पर पट्टी बांध के मुझे सौंप दिया, और कैसे तुमने उसको देख पूरी रात रेणुका की चुदाई की है। जाओ बता दो उसे सब, तुम्हें छोड़ देगी तो मुझे एक परमानेंट रांड और मिल जाएगी। वैसे भी अब वो तुम्हारी मोहब्बत से ज्यादा मेरे लंड की प्यासी है।
राजेश: बकवास बंद करो, वो दुनिया में सबसे ज्यादा सिर्फ मुझे चाहती है।
लाला: ये तो तभी पता चलेगा जब वो हम दोनों में से किसी एक को चुने, और ये तुम भी जानते हो कि वो किसे चुनेगी।
राजेश: वो हर हाल में सिर्फ मुझे ही चुनेगी। जो भी कल हुआ वो तुमने नशे में किया।
लाला: हहहाह, ओके ओके, तो डर क्यों रहे हो आजमाने से। मैं प्रॉमिस करता हूँ, अगर उसने तुम्हें चुना तो मैं तुम दोनों की लाइफ से निकल जाऊंगा, तुम फ्लैट छोड़कर चले जाना, मैं तुम्हारे सारे पैसे ब्याज के साथ वापस कर दूंगा और फिर कभी तुमको शकल नहीं दिखाऊंगा लेकिन अगर उसने मुझे चुना तो मैं उसे आज के बाद मन भरकर उसे चोदुंगा और तुम मेरे रस्ते में नहीं आओगे, हाँ अगर चाहो तो तुम भी जोइन कर लेना, हहहा।
राजेश कुछ देर सोचता है, कर्नल को अपनी लाइफ से दूर भगाने का इससे अच्छा चांस क्या हो सकता था।
राजेश: ठीक है पर ये होगा कैसे, कैसे पता चलेगा कि वो किसे चुनेगी।
कर्नल उसे एक टैबलेट दिखाता है।
कर्नल: ये एक नॉर्मल फ्लेवर्ड टैबलेट है। मैं दिव्या से कह दूंगा कि ये नींद की दवा है, अगर उसने ये तुम्हें आज खिला दी तो समझ जाना उसे मुझसे फिर से चुदना है और उसकी पसंद मैं हूँ। नहीं तो मैं आज ही तुम दोनों को यहाँ छोड़कर चला जाऊंगा। लो खाकर फ्लेवर देख लो।
राजेश: तुम मुझे फिर से धोखा देना चाहते हो, जरूर ये सच में ये टैबलेट नींद की होगी।
लाला: तुम भी बहुत शक करते हो। लो मैं खा कर दिखाता हूँ।
कर्नल एक टैबलेट अपने मुंह में डाल लेता है और साथ ही दूसरी राजेश को देता है। राजेश भी टेस्ट जानने के लिए टैबलेट खा कर देखता है, पर उसे कुछ गलत अहसास नहीं होता।
राजेश: ठीक है फिर,लेकिन इसके बाद मैं तुम्हारी शकल नहीं देखना चाहता।
लाला: ओके डन। ठीक है फिर मैं दिव्या से मिलकर आता हूँ।
राजेश: दिव्या से मिलने क्यों?
लाला: ये टैबलेट उसे कौन देगा फिर, तुम खुद ही दोगे क्या।
राजेश: ठीक है पर ज्यादा टाइम मत लेना।
लाला: थोड़ा टाइम तो लगेगा, तुम खुद पर भरोसा रखो, बस आज आज की बात है फिर अगर उसने तुमको चुना तो कभी मुलाकात भी नहीं होगी।
राजेश मुँह ताकता रह जाता है और कर्नल एक बार फिर दिव्या के रूम की ओर बढ़ चुका था। रेणुका भी समझ जाती है कि राजेश एक बार फिर कर्नल के झांसे में आ गया है। वो राजेश को समझाना तो चाहती थी पर उसकी खुद की लाइफ भी इसी बात पर टिकी थी कि अब कर्नल को एक नई रांड मिल जाए। राजेश के दिल की धड़कन इस वक्त बहुत तेज चल रही थी, वो सोच में डूबा था कि क्या सच में दिव्या कर्नल को चुन लेगी या आज कर्नल उसकी लाइफ से बाहर हो जाएगा। रेणुका राजेश के लिए कॉफ़ी तैयार कर लाती है। जब वो रूम में आती है तो राजेश स्क्रीन चालू कर कर्नल और दिव्या को ही देख रहा था।
दिव्या उसे रूम में नहीं दिख रही थी। कर्नल बाथरूम के गेट के बाहर खड़ा कुछ कहता है तो राजेश समझ जाता है कि दिव्या शायद अंदर ही है। एक मिनट बाद दिव्या बाथरूम का दरवाजा खोल कर नंगी ही बाहर आ जाती है।
कर्नल उससे कुछ कहता है तो वो कर्नल को बाथरूम के अन्दर ले कर दरवाजा बंद कर लेती है तो राजेश रेणुका से बाथरूम का कैम ऑन करने को कहता है पर रेणुका उसे मना कर देती है कि वहाँ कोई कैम नहीं है।
कर्नल को अंदर गए कुछ समय हो गया था और यहाँ राजेश बेचैन हो रहा था कि आखिर दिव्या ने कर्नल को अंदर क्यों घुसने दिया। कुछ देर में कर्नल बाहर निकल आता है, वो पूरी तरह पानी में भीगा हुआ था। उसके बाहर आने से राजेश कुछ चैन की सांस लेता है। कर्नल भी सीधा राजेश के पास पहुँच जाता है।
लाला: जाओ डियर, अब देखते हैं वो किसे चुनती है।
राजेश: क्या उसने तुमसे टैबलेट ले ली?
लाला: वो तो उसे लेनी ही थी, आखिर मेरा लंड भी तो लेना है उसे।
राजेश: ऐसा नहीं होगा और आज तुम्हें हम दोनों की लाइफ से निकालना होगा।
लाला: हा हा, देखते हैं। लेकिन तुम्हें आज यही रुकना होगा, कहीं ऐसा न हो डर के मारे दिव्या को पहले ही ले जाओ।
राजेश बिना कुछ कहे रूम से चला जाता है। दिव्या भी नहा धोकर तैयार हो चुकी थी, राजेश को देखते ही वो उससे लिपट जाती है।
दिव्या: तुम मुझे अकेला छोड़कर कैसे जा सकते हो राजेश।
राजेश: क्या करता, एमरजेंसी ही ऐसी आन पड़ी थी। लेकिन मैंने रेणुका को भेजा था ना तुम्हारे पास, तुम्हे कोई दिक्कत तो नहीं हुई।
दिव्या: दिक्कत नहीं होगी अगर तुम ऐसे जाओगे तो।
राजेश: ओह, सॉरी डियर। मैंने बर्थडे गर्ल को नाराज कर दिया।
दिव्या: मुझे इतना अच्छा सरप्राइज देकर सब बेकार कर दिया, पहली बार तो तुमने कुछ प्लान किया था मेरे लिए।
राजेश: कोई नहीं, हम क्यों न आज सेलिब्रेट करें यहाँ।
दिव्या: हम्म्म, ठीक है।
राजेश को थोड़ी हैरानी होती है कि दिव्या ने एक बार भी घर चलने को नहीं कहा। अंदर ही अंदर उसे डर लगने लगा था कि कहीं दिव्या सच में उसे धोखा तो नहीं देने वाली है। राजेश दिव्या को टेस्ट करना चाहता था, उसे खुद भी गिल्टी फ़ील हो रही थी कि कल जो भी हुआ उसके लिए कहीं न कहीं वो भी जिम्मेदार है।
